भारतीय रेलवे ने अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) कर्मचारियों के प्रमोशन से जुड़े नियमों को लेकर अहम स्पष्टीकरण जारी किया है। रेलवे बोर्ड ने 31 अगस्त 2026 को जारी आदेश में गैर-सुरक्षा श्रेणी (Non-Safety Categories) के पदों पर SC/ST कर्मचारियों को आरक्षित रिक्तियों के खिलाफ प्रमोशन देने के लिए क्वालिफाइंग मार्क्स में छूट और 'Best Amongst the Failed' योजना के इस्तेमाल को स्पष्ट किया है। इसका उद्देश्य प्रमोशन कोटे में लंबे समय से खाली पड़ी आरक्षित सीटों को भरना है।
रेलवे बोर्ड के आदेश के अनुसार, ग्रुप-C की गैर-सुरक्षा श्रेणी में जहां प्रमोशन चयन प्रक्रिया के जरिए होता है और पैनल वरिष्ठता के आधार पर तैयार किया जाता है, वहां SC/ST कर्मचारियों को सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए निर्धारित क्वालिफाइंग मार्क्स में 10 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। यह छूट प्रोफेशनल एबिलिटी और कुल प्राप्त अंकों के मानक पर लागू होगी।
नए स्पष्टीकरण का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा उन परिस्थितियों से जुड़ा है, जब उपलब्ध छूट और अन्य रियायतें देने के बावजूद आरक्षित प्रमोशन पदों को भरने के लिए पर्याप्त संख्या में SC/ST कर्मचारी चयन पैनल में उपलब्ध नहीं हो पाते हैं। ऐसी स्थिति में रेलवे 'Best Amongst the Failed' योजना का इस्तेमाल कर सकेगा। इसके तहत निर्धारित न्यूनतम मानक हासिल करने वाले असफल SC/ST कर्मचारियों में से बेहतर प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों को आरक्षित रिक्तियों की सीमा तक पैनल में शामिल किया जा सकता है।
इस योजना के लिए भी न्यूनतम योग्यता तय है। संबंधित SC/ST कर्मचारी को लिखित परीक्षा, वाइवा, रिकॉर्ड ऑफ सर्विस जैसे प्रत्येक अलग-अलग मूल्यांकन वाले हिस्से में कम से कम 20 प्रतिशत अंक हासिल करने होंगे। इसके साथ ही कुल अंकों में भी न्यूनतम 20 प्रतिशत अंक प्राप्त करना जरूरी होगा। पात्र कर्मचारियों में से कुल प्राप्त अंकों के आधार पर बेहतर प्रदर्शन करने वालों को आरक्षित रिक्तियों की संख्या के अनुरूप पैनल में जगह दी जाएगी।
हालांकि, 'Best Amongst the Failed' के तहत मिलने वाला प्रमोशन तत्काल नियमित प्रमोशन नहीं होगा। रेलवे बोर्ड के दिशा-निर्देशों के मुताबिक इसे एडहॉक आधार पर दिया जाएगा। इसके बाद कर्मचारी के प्रदर्शन की छह महीने की अवधि के बाद समीक्षा की जाएगी। यदि उसका प्रदर्शन निर्धारित स्तर के अनुरूप पाया जाता है तो सक्षम प्राधिकारी द्वारा प्रमोशन को नियमित किया जा सकता है।
रेलवे बोर्ड ने यह स्पष्टीकरण इसलिए जारी किया है क्योंकि SC/ST कर्मचारियों के लिए क्वालिफाइंग मानकों में छूट और 'Best Amongst the Failed' योजना को लागू करने को लेकर रेलवे के अलग-अलग जोन और प्रोडक्शन यूनिट में भ्रम की स्थिति बनी हुई थी। बोर्ड ने पुराने आदेशों और समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों की समीक्षा के बाद इनके लागू होने की स्थिति को स्पष्ट किया है।
