Raghav Chadha ने Aam Aadmi Party छोड़ने के बाद आरोप लगाया कि पार्टी में टॉक्सिक माहौल और भ्रष्टाचार बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि अब पार्टी अपने मूल उद्देश्यों से भटक चुकी है और कई सांसदों ने भी इसे छोड़ा है।
चंडीगढ़: राजनीतिक हलकों में उस समय बड़ा विवाद खड़ा हो गया जब राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी (आम आदमी पार्टी) छोड़ने के बाद पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पार्टी अब अपने मूल सिद्धांतों से भटक चुकी है और “चंद करप्ट और कॉम्प्रोमाइज्ड लोगों के हाथों में” चली गई है।
पहला बयान जारी कर लगाए गंभीर आरोप
बीजेपी जॉइन करने के बाद जारी किए गए अपने पहले वीडियो में राघव चड्ढा ने कहा कि पार्टी में अब काम करने की आजादी नहीं रह गई थी। उनके अनुसार, बोलने और फैसले लेने पर रोक लगाई जा रही थी।
उन्होंने यह भी दावा किया कि पार्टी का कार्य वातावरण (वर्क एनवायरमेंट) “टॉक्सिक” हो चुका था और कई नेता व्यक्तिगत लाभ के लिए काम कर रहे थे।
मैं गलत हो सकता हूं, लेकिन सवाल उठते हैं
राघव चड्ढा ने अपने बयान में यह भी कहा कि अगर पार्टी छोड़ने वाले सभी नेता गलत हैं, तो क्या अब तक पार्टी छोड़ चुके सभी लोग भी गलत थे?
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि वे खुद पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक रहे हैं और जिस उद्देश्य के साथ पार्टी बनाई गई थी, वह अब बदल चुका है।
मेरे पास 3 विकल्प थे”
राघव चड्ढा ने बताया कि पार्टी छोड़ने से पहले उनके सामने तीन विकल्प थे:
- पार्टी में बने रहना
- चुप रहकर स्थिति स्वीकार करना
- या पार्टी छोड़ देना
उन्होंने कहा कि उन्होंने अंतिम विकल्प चुना क्योंकि उनके अनुसार यही सही निर्णय था।

राज्यसभा में बड़ा राजनीतिक बदलाव
राज्यसभा में हाल ही में हुए राजनीतिक बदलाव के बाद 7 सांसदों के बीजेपी में शामिल होने की खबर ने राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं।
इन सांसदों में शामिल नाम बताए जा रहे हैं:
- राघव चड्ढा
- अशोक मित्तल
- विक्रमजीत साहनी
- हरभजन सिंह
- डॉ. संदीप पाठक
- स्वाति मालीवाल
- राजिंदर गुप्ता
इन बदलावों के बाद राज्यसभा में भारतीय जनता पार्टी (भारतीय जनता पार्टी) के सांसदों की संख्या बढ़कर 113 बताई जा रही है।
सुरक्षा विवाद भी चर्चा में
इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी विवाद सामने आया है।
- अशोक मित्तल को केंद्र सरकार ने Y सिक्योरिटी दी
- हरभजन सिंह की सुरक्षा में बदलाव किया गया
- राघव चड्ढा को भी पहले Z+ सुरक्षा दी जा चुकी थी
इन फैसलों के बाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और तेज हो गए हैं।
पंजाब में सियासी तनाव बढ़ा
पंजाब में भी इस घटनाक्रम का असर देखने को मिला है। AAP नेताओं के घरों के बाहर प्रदर्शन हुए और कई जगहों पर नाराजगी दिखाई दी।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राष्ट्रपति से मुलाकात की मांग की है और इस पूरे मामले पर राजनीतिक प्रतिक्रिया दी है।
राजनीतिक विश्लेषण: पार्टी में टूट या रणनीति?
विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े स्तर पर सांसदों का एक साथ बदलाव भारतीय राजनीति में असामान्य घटना है।
कुछ इसे:
- पार्टी के अंदर असंतोष
- नेतृत्व विवाद
या रणनीतिक राजनीतिक पुनर्गठन के रूप में देख रहे हैं।
राज्यसभा और संसदीय प्रक्रिया
राज्यसभा सभापति को इस मामले में पत्र लिखकर सदस्यता पर फैसला लेने की मांग भी उठी है। संसद में यह मुद्दा अब औपचारिक चर्चा का हिस्सा बनता जा रहा है।








