PMO: प्रधानमंत्री कार्यालय शुक्रवार को नए बने सेवा तीर्थ में होगा शिफ्ट, साउथ ब्लॉक में आज आखिरी कैबिनेट मीटिंग

प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) शुक्रवार से नए बने सेवा तीर्थ में शिफ्ट होगा। साउथ ब्लॉक में आज आखिरी कैबिनेट बैठक संपन्न हुई — पूरा अपडेट पढ़ें। साउथ ब्लॉक का

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कार्यालय शुक्रवार को ऐतिहासिक साउथ ब्लॉक से निकलकर नए बने सेवा तीर्थ में शिफ्ट हो जाएगा। इसके साथ ही साउथ ब्लॉक में आज, शुक्रवार को पीएम मोदी की अंतिम कैबिनेट बैठक आयोजित होगी। 

नई दिल्ली: पिछले पांच दशकों से सरकार के सभी महत्वपूर्ण फैसलों का केंद्र रहे साउथ ब्लॉक में आज, शुक्रवार दोपहर को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ब्रिटिश काल की इमारत से निकलकर नवनिर्मित सेवा तीर्थ में स्थानांतरित हो जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को साउथ ब्लॉक में होने वाली अंतिम कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इसके बाद नए प्रशासनिक भवन का उद्घाटन किया जाएगा, जो रायसीना हिल स्थित इस प्रतिष्ठित इमारत से एक किलोमीटर से भी कम दूरी पर स्थित है।

सेवा तीर्थ: पीएमओ का नया घर

सेवा तीर्थ केवल प्रधानमंत्री कार्यालय का नया पता नहीं है, बल्कि यह प्रशासन के सर्वोच्च केंद्रों को एक ही परिसर में लाने वाला आधुनिक स्थल है। नए भवन में तीन मुख्य ब्लॉक हैं:

  • सेवा तीर्थ एक: प्रधानमंत्री कार्यालय
  • सेवा तीर्थ दो: कैबिनेट सचिवालय
  • सेवा तीर्थ तीन: राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार का कार्यालय

इस व्यवस्था से अब सभी संवेदनशील और उच्चस्तरीय निर्णय एक ही परिसर में किए जा सकेंगे। इससे पहले ये संस्थाएं अलग-अलग जगहों से संचालित होती थीं, जिससे तालमेल में कमी रहती थी। एनएसए अजीत डोभाल जैसे सुरक्षा विशेषज्ञ भी अब इसी परिसर से महत्वपूर्ण मीटिंग करेंगे।

इतिहास के पन्ने: साउथ ब्लॉक का महत्व

साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक का निर्माण 1931 में हुआ था और पिछले पांच दशकों से यह भारत सरकार के सर्वोच्च प्रशासनिक फैसलों का केंद्र रहा। साउथ ब्लॉक में ही प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में पहली कैबिनेट बैठक हुई थी। प्रधानमंत्री कार्यालय का इतिहास 1947 में बने छोटे पीएम सचिवालय से शुरू हुआ। 1964 में लाल बहादुर शास्त्री के कार्यकाल में इसे वैधानिक दर्जा मिला। इसके बाद इंदिरा गांधी के शासनकाल में अधिकार क्षेत्र बढ़ा और 1977 में इसे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का नाम दिया गया।

पूर्व में इसे केवल कार्यपालिका परिसर कहा जाता था। नाम बदलकर सेवा तीर्थ रखा गया है, जो शासन के केंद्र में सेवा और उत्तरदायित्व को महत्व देने का प्रतीक है। अधिकारियों के अनुसार यह कदम सत्ता-प्रधान प्रशासन से उत्तरदायित्व-आधारित शासन की ओर बड़े बदलाव का हिस्सा है।

साउथ ब्लॉक का भविष्य

प्रधानमंत्री कार्यालय के स्थानांतरण के बाद साउथ और नॉर्थ ब्लॉक को ऐतिहासिक संग्रहालय में परिवर्तित कर दिया जाएगा। यह परिवर्तन भारत में औपनिवेशिक युग के शासन केंद्र के अंत का प्रतीक माना जा रहा है। लगभग ₹1,200 करोड़ की लागत से बने सेवा तीर्थ का उद्देश्य केवल स्थानांतरण नहीं है, बल्कि सत्ता के प्रयोग और प्रशासन के तरीके को आधुनिक रूप देना भी है। नए भवन में अत्याधुनिक तकनीक और आधुनिक सुविधाओं का समावेश किया गया है, ताकि शासन के उच्च स्तरीय निर्णय और राष्ट्रीय सुरक्षा प्रबंधन और अधिक प्रभावी हो सके।

शुक्रवार को पीएम मोदी साउथ ब्लॉक में अपनी अंतिम कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता करेंगे। बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री और अधिकारी सेवा तीर्थ जाएंगे, जहाँ पीएमओ, कैबिनेट सचिवालय और एनएसए का कार्यालय एक ही परिसर में संचालित होंगे।

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