कहानी: मुम्बई जैसे एक विशाल और भाग-दौड़ भरे महानगर में, गगनचुंबी इमारतों के साये में, एक छोटी सी झोपड़पट्टी में आर्यन नाम का एक नन्हा लड़का रहता था। आर्यन लगभग दस साल का था और उसकी दुनिया किताबों या वीडियो गेम की नहीं, बल्कि रंगों और कल्पना की थी। उसके पास महँगे खिलौने नहीं थे, लेकिन उसके हाथ में जब भी पेंसिल या कोयला आता, वह किसी भी खाली दीवार या ज़मीन को अपनी कला से जीवंत कर देता था। वह एक नन्हा कलाकार था, जो अपनी गरीबी को अपनी रचनात्मकता के बीच कभी नहीं आने देता था।
कूड़े में मिला अनमोल खजाना
एक ठंडी सुबह, आर्यन रोज़ की तरह कबाड़ बीनने वाले अपने दादाजी के साथ निकला था। उसकी नज़र एक बड़े कूड़ेदान के पास पड़ी, जहाँ अमीर घरों के पुराने सामान फेंक दिए जाते थे। वहाँ उसे कपड़े और प्लास्टिक के ढेर में लिपटी हुई, एक पुरानी गुड़िया मिली।
यह कोई फैंसी गुड़िया नहीं थी। इसके बाल उलझे हुए थे, इसका एक हाथ टूटा हुआ था, और इसका कपड़ा फटा हुआ था। इसकी आँखें भी फीकी पड़ गई थीं। मगर आर्यन को यह गुड़िया एक खजाना लगी। उसने उसे धीरे से उठाया, प्यार से साफ किया, और अपनी झोपड़ी में ले आया। उसने उसका नाम 'परी' रखा।
परी का नया जीवन
आर्यन ने तय किया कि वह 'परी' को नया जीवन देगा। उसके पास न तो गुड़िया बनाने के औजार थे और न ही नया सामान। लेकिन उसके पास उसका कलाकार दिमाग और कुछ टूटी-फूटी चीज़ें थीं।
उसने अपनी फटी हुई कमीज़ के धागों से गुड़िया के उलझे हुए बालों को धीरे-धीरे सुलझाया और उन्हें एक छोटी सी चोटी में बाँधा।
टूटे हुए हाथ को जोड़ने के लिए उसने मिट्टी और गोंद के मिश्रण का उपयोग किया, और फिर सूखने के लिए छोड़ दिया।
सबसे खास बात, उसने अपनी पुरानी स्केचबुक से सबसे चमकीले रंग निकाले। उसने गुड़िया के फीके पड़ चुके चेहरे को फिर से रंगा, उसकी आँखों में चमक भर दी, और उसके गालों पर हल्की गुलाबी रंगत दी।
जब 'परी' तैयार हुई, तो वह कूड़े में मिली गुड़िया नहीं लग रही थी; वह किसी छोटी राजकुमारी की तरह लग रही थी, जिसे आर्यन के प्यार और कला ने जादूई स्पर्श दिया हो।
नन्हा कलाकार का सम्मान
आर्यन अब 'परी' को अपने साथ रखता था और जहाँ भी वह अपनी कला दिखाता, गुड़िया उसके पास बैठी रहती थी। एक दिन, एक मशहूर कला स्कूल की प्रधानाचार्य, मिस राव, सड़क किनारे घूम रही थीं। उनकी नज़र आर्यन की बनाई एक अद्भुत दीवार पेंटिंग पर पड़ी। पास ही बैठी मरम्मत की हुई 'परी' गुड़िया को देखकर वह और भी प्रभावित हुईं।
जब मिस राव ने आर्यन से गुड़िया के बारे में पूछा, तो उसने गर्व से बताया कि उसने कैसे अपनी कला से उसे नया जीवन दिया। मिस राव समझ गईं कि इस बच्चे में केवल चित्र बनाने की नहीं, बल्कि टूटी हुई चीज़ों में सुंदरता देखने और उन्हें सँवारने की अद्भुत प्रतिभा है। उन्होंने तुरंत आर्यन को अपने स्कूल में छात्रवृत्ति देने की पेशकश की, ताकि वह अपनी कला को सही दिशा दे सके। आर्यन का चेहरा खुशी से चमक उठा। 'परी' गुड़िया उसकी कला और उसके सपनों की चाबी बन गई थी।
कहानी से सीख
महानगर का नन्हा कलाकार आर्यन, कूड़े में मिली पुरानी गुड़िया 'परी' को अपनी कला से नया जीवन देता है। गुड़िया की अद्भुत मरम्मत देखकर कला प्रधानाचार्य मिस राव उसकी प्रतिभा से प्रभावित होती हैं। वह आर्यन को छात्रवृत्ति देती हैं। यह कहानी सिखाती है कि सच्ची कला और रचनात्मकता से टूटी हुई चीज़ों को भी मूल्यवान बनाया जा सकता है।













