राहुल गांधी ने UPI पर प्रस्तावित MDR वापस लेने की मांग की, PM मोदी से की अपील

राहुल गांधी ने UPI पर प्रस्तावित MDR वापस लेने की मांग करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है। केंद्र के नए नियमों के तहत 15 अक्टूबर से ₹2,000 से अधिक

राहुल गांधी ने UPI पर प्रस्तावित MDR वापस लेने की मांग करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है। केंद्र के नए नियमों के तहत 15 अक्टूबर से ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा P2M भुगतान पर 0.4% MDR लगेगा, जबकि ग्राहक शुल्क नहीं देंगे।

नई दिल्ली: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने UPI के प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को वापस लेने की मांग की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की। हालांकि, केंद्र सरकार के अनुसार यह टैक्स नहीं बल्कि कुछ चुनिंदा व्यापारी लेनदेन पर लागू MDR है और ग्राहकों से यह शुल्क नहीं लिया जाएगा।

राहुल गांधी ने वीडियो जारी कर PM मोदी से की अपील

राहुल गांधी ने अपने वीडियो संदेश में UPI पर प्रस्तावित शुल्क को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के फैसलों का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी अपने फैसले मजबूती से लिए थे।

राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से UPI से जुड़े प्रस्तावित शुल्क को वापस लेने की अपील की। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अमेरिका के सामने झुक रही है और UPI पर शुल्क लगाकर भारतीयों पर बोझ डाला जा रहा है।

अपने सोशल मीडिया पोस्ट में राहुल गांधी ने लिखा कि प्रधानमंत्री को UPI टैक्स वापस लेना चाहिए। उनके बयान में इस प्रस्तावित शुल्क को 'टैक्स' के तौर पर पेश किया गया, जबकि सरकार ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया है कि MDR सरकार द्वारा वसूला जाने वाला टैक्स नहीं है।

15 अक्टूबर से लागू होगा नया MDR फ्रेमवर्क

केंद्र सरकार और NPCI के नए फ्रेमवर्क के मुताबिक, 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के कुछ P2M यानी व्यक्ति से व्यापारी को किए जाने वाले UPI भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। इस शुल्क की अधिकतम सीमा ₹300 प्रति लेनदेन रखी गई है।

यह शुल्क UPI से पैसे भेजने वाले ग्राहक से सीधे नहीं लिया जाएगा। सरकार के मुताबिक MDR भुगतान प्रणाली के इकोसिस्टम के भीतर बैंकों, भुगतान सेवा प्रदाताओं और UPI ऐप प्रदाताओं जैसे भागीदारों के बीच बांटा जाएगा।

इसका मतलब है कि आम UPI उपयोगकर्ता के लिए ₹2,000 तक के व्यापारी भुगतान पर कोई MDR नहीं लगेगा। वहीं, व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P लेनदेन किसी भी राशि का हो, वह भी इस MDR के दायरे से बाहर रहेगा।

95 प्रतिशत से ज्यादा छोटे P2M लेनदेन ₹2,000 से कम

सरकार के अनुसार, व्यक्तियों से व्यापारियों को होने वाले P2M UPI लेनदेन में ₹2,000 से कम राशि वाले भुगतान 95 प्रतिशत से अधिक हैं। नए नियमों के तहत इन लेनदेन पर MDR नहीं लगेगा।

इसके अलावा छोटे व्यापारियों के लिए भी अलग प्रावधान रखा गया है। सरकार के मुताबिक, P2PM श्रेणी में आने वाले छोटे व्यापारी, जिनमें स्ट्रीट वेंडर और आसपास की छोटी दुकानें शामिल हैं, और जिन्हें UPI QR के जरिए प्रति माह ₹1 लाख तक प्राप्त होता है, सभी लेनदेन पर शून्य MDR का लाभ जारी रखेंगे।

इस व्यवस्था का उद्देश्य छोटे कारोबारियों पर भुगतान लागत का अतिरिक्त दबाव नहीं डालना बताया गया है।

