राहुल गांधी की सदस्यता पर फिर संकट, BJP सांसद ने लोकसभा में दिया नोटिस

राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता पर सियासी घमासान तेज हो गया है। BJP सांसद निशिकांत दुबे ने निलंबन और सदस्यता समाप्त करने का नोटिस दिया है।

राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता को लेकर विवाद गहरा गया है। BJP सांसद निशिकांत दुबे ने असंसदीय भाषा का आरोप लगाते हुए निलंबन का नोटिस दिया है। इस कदम से संसद और राजनीति में तनाव बढ़ गया है।

New Delhi: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की संसदीय सदस्यता एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है। भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी को लोकसभा से निलंबित करने और उनकी सदस्यता समाप्त करने से जुड़ा नोटिस पेश किया है। इस कदम के बाद संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। विपक्ष इसे लोकतांत्रिक आवाज दबाने की कोशिश बता रहा है, जबकि सत्ता पक्ष का कहना है कि संसद की गरिमा बनाए रखना जरूरी है।

यह नोटिस ऐसे समय में दिया गया है जब राहुल गांधी ने हाल ही में इंडिया-US ट्रेड डील और यूनियन बजट पर सवाल उठाए थे। इन्हीं बयानों को आधार बनाकर बीजेपी सांसद ने राहुल गांधी पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

निशिकांत दुबे का नोटिस क्या कहता है

बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा सचिवालय में जो नोटिस दाखिल किया है, उसमें राहुल गांधी पर असंसदीय भाषा का प्रयोग करने का आरोप लगाया गया है। नोटिस में कहा गया है कि राहुल गांधी ने बिना ठोस तथ्यों के सरकार पर आरोप लगाए और संसद की मर्यादा का उल्लंघन किया।

निशिकांत दुबे का कहना है कि विपक्ष के नेता जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को अपनी भाषा और शब्दों को लेकर विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। उनके अनुसार, राहुल गांधी का भाषण न केवल नियमों के खिलाफ था, बल्कि इससे संसद की गरिमा को भी नुकसान पहुंचा।

इंडिया-US ट्रेड डील पर उठे सवाल

इस विवाद की जड़ राहुल गांधी का वह भाषण माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने इंडिया-US ट्रेड डील को लेकर सवाल खड़े किए थे। राहुल गांधी ने कहा था कि इस तरह की अंतरराष्ट्रीय व्यापार संधियों से देश के छोटे व्यापारियों, किसानों और मध्यम वर्ग पर असर पड़ सकता है।

उनका आरोप था कि सरकार बड़े कॉरपोरेट हितों को ध्यान में रखकर फैसले ले रही है, जबकि आम जनता की चिंता को नजरअंदाज किया जा रहा है। सत्ता पक्ष ने इन बयानों को भ्रामक बताया और कहा कि राहुल गांधी तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश कर रहे हैं।

यूनियन बजट पर टिप्पणी बनी वजह

राहुल गांधी ने यूनियन बजट पर भी सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि बजट में रोजगार, महंगाई और सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दों को प्राथमिकता नहीं दी गई। उनके अनुसार, बजट आम जनता की जरूरतों को पूरा करने में असफल रहा है।

बीजेपी सांसदों का कहना है कि राहुल गांधी की ये टिप्पणियां राजनीतिक आलोचना की सीमा से बाहर जाती हैं। इसी आधार पर उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग उठी है।

ग्रिप और चोक वाले बयान पर विवाद

लोकसभा में दिए गए अपने भाषण के दौरान राहुल गांधी ने राजनीति की तुलना मार्शल आर्ट से की थी। उन्होंने कहा था कि जैसे खेल में ग्रिप और चोक होती है, वैसे ही राजनीति में भी कुछ ताकतें दबाव बनाती हैं।

इस बयान पर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कड़ी आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल संसद जैसे मंच पर स्वीकार्य नहीं है। इसके बाद ही राहुल गांधी के भाषण को लेकर नोटिस देने की प्रक्रिया तेज हुई।

विशेषाधिकार हनन की आशंका

निशिकांत दुबे द्वारा दिए गए नोटिस को लोकसभा के नियमों के तहत Rule 380 के अंतर्गत दाखिल किया गया है। इसमें कहा गया है कि राहुल गांधी ने असंसदीय शब्दों का प्रयोग किया और सदन की कार्यवाही की मर्यादा को ठेस पहुंचाई।

अगर यह मामला विशेषाधिकार हनन के रूप में आगे बढ़ता है, तो राहुल गांधी के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। संसदीय नियमों के अनुसार, विशेषाधिकार हनन साबित होने पर निलंबन या अन्य कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।

रिकॉर्ड से शब्द हटाने की मांग

नोटिस में यह भी मांग की गई है कि राहुल गांधी के भाषण के कुछ हिस्सों को सदन की कार्यवाही के रिकॉर्ड से हटाया जाए। बीजेपी सांसदों का कहना है कि भाषण में लगाए गए आरोप तथ्यात्मक नहीं हैं और इससे संसद की गरिमा प्रभावित होती है। लोकसभा सचिवालय अब इस नोटिस की जांच करेगा और स्पीकर तय करेंगे कि इस पर आगे क्या कार्रवाई होनी है।

राहुल गांधी की प्रतिक्रिया

विशेषाधिकार हनन के नोटिस को लेकर जब पत्रकारों ने राहुल गांधी से सवाल किया, तो उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में जवाब दिया। राहुल गांधी ने कहा, “आप लोगों को वे कीवर्ड्स देते हैं क्या?” उनका यह बयान भी चर्चा में आ गया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सरकार सवालों से बचने के लिए विपक्ष के नेता को निशाना बना रही है।

2023 का पुराना मामला फिर चर्चा में

राहुल गांधी की सदस्यता पहले भी जा चुकी है। साल 2023 में 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान कर्नाटक के कोलार में दिए गए एक भाषण के मामले में सूरत की अदालत ने उन्हें दो साल की सजा सुनाई थी। इस सजा के बाद उनकी लोकसभा सदस्यता रद कर दी गई थी।

हालांकि बाद में उच्च अदालत से राहत मिलने के बाद राहुल गांधी की सदस्यता बहाल हो गई थी। अब एक बार फिर उनकी सदस्यता पर संकट की बात सामने आने से राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है।

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