पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से जारी अंदरूनी खींचतान के बीच संगठन में बड़े बदलाव की तैयारी चल रही है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को बदले जाने की अटकलों के बीच नए प्रदेश अध्यक्ष को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
Punjab Congress: पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से कुछ महीने पहले कांग्रेस ने राज्य संगठन में बड़े बदलाव की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के इस्तीफे के बाद अब पार्टी नए नेतृत्व की तैयारी में जुटी है। कांग्रेस हाईकमान ने वड़िंग को पद से हटाने का फैसला उन्हें बता दिया था, जिसके बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया। नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम की औपचारिक घोषणा जल्द होने की उम्मीद है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब पंजाब कांग्रेस लंबे समय से अंदरूनी मतभेदों से जूझ रही है। पार्टी के सामने अब सिर्फ नया प्रदेश अध्यक्ष चुनने की चुनौती नहीं है, बल्कि विभिन्न नेताओं और गुटों के बीच समन्वय कायम करते हुए चुनावी संगठन को तैयार करने की भी जिम्मेदारी है।
सचिन पायलट के आने के बाद तेज हुई संगठन की समीक्षा
कांग्रेस ने 5 सितंबर 2026 को सचिन पायलट को पंजाब का प्रभारी नियुक्त किया था। उन्होंने भूपेश बघेल की जगह यह जिम्मेदारी संभाली। नियुक्ति के बाद पायलट ने पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं, पदाधिकारियों और अलग-अलग समूहों से बातचीत की और संगठन की स्थिति को समझने की कोशिश की। रिपोर्टों के मुताबिक, इन बैठकों से मिले फीडबैक को पायलट ने पार्टी हाईकमान तक पहुंचाया।
इसी संगठनात्मक समीक्षा के बाद प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व में बदलाव का फैसला आगे बढ़ा। हालांकि, पार्टी के भीतर लिए गए फैसलों के पीछे की पूरी रणनीति का आधिकारिक विवरण कांग्रेस ने सार्वजनिक नहीं किया है।
जुलाई में वड़िंग को ही रखा गया था अध्यक्ष
दिलचस्प बात यह है कि जुलाई 2026 में कांग्रेस ने पंजाब संगठन में नेतृत्व को लेकर चल रही अटकलों के बीच राजा वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष के पद पर बनाए रखने का फैसला किया था। उसी समय पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को चुनाव अभियान समिति की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके अलावा पार्टी ने चुनावी तैयारियों के लिए अलग-अलग समितियां गठित की थीं। उस समय कांग्रेस का प्रयास विभिन्न नेताओं को अलग-अलग संगठनात्मक जिम्मेदारियां देकर संतुलन बनाने का था।
लेकिन यह व्यवस्था लंबे समय तक अंदरूनी मतभेदों को शांत नहीं कर सकी। बाद के महीनों में नेतृत्व परिवर्तन की मांग फिर तेज हुई और अंततः सितंबर के अंत में वड़िंग के पद छोड़ने की स्थिति बनी।
पंजाब कांग्रेस में गुटों के बीच मतभेद

पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर मतभेदों में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थकों के अलावा सुखजिंदर सिंह रंधावा, परगट सिंह और अन्य वरिष्ठ नेताओं के नाम भी सामने आते रहे हैं। वड़िंग को जुलाई में पद पर बनाए रखने के फैसले के बाद भी संगठन के भीतर असंतोष की खबरें सामने आईं। कांग्रेस नेतृत्व के लिए सबसे बड़ी चुनौती यही रही कि अलग-अलग राजनीतिक आधार वाले नेताओं को एक साझा चुनावी रणनीति के तहत कैसे साथ रखा जाए।
नए अध्यक्ष की दौड़ में कई नाम
राजा वड़िंग के बाद नए प्रदेश अध्यक्ष के चयन को लेकर कई नाम चर्चा में हैं। इनमें विजय इंदर सिंगला, परगट सिंह और सुखजिंदर सिंह रंधावा प्रमुख रूप से सामने आए हैं। कुछ रिपोर्टों में अन्य वरिष्ठ नेताओं के नामों का भी उल्लेख किया गया है। विजय इंदर सिंगला को मौजूदा चर्चाओं में प्रमुख दावेदारों में बताया जा रहा है। हालांकि, अंतिम फैसला कांग्रेस हाईकमान की आधिकारिक घोषणा से ही स्पष्ट होगा। नए अध्यक्ष के सामने पार्टी के अलग-अलग क्षेत्रों और सामाजिक समूहों के बीच संगठनात्मक संतुलन बनाने की चुनौती रहेगी।
क्या राजा वड़िंग को मिल सकती है नई जिम्मेदारी?
राजा वड़िंग के प्रदेश अध्यक्ष पद से हटने के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर भी चर्चा है। वड़िंग वर्तमान में लुधियाना से लोकसभा सांसद हैं। हालांकि, उन्हें किसी दूसरे राज्य में संगठनात्मक जिम्मेदारी दिए जाने या कांग्रेस में कोई अन्य महत्वपूर्ण भूमिका मिलने की अटकलों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
इसलिए फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि वड़िंग को पार्टी में कौन सी नई जिम्मेदारी मिलेगी। उनका आगे का राजनीतिक रोल कांग्रेस नेतृत्व के अगले फैसलों पर निर्भर करेगा।










