पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने चार साल की शिक्षा क्रांति का रिपोर्ट कार्ड पेश किया। सरकारी स्कूल प्राइवेट स्तर के बने, 19,279 करोड़ रुपए बजट, डिजिटल शिक्षा, 14,525 शिक्षकों की भर्ती और राष्ट्रीय उपलब्धियां हासिल हुई हैं।
चंडीगढ़: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने अपनी सरकार की “शिक्षा क्रांति” का चार सालों का विस्तृत रिपोर्ट कार्ड पेश किया। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूल अब प्राइवेट स्कूलों के बराबर खड़े हैं और पंजाब में शिक्षा का स्तर देश में अन्य राज्यों से बेहतर हो रहा है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जल्द ही कनाडा और ऑस्ट्रेलिया के विद्यार्थी बेहतर शिक्षा लेने के लिए पंजाब आएंगे।
चंडीगढ़ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री ने बताया कि शिक्षा क्रांति के तहत सरकारी स्कूलों को मॉडल स्कूल में बदलने के लिए लगातार सुधार किए गए हैं। उन्होंने राष्ट्रीय मूल्यांकन में शीर्ष रैंकिंग, रिकॉर्ड शैक्षणिक नतीजे, जीरो पेपर लीक और बुनियादी ढांचे तथा शिक्षक प्रशिक्षण में किए गए निवेश पर प्रकाश डाला।
वित्तीय प्रबंध और बजट में बढ़ोतरी
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बताया कि इस बदलाव को सुनिश्चित करने के लिए व्यापक वित्तीय प्रबंध किए गए हैं। वर्ष 2021-22 में शिक्षा बजट 12,657 करोड़ रुपए था, जो 2026-27 में बढ़ाकर 19,279 करोड़ रुपए कर दिया गया है। इस वृद्धि से यह स्पष्ट होता है कि शिक्षा क्षेत्र को राज्य सरकार द्वारा सबसे अधिक प्राथमिकता दी जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह रिपोर्ट कार्ड निरंतर जवाबदेही प्रक्रिया का हिस्सा है। इससे पहले सिंचाई, स्वास्थ्य, खेल और कानून व्यवस्था जैसे क्षेत्रों में भी चार सालों की कार्यगुजारी का रिपोर्ट कार्ड पेश किया गया था। यह कदम सरकार द्वारा हर क्षेत्र में विशेष ध्यान देने को दर्शाता है।
स्कूल और उच्च शिक्षा में व्यापक सुधार
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री ने स्कूल और उच्च शिक्षा में किए गए सुधारों की रूपरेखा पेश की। उन्होंने बताया कि पिछले चार सालों में ढांचागत सुधार, रिकॉर्ड निवेश और बेहतर नतीजे सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा को प्राथमिकता देने वाले देशों ने हर क्षेत्र में तरक्की की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकारों ने सरकारी स्कूलों को केवल मिड-डे मील केंद्र तक सीमित कर दिया था, लेकिन हमारी सरकार ने पूरी व्यवस्था बदल दी है। सरकारी स्कूल अब प्राइवेट स्कूलों के समान सुविधाएं प्रदान कर रहे हैं।
स्कूलों में पारदर्शिता और जवाबदेही
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक अप्रैल से माता-पिता को उनके बच्चे की स्कूल से अनुपस्थिति और शिक्षकों की छुट्टी की जानकारी दी जाएगी। इससे शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित होगी। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले चार सालों में पंजाब में एक भी पेपर लीक की घटना नहीं हुई, जो गर्व की बात है।
शिक्षा को दी गई सर्वोच्च प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा किसी भी राज्य या देश की तरक्की में सबसे बड़ा योगदान देती है। उन्होंने बताया कि स्मार्ट स्कूलों का नाम लेते हुए पहले केवल स्कूलों को पेंट किया जाता था, लेकिन सुविधाओं और शिक्षकों की कमी रहती थी। अब पंजाब के सरकारी स्कूल निजी संस्थानों के बराबर खड़े हैं।
वित्तीय प्रतिबद्धता और शिक्षा क्रांति का दूसरा चरण
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 19,279 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया गया है, जो पिछले साल से 7 प्रतिशत अधिक है। मुख्यमंत्री ने बताया कि शिक्षा क्रांति के दूसरे चरण की शुरुआत 3,500 करोड़ रुपए के साथ की जा रही है। इसके तहत विश्व बैंक के साथ साझेदारी की गई है, जिससे यह देश का सबसे बड़ा शिक्षा सुधार कार्यक्रम बन गया है।

राष्ट्रीय उपलब्धियां और केरल को पीछे छोड़ा
