पंजाब की मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत पिछले छह महीनों में 914 स्ट्रोक मरीजों का 4.15 करोड़ रुपये की लागत से कैशलेस इलाज किया गया। सरकार का कहना है कि समय पर उपचार और आर्थिक सहायता से मरीजों की जान बचाने में मदद मिल रही है।
चंडीगढ़: पंजाब सरकार की मुख्यमंत्री सेहत योजना गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए राहत का माध्यम बन रही है। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के अनुसार, पिछले छह महीनों में 914 स्ट्रोक मरीजों को इस योजना के तहत कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया गया। सरकार का कहना है कि समय पर उपचार और आर्थिक सहायता से मरीजों की रिकवरी की संभावना बढ़ रही है।
914 मरीजों को मिला कैशलेस उपचार
पंजाब सरकार की मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत पिछले छह महीनों में स्ट्रोक से पीड़ित 914 मरीजों का कैशलेस इलाज किया गया। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (SHA) के आंकड़ों के अनुसार, इन मरीजों के उपचार पर करीब 4.15 करोड़ रुपये खर्च किए गए। योजना का उद्देश्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को आर्थिक बोझ से राहत देते हुए समय पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है।

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, स्ट्रोक जैसी आपात स्थिति में इलाज में थोड़ी भी देरी मरीज की जान और स्वास्थ्य दोनों पर गंभीर असर डाल सकती है। ऐसे में कैशलेस सुविधा मरीजों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है।
इस्कीमिक स्ट्रोक के सबसे अधिक मामले
राज्य स्वास्थ्य एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, उपचार किए गए मामलों में एक्यूट इस्कीमिक स्ट्रोक के मरीजों की संख्या सबसे अधिक रही। इस श्रेणी के 48 मामलों के इलाज पर लगभग 14.27 लाख रुपये खर्च किए गए। वहीं, एक्यूट स्ट्रोक के मामलों का भी बड़ी संख्या में उपचार किया गया।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि सीटी स्कैन, एमआरआई जैसी आधुनिक जांच और ट्रेकियोस्टॉमी तथा रक्त चढ़ाने जैसी अतिरिक्त चिकित्सा प्रक्रियाओं वाले मामलों में उपचार की लागत अधिक रही। हेमरेजिक स्ट्रोक के मामलों की संख्या अपेक्षाकृत कम रही, लेकिन प्रति मरीज इलाज का खर्च अधिक दर्ज किया गया।
समय पर इलाज से बढ़ती है रिकवरी की संभावना
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी मरीज को आर्थिक कारणों से इलाज में देरी न करनी पड़े। उन्होंने कहा कि स्ट्रोक जैसी आपात स्थिति में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है और समय पर उपचार मिलने से मरीज की जान बचाने के साथ उसकी रिकवरी की संभावना भी बढ़ जाती है।
डॉक्टरों के अनुसार, शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर तुरंत अस्पताल पहुंचना, समय पर जांच कराना और आधुनिक उपचार उपलब्ध होना स्ट्रोक के प्रभाव को काफी हद तक कम कर सकता है।
स्वस्थ जीवनशैली से घट सकता है खतरा
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अमेरिका के सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के अनुसार, स्ट्रोक दुनिया में मृत्यु और स्थायी विकलांगता के प्रमुख कारणों में शामिल है। विशेषज्ञों का कहना है कि उच्च रक्तचाप, मधुमेह, धूम्रपान, असंतुलित खानपान और शारीरिक निष्क्रियता जैसे जोखिम कारकों को नियंत्रित करके स्ट्रोक की संभावना काफी कम की जा सकती है।
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से नियमित स्वास्थ्य जांच कराने, रक्तचाप और शुगर को नियंत्रित रखने, संतुलित आहार अपनाने तथा नियमित व्यायाम करने की अपील की है। सरकार का मानना है कि मुख्यमंत्री सेहत योजना जैसी स्वास्थ्य योजनाएं गंभीर बीमारियों के इलाज में आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ समय पर उपचार सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।