यह बदलाव खास तौर पर उन गैर-सुरक्षा श्रेणी के प्रमोशन पदों के लिए महत्वपूर्ण है, जहां SC/ST के लिए आरक्षित रिक्तियां उपलब्ध हैं, लेकिन पर्याप्त संख्या में पात्र कर्मचारी नहीं मिल पाने के कारण पद खाली रह जाते हैं। रेलवे में आरक्षित प्रमोशन रिक्तियों को भरने के लिए पहले भी विशेष अभियान और अन्य व्यवस्थाएं लागू की जाती रही हैं। रेलवे बोर्ड के पुराने नियमों में SC/ST उम्मीदवार उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में बैकलॉग आरक्षित पदों को भरने के लिए विशेष प्रमोशन ड्राइव का प्रावधान भी किया गया था।
रेलवे के पुराने प्रावधानों के अनुसार, अगर प्रमोशन कोटे में आरक्षित पद SC/ST उम्मीदवारों की अनुपलब्धता के कारण नहीं भरे जा पाते थे, तो कुछ परिस्थितियों में पद को अस्थायी रूप से निचले ग्रेड में डाउनग्रेड करके भर्ती श्रेणी के जरिए SC/ST उम्मीदवारों की भर्ती का रास्ता अपनाया जा सकता था, ताकि भविष्य में प्रमोशन के लिए पर्याप्त उम्मीदवार उपलब्ध हो सकें।
अब 31 अगस्त 2026 के नए स्पष्टीकरण से क्वालिफाइंग मार्क्स में छूट और 'Best Amongst the Failed' व्यवस्था के इस्तेमाल को लेकर स्थिति ज्यादा स्पष्ट हो गई है। यानी रेलवे में SC/ST कर्मचारियों के लिए आरक्षित प्रमोशन सीटें केवल इसलिए लंबे समय तक खाली न रहें कि सामान्य प्रमोशन मानक हासिल करने वाले पर्याप्त उम्मीदवार उपलब्ध नहीं हैं। निर्धारित रियायतों के बाद भी पर्याप्त कर्मचारी नहीं मिलने पर नियमों में दिए गए वैकल्पिक प्रावधान का इस्तेमाल किया जा सकता है।
इस बदलाव का सीधा असर रेलवे के उन कर्मचारियों पर पड़ सकता है जो SC/ST श्रेणी से आते हैं और गैर-सुरक्षा श्रेणी के प्रमोशन पदों के लिए चयन प्रक्रिया में शामिल होते हैं। हालांकि यह समझना जरूरी है कि इसका मतलब यह नहीं है कि हर SC/ST कर्मचारी को बिना निर्धारित योग्यता के प्रमोशन मिल जाएगा। रेलवे बोर्ड ने न्यूनतम अंक, चयन प्रक्रिया और 'Best Amongst the Failed' के लिए अलग शर्तें निर्धारित की हैं।
रेलवे बोर्ड का यह आदेश सभी जोनल रेलवे, प्रोडक्शन यूनिट और RDSO समेत संबंधित प्रशासनिक इकाइयों को भेजा गया है। इसका मकसद पुराने निर्देशों को एक जगह स्पष्ट करना और प्रमोशन प्रक्रिया में अनावश्यक भ्रम को खत्म करना है।
कुल मिलाकर नई व्यवस्था में दो महत्वपूर्ण बातें सामने आती हैं। पहली, गैर-सुरक्षा श्रेणी के प्रमोशन में SC/ST कर्मचारियों के लिए सामान्य वर्ग के निर्धारित क्वालिफाइंग मार्क्स में 10 प्रतिशत की छूट जारी रहेगी। दूसरी, यदि इन रियायतों के बावजूद आरक्षित पदों के लिए पर्याप्त SC/ST कर्मचारी पैनल में नहीं आ पाते हैं, तो निर्धारित शर्तों के साथ 'Best Amongst the Failed' योजना के तहत योग्य कर्मचारियों को एडहॉक प्रमोशन दिया जा सकता है। छह महीने के प्रदर्शन की समीक्षा के बाद इसे नियमित किए जाने का रास्ता भी उपलब्ध रहेगा।
रेलवे बोर्ड का यह कदम प्रमोशन कोटे में SC/ST कर्मचारियों के लिए आरक्षित रिक्तियों को भरने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में है। हालांकि वास्तविक लाभ संबंधित कर्मचारी की कैटेगरी, पद, चयन प्रक्रिया, उपलब्ध आरक्षित रिक्तियों और निर्धारित योग्यता पर निर्भर करेगा। इसलिए कर्मचारियों को अपने संबंधित रेलवे जोन या विभाग द्वारा जारी पद-विशेष आदेश और चयन अधिसूचना को भी देखना होगा।










