ऑस्ट्रेलिया: क्वींसलैंड के युवा निरोध केंद्रों में कर्मचारियों की हड़ताल, सुरक्षा, हिंसा और स्टाफ की कमी पर बढ़ा विवाद

ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड मे युवा निरोध केंद्रों के कर्मचारियों ने सुरक्षा, स्टाफ की कमी और भीड़भाड़ के विरोध में हड़ताल की। सरकार और यूनियन के बीच वार्ता जारी।

ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड में युवा निरोध केंद्रों के कर्मचारियों ने सुरक्षा, बढ़ती हिंसा, स्टाफ की कमी और भीड़भाड़ के विरोध में हड़ताल शुरू कर दी। कर्मचारियों का कहना है कि कार्यस्थल की परिस्थितियां लगातार खराब हो रही हैं और तत्काल सुधार की जरूरत है।

क्वींसलैंड: ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड राज्य में युवा निरोध (Youth Detention) केंद्रों के कर्मचारियों ने सुरक्षा, बढ़ती हिंसा, भीड़भाड़ और स्टाफ की कमी के विरोध में औद्योगिक कार्रवाई (Industrial Action) शुरू कर दी है। राज्य के कई प्रमुख युवा निरोध केंद्रों के कर्मचारी एक साथ काम छोड़कर प्रदर्शन में शामिल हुए, जिससे राज्य की किशोर न्याय व्यवस्था और कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर नई बहस छिड़ गई है।

हड़ताल में ब्रिस्बेन यूथ डिटेंशन सेंटर, क्लीवलैंड यूथ डिटेंशन सेंटर, वेस्ट मॉर्टन यूथ डिटेंशन सेंटर और वाकोल यूथ रिमांड सेंटर के कर्मचारी शामिल हुए। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से सरकार को सुरक्षा और कार्य परिस्थितियों में सुधार की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक पर्याप्त समाधान नहीं निकला है।

मार्च से चल रही वेतन और कार्य शर्तों पर बातचीत

यूनियन और सरकार के बीच नए एंटरप्राइज बार्गेनिंग एग्रीमेंट (Enterprise Bargaining Agreement) को लेकर बातचीत मार्च की शुरुआत से जारी है। हालांकि कई दौर की वार्ताओं के बावजूद कोई अंतिम समझौता नहीं हो सका। इसी असंतोष के चलते करीब 100 कर्मचारियों ने वाकोल स्थित केंद्र के बाहर प्रदर्शन किया। सुबह शुरू हुआ यह प्रदर्शन कई घंटों तक चला, जिसमें कर्मचारियों ने बेहतर सुरक्षा, पर्याप्त स्टाफ और सुरक्षित कार्यस्थल की मांग उठाई। यूनियन का कहना है कि यदि कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आगे भी विरोध प्रदर्शन जारी रह सकता है।

कर्मचारियों ने बढ़ती हिंसा पर जताई चिंता

हड़ताल का सबसे बड़ा कारण निरोध केंद्रों में बढ़ती हिंसक घटनाएं बताई जा रही हैं। यूनियन के अनुसार पिछले 12 महीनों के दौरान कर्मचारियों पर सैकड़ों हमले दर्ज किए गए हैं, जिससे उनके बीच असुरक्षा की भावना लगातार बढ़ी है।

कर्मचारियों का कहना है कि कई बार उन्हें ऐसे हालात में काम करना पड़ता है जहां पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था और आवश्यक संसाधन उपलब्ध नहीं होते। उनका आरोप है कि लगातार बढ़ते कार्यभार और कम स्टाफ के कारण हिंसक घटनाओं से निपटना और अधिक कठिन हो गया है।

यूनियन ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

ऑस्ट्रेलियन वर्कर्स यूनियन (Australian Workers' Union) की क्वींसलैंड सचिव स्टेसी शिनरल ने प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य की युवा न्याय व्यवस्था का पूरा दबाव अब कर्मचारियों पर आ गया है।

उन्होंने कहा कि कर्मचारी लगातार हिंसा, मानसिक दबाव और असुरक्षित कार्य परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा।

