राहुल गांधी और किरेन रिजिजू की अहम मुलाकात, परिसीमन और FCRA विधेयक पर हुई चर्चा

Rahul Gandhi Kiren Rijiju Meeting: कांग्रेस नेता राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के बीच हुई अहम बैठक में परिसीमन (Delimitation) और FCRA विधेयक

संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju ने बुधवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi से मुलाकात की। सूत्रों के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच संसद में जारी गतिरोध को समाप्त करने और सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने को लेकर चर्चा हुई।

नई दिल्ली: भारतीय संसद के मौजूदा सत्र के बीच सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच संवाद की एक महत्वपूर्ण पहल देखने को मिली, जब संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाकात की। यह बैठक संसद में जारी विभिन्न विधायी मुद्दों और संभावित राजनीतिक सहमति की संभावनाओं के बीच हुई, जिसमें प्रस्तावित परिसीमन (Delimitation) विधेयक और विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) से जुड़े संशोधनों पर चर्चा प्रमुख रही।

सूत्रों के अनुसार, यह बैठक संसद भवन स्थित राहुल गांधी के कार्यालय में हुई और लगभग 50 मिनट तक चली। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुलाकात सरकार और विपक्ष के बीच संवाद बढ़ाने तथा आगामी संवैधानिक और विधायी प्रस्तावों पर समर्थन जुटाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकती है।

बैठक में शामिल हुए कई वरिष्ठ नेता

सूत्रों के मुताबिक, बैठक में कांग्रेस महासचिव और सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा भी मौजूद थीं। बाद में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद गौरव गोगोई तथा केसी वेणुगोपाल भी चर्चा में शामिल हुए। बैठक का उद्देश्य विभिन्न राजनीतिक मुद्दों पर विपक्ष की राय जानना और संभावित सहमति के बिंदुओं को तलाशना बताया जा रहा है।

यह पिछले 10 दिनों के भीतर राहुल गांधी और किरेन रिजिजू के बीच दूसरी मुलाकात थी, जिससे संकेत मिलता है कि सरकार और विपक्ष के बीच संवाद का सिलसिला जारी है।

परिसीमन विधेयक पर केंद्रित रही चर्चा

बैठक का सबसे महत्वपूर्ण विषय प्रस्तावित परिसीमन विधेयक बताया जा रहा है। परिसीमन प्रक्रिया के तहत जनसंख्या और अन्य मानकों के आधार पर संसदीय और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण किया जाता है। सरकार इस विषय पर व्यापक राजनीतिक सहमति बनाना चाहती है, क्योंकि इसका सीधा प्रभाव भविष्य की चुनावी संरचना और प्रतिनिधित्व पर पड़ सकता है। विभिन्न राजनीतिक दलों ने इस मुद्दे पर अलग-अलग दृष्टिकोण अपनाए हैं, जिसके कारण यह विषय राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण बहस का केंद्र बना हुआ है।

FCRA विधेयक पर भी हुई चर्चा

बैठक में विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) से जुड़े प्रस्तावित संशोधनों पर भी विचार-विमर्श हुआ। यह कानून भारत में विदेशी फंडिंग प्राप्त करने वाले संगठनों और संस्थाओं को नियंत्रित करता है। सूत्रों का कहना है कि सरकार इस विषय पर विपक्ष की चिंताओं और सुझावों को समझना चाहती है। वहीं विपक्ष ने भी इस विधेयक के संभावित प्रभावों पर अपने विचार साझा किए।

विशेष संसद सत्र की अटकलें तेज

राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि सरकार मानसून सत्र समाप्त होने के बाद संसद का विशेष सत्र बुला सकती है। माना जा रहा है कि इस विशेष सत्र में परिसीमन विधेयक और महिला आरक्षण से संबंधित संवैधानिक संशोधन प्रस्तावों पर चर्चा हो सकती है। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि सरकार विभिन्न दलों का समर्थन सुनिश्चित करने के लिए लगातार बातचीत कर रही है।

यदि सरकार किसी संवैधानिक संशोधन विधेयक को आगे बढ़ाती है, तो उसे संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत की आवश्यकता होगी। भारतीय संविधान के अनुसार, ऐसे विधेयकों को पारित कराने के लिए उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई समर्थन के साथ-साथ सदन की कुल सदस्य संख्या के बहुमत की आवश्यकता होती है।

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