विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत-रूस संबंधों की मजबूती और रणनीतिक महत्व पर जोर दिया। दोनों देशों ने व्यापार, ऊर्जा, न्यूक्लियर प्रोजेक्ट्स, संस्कृति और सुरक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। पुतिन की भारत यात्रा से रिश्ते और गहरे हुए।
नई दिल्ली: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में ‘भारत और रूस: एक नए द्विपक्षीय एजेंडा की ओर’ सम्मेलन को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित किया। उन्होंने भारत और रूस के आपसी संबंधों की मजबूती और रणनीतिक महत्व पर जोर दिया। जयशंकर ने कहा कि दशकों से भारत-रूस सहयोग ने क्षेत्रीय और वैश्विक शांति, स्थिरता और विकास को आगे बढ़ाया है। वर्तमान में बदलते भू-राजनैतिक हालात के बीच भारत और रूस का जुड़ाव और भी गहरा होता जा रहा है।
जयशंकर ने बताया कि उच्चस्तरीय बातचीत और निरंतर संपर्क दोनों देशों के बीच विश्वास और साझेदारी को मजबूत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक संकटों और चुनौतियों के समय में रूस के साथ संतुलित और समावेशी तरीके से काम करने के लिए तैयार है।
BRICS अध्यक्षता और भारत की प्राथमिकताएं
विदेश मंत्री ने BRICS की अध्यक्षता में भारत की भूमिका पर भी बात की। उन्होंने कहा कि भारत मानवता को प्राथमिकता देता है और जन-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाते हुए वैश्विक सहयोग को बढ़ावा दे रहा है। रूस के साथ मिलकर भारत साझा चुनौतियों का समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध है। जयशंकर ने यह भी कहा कि भारत-रूस साझेदारी सिर्फ व्यापार और ऊर्जा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सामाजिक, सांस्कृतिक और तकनीकी सहयोग भी शामिल है।
जयशंकर ने इस मौके पर अपनी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दोहराया और कहा कि भारत रूस के साथ अपनी मजबूत मित्रता और साझेदारी को लगातार आगे बढ़ाने के लिए तैयार है।
पुतिन की भारत यात्रा का महत्व
विदेश मंत्री ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के दिसंबर 2025 में भारत दौरे का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस यात्रा ने दोनों देशों के बीच कई नए आयाम खोले। यात्रा के दौरान मोबिलिटी, हेल्थ, फूड सेफ्टी और मेरीटाइम सहयोग जैसे कई अहम समझौते हुए।

इसके अलावा फर्टिलाइजर्स, कस्टम और कॉमर्स, एकेडमिक और मीडिया कोऑपरेशन पर भी महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। दोनों देशों ने व्यापार को वर्तमान 68.7 बिलियन डॉलर से बढ़ाकर 2030 तक 100 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा। यह यात्रा भारत-रूस संबंधों में रणनीतिक गहराई और व्यापारिक विस्तार का प्रतीक रही।
रणनीतिक और ऊर्जा सहयोग
जयशंकर ने बताया कि भारत और रूस ने द्विपक्षीय सहयोग को बेहद संतुलित तरीके से आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। दोनों देशों ने भारतीय वर्कफोर्स के सही उपयोग और ट्रेड में फ्री टैरिफ जैसे पहलुओं पर चर्चा की। रूस हमेशा से भारत का भरोसेमंद सहयोगी रहा है, खासकर सिविल न्यूक्लियर एनर्जी के क्षेत्र में।
कुडानकुलम न्यूक्लियर प्रोजेक्ट इसका स्पष्ट उदाहरण है। भारत लगातार न्यूक्लियर एनर्जी जेनरेशन क्षमता बढ़ाने पर फोकस कर रहा है। सरकार की योजना है कि 2047 तक 100 किलोवॉट क्षमता हासिल की जाए। यह ऊर्जा सहयोग दोनों देशों के रणनीतिक और आर्थिक हितों को मजबूत करने वाला कदम है।
रूस का भरोसेमंद सहयोगी
जयशंकर ने कहा कि रूस भारत का मजबूत और भरोसेमंद सहयोगी बना रहेगा। न्यूक्लियर एनर्जी के क्षेत्र में रूस का समर्थन शांतिपूर्ण और स्थायी रहेगा। इसके अलावा योग, आयुर्वेद, कला और संस्कृति में भी दोनों देशों के बीच लोगों का जुड़ाव बढ़ रहा है।
विदेश मंत्री ने बताया कि भारत की BRICS अध्यक्षता में मानवता और लोगों को केंद्र में रखने वाली नीति अपनाई जा रही है। रूस के साथ सहयोग के माध्यम से भारत वैश्विक स्तर पर संतुलित और जिम्मेदार भूमिका निभा रहा है।
मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता
जयशंकर ने सम्मेलन में दोहराया कि भारत-रूस की विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए भारत पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि बदलती बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में BRICS, SCO, G20 और संयुक्त राष्ट्र जैसे मंचों के माध्यम से दोनों देशों को और अधिक सहयोग बढ़ाना होगा।
विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि भारत-रूस सहयोग का उद्देश्य केवल आर्थिक लाभ नहीं है, बल्कि इसमें सुरक्षा, ऊर्जा, तकनीक और संस्कृति के क्षेत्रों में संतुलन बनाए रखना भी शामिल है।









