ईस्टर्न लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर लंबे समय से जारी गतिरोध को खत्म करने के लिए भारत और चीन की सेनाओं के बीच एक बार फिर कोर कमांडर स्तर की बातचीत होने की संभावना है। इस अहम सैन्य वार्ता में भारत की ओर से नए कोर कमांडर की भागीदारी देखने को मिल सकती है।
नई दिल्ली: पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारत और चीन के बीच जारी सीमा विवाद को सुलझाने की दिशा में एक बार फिर कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर महत्वपूर्ण कदम उठाए जाने की तैयारी है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से जारी गतिरोध को कम करने के लिए जल्द ही कोर कमांडर स्तर की नई बैठक आयोजित होने की संभावना है, जिसमें सीमा प्रबंधन और सुरक्षा से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा होगी।
इस बार बातचीत में भारतीय पक्ष से नया नेतृत्व शामिल हो सकता है, क्योंकि भारतीय सेना की 14वीं कोर में नेतृत्व परिवर्तन होने जा रहा है। मौजूदा कोर कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हितेश भल्ला को उत्तरी कमान (Northern Command) में चीफ ऑफ स्टाफ की जिम्मेदारी दी जा रही है। उनकी जगह लेफ्टिनेंट जनरल (नामित) मदनराज पांडे को 14वीं कोर की कमान सौंपी जाएगी। यह कोर पूर्वी लद्दाख जैसे अत्यंत संवेदनशील और ऊंचाई वाले क्षेत्र में सुरक्षा संचालन की जिम्मेदारी संभालती है।
WMCC बैठक के बाद बढ़ी बातचीत की उम्मीद
भारत-चीन सीमा मामलों पर समन्वय के लिए बनी संस्था WMCC की हालिया बैठक के बाद यह संकेत मिला है कि दोनों देशों के बीच सैन्य स्तर की बातचीत फिर से तेज हो सकती है। इसी के तहत कोर कमांडर स्तर की वार्ता को आगे बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। पिछले वर्ष अक्टूबर में हुई कोर कमांडर स्तर की बातचीत को सीमा तनाव कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना गया था। उस समय देपसांग और डेमचॉक जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में डिसइंगेजमेंट पर सहमति बनी थी।
पूर्वी लद्दाख में तनाव और पेट्रोलिंग व्यवस्था
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Eastern Ladakh क्षेत्र में अप्रैल 2020 के बाद से भारत और चीन के बीच सैन्य गतिरोध बना हुआ है। हालांकि कई स्थानों पर दोनों देशों की सेनाओं ने पीछे हटने की प्रक्रिया (disengagement) पूरी कर ली है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में अभी भी सीमित और नियंत्रित पेट्रोलिंग व्यवस्था लागू है। देपसांग और डेमचॉक क्षेत्रों में बनी सहमति के अनुसार, दोनों पक्षों की सेनाएं उन्हीं पारंपरिक पेट्रोलिंग पॉइंट्स पर गश्त कर रही हैं, जहां 2020 से पहले नियमित रूप से आवाजाही होती थी।
इनमें देपसांग के पांच और डेमचॉक के दो प्रमुख पॉइंट शामिल हैं। फिलहाल इन क्षेत्रों में स्थिति अपेक्षाकृत स्थिर बनी हुई है, हालांकि संवेदनशीलता अभी भी बनी हुई है।
नए कोर कमांडर की भूमिका होगी अहम
नई कोर कमांडर स्तर की बैठक ऐसे समय पर हो रही है जब दोनों देशों के बीच सीमाई विश्वास बहाली (confidence building measures) को आगे बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है। भारतीय सेना की Indian Army की 14वीं कोर, जिसे “फायर एंड फ्यूरी कोर” भी कहा जाता है, इस पूरे क्षेत्र की रणनीतिक जिम्मेदारी संभालती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नए नेतृत्व के आने से बातचीत की दिशा में नई ऊर्जा आ सकती है, हालांकि जमीनी स्तर पर किसी बड़े बदलाव के लिए दोनों देशों के बीच राजनीतिक सहमति भी जरूरी होगी। पिछले कुछ वर्षों में भारत और चीन ने कई दौर की सैन्य और कूटनीतिक बातचीत की है, लेकिन LAC पर पूरी तरह से स्थिति सामान्य नहीं हो सकी है। कुछ क्षेत्रों में सैनिकों की तैनाती अब भी बनी हुई है, जिससे तनाव की स्थिति समय-समय पर उभरती रहती है।










