पंजाब से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के राजनीतिक रुख को लेकर लगातार चर्चाएं होती रही हैं। लंबे समय बाद उन्होंने अब सोशल मीडिया के जरिए अपनी बात रखी है। इस बार चड्ढा ने देश में UPI के 10 साल पूरे होने पर इसकी उपलब्धियों और सफलता को आंकड़ों के जरिए सामने रखा।
Raghav Chadha on UPI: राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने लंबे समय बाद सोशल मीडिया पर सक्रिय होते हुए भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम UPI (Unified Payments Interface) की उपलब्धियों पर बात की है। उन्होंने UPI के 10 साल पूरे होने के मौके पर इसके विस्तार और आम लोगों की जिंदगी में आए बदलावों को आंकड़ों के जरिए समझाया। उन्होंने कहा कि “स्कैनर दे दीजिए, UPI कर देता हूं” आज देश में रोजमर्रा की जिंदगी का बेहद सामान्य वाक्य बन चुका है।
राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए UPI के सफर का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एक दशक पहले शुरू हुई यह व्यवस्था केवल भुगतान का नया माध्यम नहीं थी, बल्कि इसने नागरिकों, कारोबार और पैसों के बीच संबंधों को बदलने की शुरुआत की।
‘स्कैनर दे दीजिए, UPI कर देता हूं’
राघव चड्ढा ने UPI की सफलता को उसके रोजमर्रा के इस्तेमाल से जोड़ते हुए कहा कि किसी दुकान, रेस्तरां या अन्य जगह पर भुगतान करते समय “स्कैनर दे दीजिए, UPI कर देता हूं” कहना अब आम हो गया है। उनके मुताबिक, किसी तकनीक की असली सफलता इस बात में नहीं है कि वह कितनी आधुनिक दिखाई देती है, बल्कि इस बात में है कि वह लोगों के दैनिक जीवन का कितना सहज हिस्सा बन पाती है। उन्होंने UPI को इसी बदलाव का उदाहरण बताया।
चार्टर्ड अकाउंटेंट के रूप में अपनी पृष्ठभूमि का जिक्र करते हुए चड्ढा ने कहा कि वह आंकड़ों पर भरोसा करते हैं। उन्होंने एक वीडियो के माध्यम से पिछले 10 वर्षों में UPI के विस्तार को भी सामने रखा।
10 साल में कितनी तेजी से बढ़ा UPI?
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राघव चड्ढा द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2016-17 में UPI के माध्यम से लगभग 1.8 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए थे। उस समय इन लेनदेन का कुल मूल्य करीब 0.07 लाख करोड़ रुपये था। इसके बाद डिजिटल पेमेंट नेटवर्क ने तेजी से विस्तार किया। वित्त वर्ष 2025-26 तक UPI ट्रांजैक्शन का कुल मूल्य बढ़कर लगभग 314 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। ट्रांजैक्शन की संख्या भी कई गुना बढ़कर करीब 24,161 करोड़ बताई गई।
जुलाई 2026 में ही UPI के जरिए करीब 2,365 करोड़ ट्रांजैक्शन होने का आंकड़ा सामने रखा गया। इस दौरान लेनदेन का कुल मूल्य करीब 29.88 लाख करोड़ रुपये रहा। यानी एक दशक के भीतर UPI भारत के डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम का प्रमुख हिस्सा बन गया है।
घर से कारोबार तक UPI का इस्तेमाल
चड्ढा ने UPI के प्रभाव को केवल ऑनलाइन खरीदारी या दुकानों तक सीमित नहीं बताया। उन्होंने कहा कि आज इसका इस्तेमाल छोटे दुकानदारों, कारोबारियों, छात्रों, परिवारों और बड़े व्यवसायों से लेकर सरकारी भुगतान तक में किया जा रहा है। UPI ने बैंक खाते से सीधे दूसरे व्यक्ति या कारोबारी को पैसे भेजने की प्रक्रिया को आसान बनाया है। स्मार्टफोन और इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल के साथ QR कोड आधारित भुगतान ने भी इस बदलाव को तेजी दी है।
राघव चड्ढा के अनुसार, जून 2026 तक करीब 55.49 करोड़ यूजर UPI के दायरे में आ चुके थे। उन्होंने यह भी दावा किया कि जुलाई 2026 तक 741 बैंक इस डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म से जुड़े थे। वॉल्यूम के आधार पर वित्त वर्ष 2025-26 में भारत के लगभग 86 फीसदी रिटेल पेमेंट UPI के माध्यम से किए गए। IMF FinTech से जुड़े आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने UPI को मात्रा के लिहाज से दुनिया का सबसे बड़ा रिटेल फास्ट पेमेंट सिस्टम बताया।
पीएम मोदी के Digital India विजन की तारीफ
UPI की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए राघव चड्ढा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के Digital India विजन की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भारत ने डिजिटल तकनीक को केवल अपनाया नहीं, बल्कि इसे बड़े पैमाने पर आम नागरिकों तक पहुंचाने का मॉडल भी तैयार किया है। चड्ढा के मुताबिक, UPI की उपलब्धि केवल एक पेमेंट ऐप या तकनीक की सफलता नहीं है। यह पब्लिक डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, संस्थागत भरोसे और डिजिटल समावेशन के विस्तार का उदाहरण है।










