पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच अकाली दल (वारिस पंजाब दे) ने बुधवार, 12 अगस्त को दो और प्रत्याशियों के नामों का ऐलान किया है। इससे पहले पार्टी ने बस्सी पठाना सीट से सतवंत सिंह को अपना उम्मीदवार घोषित किया था।
Punjab Assembly Election 2027: पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। अकाली दल वारिस पंजाब दे ने बुधवार, 12 अगस्त को दो और उम्मीदवारों के नाम का ऐलान किया। पार्टी ने अमृतपाल सिंह के करीबी माने जाने वाले दलजीत कलसी को अमृतसर जिले की अजनाला विधानसभा सीट से और गुरमीत सिंह बुक्कनवाला को मोगा सीट से चुनाव मैदान में उतारने का फैसला किया है।
दोनों नामों की घोषणा के साथ पार्टी ने यह संकेत दिया है कि वह आगामी विधानसभा चुनाव में सीमित सीटों के बजाय पंजाब की राजनीति में अपनी मौजूदगी को व्यापक बनाने की कोशिश कर रही है। पार्टी के प्रमुख अमृतपाल सिंह फिलहाल राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद हैं।
कौन हैं पार्टी के नए उम्मीदवार?
अमृतपाल सिंह के करीबी सहयोगी माने जाने वाले दलजीत कलसी पंजाबी मनोरंजन जगत से भी जुड़े रहे हैं। पार्टी ने उन्हें अजनाला विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया है। दूसरे उम्मीदवार गुरमीत सिंह बुक्कनवाला को मोगा से टिकट दिया गया है। दोनों ही पहले अमृतपाल सिंह के साथ NSA के तहत हिरासत में रह चुके हैं।
पिछले वर्ष दोनों से NSA हटाया गया था, लेकिन 2023 में अजनाला पुलिस थाने में हुई हिंसा से जुड़े मामले में वे अभी जेल में हैं। ऐसे में इन दोनों उम्मीदवारों की उम्मीदवारी पंजाब की चुनावी राजनीति के साथ-साथ कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन सकती है।
इससे पहले सतवंत सिंह को दिया था टिकट
अकाली दल वारिस पंजाब दे ने दो नए उम्मीदवारों की घोषणा से पहले सतवंत सिंह को बस्सी पठाना विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया था। सतवंत सिंह, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए केहर सिंह के बेटे हैं। इस तरह पार्टी ने अब तक जिन उम्मीदवारों के नाम घोषित किए हैं, उनमें अमृतपाल सिंह के करीबी सहयोगियों के साथ-साथ पंजाब के विवादित राजनीतिक इतिहास से जुड़े परिवार का नाम भी शामिल है।
2024 लोकसभा चुनाव में अमृतपाल सिंह की जीत

अमृतपाल सिंह ने 2024 के लोकसभा चुनाव में खडूर साहिब सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीता था। जेल में रहते हुए मिली इस जीत ने पंजाब की राजनीति में उनकी राजनीतिक पकड़ और समर्थक आधार को लेकर नई चर्चा शुरू की थी। अब उनकी पार्टी विधानसभा चुनाव के जरिए इस समर्थन को राज्य की राजनीति में बदलने की कोशिश कर रही है।
हालांकि, विधानसभा चुनाव का मुकाबला लोकसभा चुनाव से अलग होता है और इसमें स्थानीय संगठन, उम्मीदवार की लोकप्रियता तथा क्षेत्रीय समीकरण महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
2027 में पंजाब में होगा बहुकोणीय मुकाबला
पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 में कई राजनीतिक दलों के बीच मुकाबला होने की संभावना है। 2022 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्पष्ट बहुमत के साथ सरकार बनाई थी। भगवंत मान के नेतृत्व में पार्टी ने कांग्रेस और पारंपरिक राजनीतिक दलों को बड़ा झटका दिया था।अब आम आदमी पार्टी की प्राथमिकता सत्ता में वापसी की होगी। पार्टी सरकार के कामकाज और अपनी कल्याणकारी योजनाओं को चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश करेगी।
वहीं कांग्रेस की कोशिश सत्ता विरोधी माहौल का लाभ उठाकर सरकार बनाने की होगी। पार्टी राज्य में अपने संगठन को मजबूत करने और मतदाताओं को दोबारा अपने पक्ष में लाने की रणनीति पर काम कर सकती है।
BJP और अकाली दल की भी नजर सत्ता पर
भारतीय जनता पार्टी पंजाब में अपने संगठन का विस्तार कर रही है और आगामी चुनाव में मजबूत प्रदर्शन का दावा कर रही है। दूसरी ओर, शिरोमणि अकाली दल भी राज्य की राजनीति में अपनी पारंपरिक भूमिका वापस हासिल करने की कोशिश करेगा। इन बड़े दलों के अलावा अमृतपाल सिंह की पार्टी का मैदान में उतरना चुनाव को और अधिक दिलचस्प बना सकता है। खासकर उन विधानसभा क्षेत्रों में जहां पंथक राजनीति, ग्रामीण मतदाता और स्थानीय मुद्दे चुनावी परिणामों को प्रभावित करते हैं।