मुख्यमंत्री ने कहा कि नेशनल अचीवमेंट सर्वे-2024 में पंजाब ने केरल को पछाड़कर पहला स्थान हासिल किया है। गुजरात 16वें और हरियाणा लगभग 7वें या 8वें स्थान पर हैं। उन्होंने बताया कि 740 विद्यार्थियों ने जेईई और 1,284 ने नीट परीक्षा पास की है। सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय औसत से 18 प्रतिशत अधिक अंक प्राप्त किए हैं।
स्कूल ऑफ एमिनेंस और प्रतिभाशाली छात्रों के लिए पहल
मुख्यमंत्री ने बताया कि 118 स्कूल ऑफ एमिनेंस स्थापित किए जा रहे हैं, जिनमें से 60 पहले ही कार्यशील हैं। इन स्कूलों में विद्यार्थियों को उनकी योग्यताओं और रुचियों के अनुसार शिक्षा प्रदान की जा रही है। पहली बार 24 लाख माता-पिता ने मेगा पी.टी.एम. में हिस्सा लिया। स्कूलों में 30,000 विद्यार्थियों को मुफ्त वर्दियां दी गई हैं। विद्यार्थियों को मेडिकल, नॉन-मेडिकल और आर्म्ड फोर्सेज प्रिपरेटरी, नीट, जेईई जैसी परीक्षाओं के लिए कोचिंग भी दी जा रही है।
शिक्षकों की भर्ती और प्रशिक्षण
अप्रैल 2022 से 14,525 शिक्षकों की भर्ती की गई है। शिक्षा विभाग के 12,316 कर्मचारियों की सेवाएं रेगुलर की गई हैं। इसके अलावा प्रिंसिपलों और शिक्षकों के लिए विश्वस्तरीय प्रशिक्षण सुनिश्चित किया गया है। 264 शिक्षा अधिकारियों, प्रिंसिपलों और शिक्षकों के आठ बैच सिंगापुर भेजे गए। 216 प्राइमरी शिक्षकों के तीन बैच फिनलैंड में प्रशिक्षण के लिए गए। पांच बैच आईआईएम अहमदाबाद भेजे गए, जहां 249 मुख्य शिक्षकों ने लीडरशिप प्रशिक्षण प्राप्त किया।
अमृतसर के सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल की साइंस शिक्षिका गगनदीप कौर कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी, अमेरिका में दो महीने के कार्यक्रम में शामिल हुईं, जो शिक्षकों की क्षमता और समर्पण को दर्शाता है।
स्कूलों में रखरखाव और सुरक्षा
मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकारी स्कूलों में उचित रखरखाव और सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है। 1,932 कैंपस मैनेजर, 1,323 सुरक्षा गार्ड, 7,876 सफाई कर्मचारी और 1,792 चौकीदार भर्ती किए गए हैं। सभी सरकारी स्कूलों में 20 करोड़ रुपए के बजट से हाई-स्पीड फाइबर वाई-फाई सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
नए क्लासरूम, साइंस लैब, कंप्यूटर लैब, बहुउद्देशीय कमरे, रसोइयां, मेडिकल रूम, खेल के मैदान और लड़कों व लड़कियों के लिए अलग-अलग शौचालय बनाए गए हैं। विद्यार्थियों को समय पर किताबें और मुफ्त वर्दियां दी जा रही हैं। 25 सरकारी स्कूलों का नाम शहीदों, आजादी के सेनानियों और प्रमुख व्यक्तित्वों के नाम पर रखा गया है।
नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने बताया कि बिजनेस ब्लास्टर स्कीम के तहत विद्यार्थियों में उद्यमिता को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस योजना के तहत विद्यार्थियों ने सामूहिक रूप से 70 करोड़ रुपए कमाए हैं। पंजाब पहला राज्य है जिसने 11वीं कक्षा में उद्यमिता को विषय के रूप में पेश किया है।
स्कूल मेंटरशिप प्रोग्राम
मुख्यमंत्री ने स्कूल मेंटरशिप प्रोग्राम की शुरुआत की जानकारी दी। इसके तहत आईएएस, आईपीएस और सीनियर अधिकारी विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करेंगे। 350वें शहीदी दिवस के मौके पर विद्यार्थियों को गुरु साहिब के महान जीवन और कुर्बानी के बारे में जागरूक किया गया।
उच्च शिक्षा में सुधार
पंजाब ने देश की पहली डिजिटल ओपन यूनिवर्सिटी नीति-2026 पेश की है। आनंदपुर साहिब में गुरु तेग बहादुर जी के नाम पर विश्वस्तरीय यूनिवर्सिटी बनाई जाएगी। गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी ने ग्रामीण विद्यार्थियों के लिए ‘पंजाबी-फर्स्ट नीति’ लागू की है। सरकारी डिग्री कॉलेजों में ऑनलाइन एडमिशन पोर्टल शुरू किया गया है। 10 नए डिग्री कॉलेजों की योजना बनाई गई है और अजनाला में एक नया कॉलेज निर्माणाधीन है।
सरकारी कामकाज में पंजाबी अनिवार्य
भाषाई और सांस्कृतिक पहलों को मजबूती देने के लिए सरकारी कामकाज में पंजाबी को 100 प्रतिशत अनिवार्य किया गया है। 18,550 पुस्तकों को डिजिटलीकृत किया गया है। 592 दुर्लभ हस्तलिखितों को संरक्षित और डिजिटल किया गया है। 100 से अधिक किताबें अब ऑनलाइन उपलब्ध हैं। ‘शब्दमाला ई-डिक्शनरी’ को एंड्रॉइड एप के रूप में लॉन्च किया गया है।








