राधिका मदान को आउटसाइटर होने का डर, बोलीं- एक गलती के बाद दूसरा मौका मिलना मुश्किल

Radhika Madan ने बॉलीवुड में आउटसाइडर होने की चुनौतियों पर बात की। अभिनेत्री ने कहा कि एक गलती के बाद दूसरा मौका मिलना मुश्किल हो सकता है, यही दबाव उन्हें बेहत

कुछ डर ऐसे होते हैं, जिन पर इंसान समय के साथ काबू पा लेता है, लेकिन कुछ डर लगातार बने रहते हैं। ‘पटाखा’ और ‘अंग्रेजी मीडियम’ जैसी फिल्मों में नजर आ चुकीं राधिका मदान के लिए भी ऐसा ही एक डर आज तक कायम है।

Radhika Madan: बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाने वाली अभिनेत्री राधिका मदान ने फिल्म इंडस्ट्री में आउटसाइडर होने के अनुभव को लेकर खुलकर बात की है। टीवी से अपने करियर की शुरुआत करने वाली राधिका ने फिल्मों में कई अलग-अलग तरह के किरदार निभाए हैं। हालांकि, उनका कहना है कि इंडस्ट्री में एक ऐसा डर आज भी उनके साथ बना हुआ है, जिसे वह आसानी से नजरअंदाज नहीं कर पातीं।

अभिनेत्री के मुताबिक, उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती अभिनय करना नहीं, बल्कि हर प्रोजेक्ट में खुद को साबित करना है। उन्हें लगता है कि एक आउटसाइडर होने के कारण उन्हें अपने हर प्रदर्शन में खुद को साबित करना पड़ता है, क्योंकि असफलता की स्थिति में उनके पीछे ऐसा मजबूत सपोर्ट सिस्टम नहीं है जो उन्हें लगातार मौके दिला सके।

आउटसाइडर होने का डर क्यों है?

राधिका मदान ने अपने करियर से जुड़े अनुभव साझा करते हुए बताया कि अगर उन्हें अच्छी स्क्रिप्ट मिलती है तो अभिनय उनके लिए मुश्किल काम नहीं है। असली दबाव इस बात का है कि वह किसी फिल्म में अपने प्रदर्शन से कोई बड़ी गलती न कर दें। उनके अनुसार, आउटसाइडर कलाकारों के मन में यह चिंता रह सकती है कि अगर किसी फिल्म में प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा तो अगला मौका मिलने में मुश्किल हो सकती है। राधिका ने इसी भावना को अपने सबसे बड़े डर के रूप में बताया।

उनकी बातों का सार यह है कि उन्हें हर फिल्म में अपनी क्षमता साबित करनी पड़ती है। उन्हें ऐसा कोई भरोसा नहीं लगता कि कुछ औसत फिल्मों के बाद भी कोई व्यक्ति उनके करियर को संभालने या उन्हें एक और अवसर दिलाने के लिए मजबूती से खड़ा रहेगा।

हर फिल्म में बेहतर करने का दबाव

राधिका के मुताबिक, यही असुरक्षा उन्हें हर बार बेहतर काम करने के लिए प्रेरित भी करती है। वह मानती हैं कि एक कलाकार के तौर पर लगातार मेहनत करना और अपनी परफॉर्मेंस को बेहतर बनाना जरूरी है। इस दबाव का एक सकारात्मक पहलू यह भी है कि वह अपने काम को लेकर ज्यादा सजग रहती हैं। वह चाहती हैं कि दर्शकों को उनके काम में लगातार कुछ नया देखने को मिले। हालांकि, अभिनेत्री ने यह भी स्वीकार किया कि इस डर को पूरी तरह खत्म कर पाना उनके लिए अभी आसान नहीं है।

टीवी से शुरू हुआ था राधिका का सफर

राधिका मदान ने फिल्मों में आने से पहले टेलीविजन की दुनिया में अपनी पहचान बनाई थी। साल 2014 में 'मेरी आशिकी तुम से ही' सीरियल से उन्होंने अभिनय की शुरुआत की। इस शो में उन्होंने इशानी वाघेला का प्रमुख किरदार निभाया था। टीवी पर काम करने के दौरान ही राधिका को दर्शकों के बीच पहचान मिली। इसके बाद उन्होंने छोटे पर्दे से आगे बढ़कर फिल्मों की दुनिया में कदम रखा।

'पटाखा' से बॉलीवुड डेब्यू

राधिका मदान ने साल 2018 में 'पटाखा' फिल्म से बॉलीवुड में डेब्यू किया। विशाल भारद्वाज के निर्देशन में बनी इस फिल्म में उन्होंने ग्रामीण पृष्ठभूमि की एक जुझारू लड़की का किरदार निभाया था। फिल्म में उनके अभिनय को काफी चर्चा मिली और इसके बाद उन्होंने अलग-अलग तरह की फिल्मों का हिस्सा बनना जारी रखा।

इसके बाद राधिका 'मर्द को दर्द नहीं होता', 'अंग्रेजी मीडियम', 'शिद्दत' और 'सरफिरा' जैसी फिल्मों में नजर आईं। इन फिल्मों में उनके किरदारों की शैली और कहानी का जॉनर अलग-अलग रहा, जिससे उन्होंने एक ही तरह की भूमिका तक सीमित रहने के बजाय अलग-अलग भूमिकाओं में काम करने की कोशिश की।

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