उनके अनुसार पिछले एक वर्ष में लगभग 500 गंभीर सुरक्षा घटनाएं दर्ज की गई हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी व्यवस्था में कर्मचारियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

स्टाफ की कमी बनी बड़ी चुनौती

यूनियन ने यह भी दावा किया कि पिछले 12 महीनों में युवा निरोध केंद्र अपने लगभग 60 प्रतिशत कर्मचारियों को बनाए रखने में विफल रहे हैं। बड़ी संख्या में कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने से पहले से मौजूद स्टाफ पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अनुभवी कर्मचारी लगातार संस्थान छोड़ते रहेंगे, तो नए कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने और सुरक्षा मानकों को बनाए रखने में कठिनाई आएगी। इससे केंद्रों की कार्यक्षमता और किशोरों की निगरानी दोनों प्रभावित हो सकती हैं।

भीड़भाड़ ने बढ़ाई समस्याएं

कर्मचारियों का कहना है कि युवा निरोध केंद्रों में क्षमता से अधिक किशोरों को रखा जा रहा है। बढ़ती भीड़भाड़ के कारण सुरक्षा जोखिम बढ़ रहे हैं और कर्मचारियों के लिए प्रत्येक बंदी पर प्रभावी निगरानी रखना मुश्किल होता जा रहा है।

भीड़भाड़ का असर केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि पुनर्वास कार्यक्रम, मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं और दैनिक संचालन पर भी पड़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि निरोध केंद्रों में क्षमता के अनुरूप व्यवस्था नहीं होगी, तो सुधारात्मक कार्यक्रमों की गुणवत्ता भी प्रभावित होगी।

सरकार ने कहा- बातचीत जारी है

क्वींसलैंड की युवा न्याय मंत्री लॉरा गर्बर ने बयान जारी कर कहा कि सरकार कर्मचारियों और निरोध केंद्रों में मौजूद युवाओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है।

उन्होंने कहा कि सरकार सद्भावना के साथ एंटरप्राइज बार्गेनिंग समझौते पर बातचीत कर रही है और यूनियनों से भी वार्ता जारी रखने की अपील की है।

मंत्री ने यह भी बताया कि सरकार ने पहले ही युवा निरोध केंद्रों में कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई है और निरोध केंद्रों की क्षमता में लगभग 25 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। साथ ही भविष्य में अतिरिक्त बेड उपलब्ध कराने की योजना पर भी काम चल रहा है।

युवा अपराध नीति पर फिर शुरू हुई बहस

यह हड़ताल ऐसे समय हुई है जब क्वींसलैंड में युवा अपराध (Youth Crime) को लेकर पहले से ही राजनीतिक बहस जारी है। विपक्ष और विभिन्न सामाजिक संगठनों का कहना है कि केवल कठोर कानून बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि निरोध केंद्रों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए सुरक्षित और संतुलित कार्य वातावरण भी सुनिश्चित करना आवश्यक है।

दूसरी ओर सरकार का कहना है कि वह कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ कर्मचारियों की सुरक्षा और निरोध केंद्रों की क्षमता बढ़ाने के लिए लगातार निवेश कर रही है।

आगे क्या?

सरकार और यूनियन के बीच बातचीत अभी जारी है और दोनों पक्ष समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं। यदि वार्ता सफल रहती है, तो कर्मचारियों की प्रमुख मांगों पर सहमति बन सकती है। हालांकि यदि समझौता नहीं हुआ, तो भविष्य में और व्यापक औद्योगिक कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

यह विवाद केवल वेतन या सेवा शर्तों तक सीमित नहीं है, बल्कि कार्यस्थल की सुरक्षा, पर्याप्त मानव संसाधन और किशोर न्याय प्रणाली की दीर्घकालिक स्थिरता से भी जुड़ा हुआ है। आने वाले दिनों में सरकार और यूनियन के बीच होने वाली वार्ताएं इस पूरे मुद्दे की दिशा तय करेंगी।

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