भारतीय मूल की डेमोक्रेट नेता प्रमिला जयपाल ने अमेरिकी प्रतिनिधि सभा का चुनाव छठी बार जीत लिया है। उन्होंने वॉशिंगटन के 7वें जिले में रिपब्लिकन उम्मीदवार नीरव शेठ को हराया। जानिए उनका राजनीतिक सफर।
वॉशिंगटन: अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में भारतीय मूल की नेता प्रमिला जयपाल ने एक बार फिर बड़ी जीत हासिल की है। डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार जयपाल ने वॉशिंगटन राज्य की 7वीं कांग्रेसनल सीट पर रिपब्लिकन उम्मीदवार नीरव शेठ को बड़े अंतर से हराया। 3 नवंबर 2026 को हुए चुनाव में मिली इस जीत के साथ वह लगातार छठी बार अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की सदस्य चुनी गई हैं। भारत में जन्मीं प्रमिला जयपाल अमेरिका में प्रवासियों के अधिकार और वीजा नीतियों से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रही हैं।
प्रमिला जयपाल को मिले करीब 88 प्रतिशत वोट
अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में प्रमिला जयपाल ने अपनी सीट पर मजबूत बढ़त के साथ जीत दर्ज की। शुरुआती चुनावी आंकड़ों के मुताबिक उन्हें लगभग 87.5 प्रतिशत वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी नीरव शेठ को करीब 12.1 प्रतिशत वोट हासिल हुए। एसोसिएटेड प्रेस की ओर से जारी आंकड़ों में जयपाल को 1,77,700 और शेठ को 24,654 वोट मिले थे। ये शुरुआती मतगणना के आंकड़े थे, इसलिए अंतिम आधिकारिक परिणाम में बदलाव संभव है।
खास बात यह रही कि इस सीट पर चुनाव लड़ने वाले दोनों प्रमुख उम्मीदवार भारतीय मूल के थे, लेकिन उनकी राजनीतिक पार्टियां अलग थीं। जयपाल डेमोक्रेटिक पार्टी से हैं, जबकि नीरव शेठ रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार थे।
कौन हैं प्रमिला जयपाल, जिनका भारत से है पुराना नाता?
अमेरिकी राजनीति में अपनी पहचान बनाने वाली प्रमिला जयपाल मूल रूप से भारत की रहने वाली हैं। उनका जन्म चेन्नई में हुआ था। बचपन के कुछ साल भारत में गुजारने के बाद वह अपने परिवार के साथ इंडोनेशिया और सिंगापुर में भी रहीं। जब वह 16 साल की थीं, तब आगे की पढ़ाई के लिए अकेले अमेरिका चली गईं। वहां जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी से पढ़ाई करने के बाद उन्होंने नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी से एमबीए की डिग्री ली।
प्रमिला ने शुरुआत में कुछ प्राइवेट कंपनियों में काम किया, लेकिन बाद में उनका रुझान समाजसेवा की तरफ हो गया। उन्होंने अमेरिका में रहने वाले उन लोगों के लिए काम करना शुरू किया, जो दूसरे देशों से वहां आकर बसे थे। ऐसे लोगों को नौकरी, रहने और कानूनी अधिकारों से जुड़ी कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इन्हीं मुद्दों पर काम करते हुए वह OneAmerica नाम के संगठन से जुड़ीं।
भारत से उनका रिश्ता सिर्फ जन्म तक सीमित नहीं है। वह आज भी अपनी भारतीय जड़ों का जिक्र करती हैं। साल 2023 में उन्होंने एक बयान में बताया था कि भारत उनकी जन्मभूमि है और उनके माता-पिता भी वहीं रहते हैं।
2016 में पहली बार बनी थीं सांसद, अब छठी बार मिली जीत
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प्रमिला जयपाल ने साल 2016 में अमेरिकी प्रतिनिधि सभा का चुनाव जीतकर इतिहास रचा था। वह इस सदन में पहुंचने वाली दक्षिण एशियाई मूल की पहली महिला थीं। पहली जीत के बाद भी उनका चुनावी सफर जारी रहा। उन्होंने 2018, 2020, 2022 और 2024 में लगातार अपनी सीट पर जीत दर्ज की। अब 2026 के चुनाव में भी जीत हासिल करने के बाद वह छठी बार सांसद चुनी गई हैं। उनका अगला कार्यकाल जनवरी 2027 से शुरू होगा।
अमेरिकी संसद में रहने के दौरान प्रमिला कई अहम जिम्मेदारियां निभा चुकी हैं। वह कांग्रेसनल प्रोग्रेसिव कॉकस की अध्यक्ष रह चुकी हैं। फिलहाल वह इसकी मानद अध्यक्ष हैं। इसके अलावा प्रतिनिधि सभा की न्यायपालिका समिति में भी उनकी अहम भूमिका है, जहां वह दूसरे देशों से अमेरिका आने वाले लोगों से जुड़े मामलों पर काम करती हैं।
प्रमिला लंबे समय से प्रवासियों के अधिकारों से जुड़े सवाल उठाती रही हैं। इसके साथ ही आम लोगों को सस्ता इलाज मिले, कम कमाई वाले परिवारों की परेशानियां दूर हों और सभी को बराबर मौके मिलें, इन मुद्दों पर भी वह संसद में अपनी बात रखती रही हैं।
ट्रंप की H-1B वीजा नीति पर क्यों उठाए सवाल?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वीजा और इमिग्रेशन नीतियों को लेकर प्रमिला जयपाल कई बार विरोध जता चुकी हैं। खासकर दूसरे देशों से कानूनी तरीके से अमेरिका आने वाले लोगों के लिए नियम सख्त करने के फैसलों से वह सहमत नहीं रही हैं।
जब ट्रंप प्रशासन ने H-1B वीजा पर एक लाख डॉलर की फीस लगाने का फैसला किया, तब प्रमिला ने इस पर सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि इतनी मोटी रकम तय करने से विदेश से नौकरी करने अमेरिका आने वाले लोगों की परेशानी बढ़ेगी। इससे कानूनी तरीके से अमेरिका में काम करने का रास्ता भी मुश्किल हो सकता है।
प्रमिला खुद 16 साल की उम्र में पढ़ाई के लिए अमेरिका पहुंची थीं। ऐसे में वह अपनी जिंदगी के शुरुआती अनुभवों का जिक्र भी करती रही हैं। उनका मानना है कि पढ़ाई और नौकरी के लिए विदेश से आने वाले लोगों को बेवजह मुश्किल नियमों का सामना नहीं करना चाहिए।
भारत के भी बड़ी संख्या में लोग H-1B वीजा के जरिए अमेरिका में नौकरी करते हैं। खासकर आईटी सेक्टर में काम करने वाले भारतीयों के लिए यह वीजा काफी अहम है। इसलिए अमेरिका में वीजा नियमों को लेकर होने वाली बहस और प्रमिला जयपाल के बयान भारतीय समुदाय का भी ध्यान खींचते हैं।