रेलवे, टेलीकॉम और ईंधन जैसे क्षेत्रों के लिए अलग शुल्क

नए फ्रेमवर्क में कुछ आवश्यक और कम मार्जिन वाले क्षेत्रों के लिए अलग व्यवस्था की गई है। रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि कच्चे माल जैसे क्षेत्रों में ₹2,000 से अधिक के लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR के बजाय ₹5 का फ्लैट शुल्क लागू होगा।

वहीं, पूंजी बाजार से जुड़े कुछ भुगतान, जैसे म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज, स्टॉकब्रोकर और डीलर से संबंधित लेनदेन के लिए 0.02 प्रतिशत MDR और अधिकतम ₹300 की सीमा निर्धारित की गई है।

सरकार ने कहा- यह UPI टैक्स नहीं है

राहुल गांधी के आरोपों के बीच केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि MDR को सरकारी टैक्स के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। वित्त मंत्रालय के अनुसार, यह व्यापारी भुगतान इकोसिस्टम के भीतर लिया जाने वाला शुल्क है, जिसे संबंधित भुगतान प्रणाली के भागीदारों के बीच वितरित किया जाता है।

सरकार ने यह भी कहा है कि UPI से भुगतान करने वाले ग्राहकों पर कोई लेनदेन शुल्क नहीं लगाया जाएगा। P2P भुगतान भी किसी राशि की सीमा के बिना मुफ्त रहेंगे।

अगस्त 2026 में वित्त मंत्रालय ने भी कहा था कि UPI उपयोगकर्ताओं से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा और MDR लागू होने की स्थिति में यह केवल सीमित श्रेणी के व्यापारी लेनदेन पर होगा।

बड़े लेनदेन पर शुल्क की सीमा ₹300

नए नियमों के तहत ₹2,000 से अधिक के पात्र P2M लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लगेगा, लेकिन प्रति लेनदेन इसकी अधिकतम सीमा ₹300 होगी।

उदाहरण के तौर पर, यदि कोई पात्र ग्राहक किसी व्यापारी को ₹3,000 का भुगतान करता है तो 0.4 प्रतिशत के हिसाब से MDR ₹12 होगा। इसी तरह ₹50,000 के भुगतान पर यह ₹200 होगा। ₹75,000 या उससे अधिक के लेनदेन पर अधिकतम MDR ₹300 तक सीमित रहेगा।

हालांकि, यह शुल्क ग्राहक से वसूलने के लिए नहीं है। सरकार के अनुसार MDR व्यापारी-पक्ष के भुगतान इकोसिस्टम में लागू होता है।

UPI के इस्तेमाल का दायरा लगातार बढ़ रहा

UPI भारत के डिजिटल भुगतान ढांचे का प्रमुख हिस्सा बन चुका है। NPCI के आंकड़ों के अनुसार अगस्त 2026 में UPI पर करीब 24,508.96 मिलियन यानी 2,450.896 करोड़ लेनदेन हुए, जिनका कुल मूल्य लगभग ₹29,82,355.95 करोड़ रहा। इसी महीने UPI से जुड़े बैंकों की संख्या 752 थी।

सरकार ने अगस्त 2026 में कहा था कि UPI को लंबे समय तक टिकाऊ बनाने, तकनीकी ढांचे को मजबूत करने और डिजिटल भुगतान के विस्तार के लिए भुगतान प्रणाली के आर्थिक मॉडल को विकसित करना जरूरी है।

राहुल गांधी की मांग और सरकार का रुख

राहुल गांधी ने प्रस्तावित MDR व्यवस्था का विरोध करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इसे वापस लेने की मांग की है। दूसरी ओर, सरकार ने नए फ्रेमवर्क को सीमित व्यापारी लेनदेन तक रखा है और स्पष्ट किया है कि ग्राहकों से सीधे कोई UPI शुल्क नहीं लिया जाएगा।

ऐसे में UPI MDR को लेकर राजनीतिक बहस मुख्य रूप से इस बात पर केंद्रित है कि व्यापारी लेनदेन पर प्रस्तावित शुल्क डिजिटल भुगतान व्यवस्था और कारोबारियों को किस तरह प्रभावित करेगा। नए नियम 15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होने हैं।

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