एक हरे-भरे जंगल में, जहाँ ऊँचे-ऊँचे पेड़ थे और एक ठंडी नदी बहती थी, वहाँ एक बुद्धिमान भालू रहता था जिसका नाम भोला था। भोला अपनी समझदारी और शांत स्वभाव के लिए पूरे जंगल में प्रसिद्ध था। जब भी किसी को कोई मुश्किल होती थी, वे भोला के पास सलाह लेने आते थे। उसी जंगल में एक बहुत शरारती बंदर भी रहता था, जिसका नाम मिठ्ठू था।
मिठ्ठू दिन भर उछल-कूद करता, दूसरों को तंग करता और छोटी-छोटी चोरियाँ करता था। उसकी शरारतों से जंगल के बाकी जानवर अक्सर परेशान रहते थे। भोला भालू जानता था कि मिठ्ठू दिल का बुरा नहीं है, बस थोड़ा भटक गया है।
मिठ्ठू की शरारत
एक दिन, भोला भालू ने अपनी सर्दियों की तैयारी के लिए बहुत सारा शहद इकट्ठा किया। उसने शहद के घड़ों को एक बड़े, सुरक्षित पेड़ की खोह में रखा और उस पर बड़े-बड़े पत्तों से पर्दा डाल दिया। मिठ्ठू बंदर हमेशा की तरह ताक में था। उसने भोला को छिपकर यह सब करते हुए देख लिया। मिठ्ठू के मुँह में पानी आ गया। उसने सोचा, 'इतना सारा शहद! मैं इसमें से थोड़ा चुरा लेता हूँ, भोला को पता भी नहीं चलेगा।'
रात होते ही, मिठ्ठू चुपके से उस पेड़ पर चढ़ा जहाँ भोला ने शहद रखा था। उसने पत्तों को हटाया और एक घड़े को उठाने की कोशिश की। लेकिन भोला ने अपने घड़ों को एक विशेष तरह की चिपचिपी बेल से बाँध रखा था, जिसे उसने नदी के किनारे से लिया था। जैसे ही मिठ्ठू ने घड़े को छुआ, उसके हाथ और पैर उस चिपचिपी बेल में बुरी तरह से फँस गए। वह जितना ज़ोर लगाता, उतना ही ज़्यादा फँसता जाता।
भोला भालू की समझदारी
अगली सुबह, जब भोला अपने शहद की जाँच करने आया, तो उसने फँसे हुए मिठ्ठू को देखा। मिठ्ठू डर के मारे काँप रहा था और रो रहा था।
भोला ने शांति से कहा, 'मिठ्ठू, मैंने तुम्हें देखा था। तुम जानते थे कि यह मेरा है, फिर भी तुम इसे चुराने आए।'
मिठ्ठू ने गिड़गिड़ाते हुए कहा, 'मुझे माफ़ कर दो, भोला भाई। मेरी शरारत ने मुझे फँसा दिया। कृपया मुझे बाहर निकालो! मैं कसम खाता हूँ कि अब कभी चोरी नहीं करूँगा और किसी को परेशान नहीं करूँगा।'
भोला जानता था कि मिठ्ठू को अपनी गलती का एहसास हो गया है। उसने तुरंत मिठ्ठू को बाहर निकालने के बजाय, एक अनोखी तरकीब अपनाई। उसने कहा, 'मिठ्ठू, मैं तुम्हें तभी बाहर निकालूँगा जब तुम मुझे मेरे 10 सबसे अच्छे दोस्तों के नाम बताओगे, जिनकी तुमने कभी कोई मदद की हो।'
मिठ्ठू ने सोचा, और सोचने लगा। लेकिन अफसोस! अपनी शरारतों के कारण, उसका कोई सच्चा दोस्त नहीं था जिसकी उसने कभी मदद की हो। वह उदास हो गया और रोने लगा।
शरारती बंदर का बदलाव
भोला ने मिठ्ठू की उदासी देखी। उसने धीरे से उस चिपचिपी बेल को काटा और मिठ्ठू को आज़ाद कर दिया। भोला ने उसे गले लगाते हुए कहा, 'मिठ्ठू, शहद तो वापस मिल जाएगा, पर खोया हुआ विश्वास वापस नहीं मिलता। आज से, शरारत छोड़ो और दूसरों की मदद करना शुरू करो। तब तुम्हें सच्चे दोस्त मिलेंगे।'
मिठ्ठू ने अपनी गलती से बहुत बड़ा सबक सीखा। उस दिन से उसने अपनी शरारतें बंद कर दीं और उसने छोटे जानवरों की मदद करना और बड़े जानवरों का सम्मान करना शुरू कर दिया। अब वह जंगल में 'सहायक मिठ्ठू' के नाम से जाना जाने लगा।
कहानी से सीख
यह कहानी बुद्धिमान भालू भोला और शरारती बंदर मिठ्ठू की है। शहद चुराते समय मिठ्ठू फँस जाता है। भोला उसे सज़ा देने के बजाय, उससे पूछता है कि उसने कितने दोस्तों की मदद की है। कोई दोस्त न होने का एहसास मिठ्ठू को सुधारता है। भोला की दयालुता और बुद्धिमानी मिठ्ठू को शरारत छोड़कर दूसरों की मदद करना सिखाती है, जिससे वह एक बेहतर प्राणी बन जाता है।













