राजस्थान के 309 नगरीय निकायों में नामांकन जांच के दौरान कई राजनीतिक विवाद सामने आए। जयपुर में कांग्रेस प्रत्याशी का पर्चा रद्द हुआ, जबकि सीकर में भाजपा के घोषित उम्मीदवारों ने नामांकन नहीं भरा। भीलवाड़ा में कांग्रेस सिंबल विवाद ने तूल पकड़ा।
जयपुर: राजस्थान के 309 नगरीय निकायों में चुनावी प्रक्रिया के तहत मंगलवार को रिटर्निंग अधिकारियों ने नामांकन पत्रों की जांच पूरी की। स्क्रूटनी के दौरान कई वार्डों में प्रत्याशियों के नामांकन खारिज होने, पार्टी सिंबल समय पर जमा नहीं होने और अधिकृत प्रत्याशियों के नामांकन दाखिल नहीं करने के मामले सामने आए। इसके साथ ही टिकट वितरण को लेकर दोनों प्रमुख दलों में असंतोष और बगावत की स्थिति भी दिखाई दी। जयपुर, भीलवाड़ा, सीकर, अजमेर, झालावाड़, पाली, चित्तौड़गढ़, अलवर और अन्य शहरों से सामने आए घटनाक्रमों ने निकाय चुनाव की राजनीतिक तस्वीर को और दिलचस्प बना दिया है।
भीलवाड़ा में 17 कांग्रेस सिंबल का विवाद
भीलवाड़ा नगर निगम चुनाव में कांग्रेस के 17 पार्षद प्रत्याशियों के पार्टी सिंबल समय पर जमा नहीं होने का मामला राजनीतिक विवाद में बदल गया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य मनोज पालीवाल ने इस मामले में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और भीलवाड़ा देहात कांग्रेस नेता महेश सोनी पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
पालीवाल के मुताबिक कांग्रेस ने नगर निगम के 70 वार्डों में प्रत्याशियों के चयन की प्रक्रिया पूरी की थी। उनके अनुसार नामांकन के अंतिम दिन 31 अगस्त को दोपहर 3 बजे तक पार्टी के अधिकृत सिंबल निर्वाचन अधिकारी के पास पहुंचने जरूरी थे, लेकिन निर्धारित समय तक केवल 53 सिंबल ही जमा हो सके। 17 सिंबल समय पर नहीं पहुंचने के कारण संबंधित प्रत्याशियों के नामांकन पार्टी प्रत्याशी के रूप में मान्य नहीं हो सके।
पालीवाल ने इसे संगठनात्मक स्तर की गंभीर लापरवाही बताते हुए कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को पत्र भेजकर मामले की जांच के लिए कमेटी गठित करने और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित नेताओं का पक्ष अलग हो सकता है और अंतिम स्थिति आधिकारिक जांच या निर्वाचन प्रक्रिया के निर्णय से स्पष्ट होगी।
जयपुर में कांग्रेस प्रत्याशी का नामांकन खारिज
जयपुर नगर निगम के वार्ड नंबर 111 से कांग्रेस प्रत्याशी ज्वाला प्रसाद का नामांकन रिटर्निंग अधिकारी ने खारिज कर दिया। स्क्रूटनी के दौरान उनके खिलाफ लंबित आपराधिक मामले से जुड़ी जानकारी सामने आने के बाद नामांकन पर निर्णय लिया गया।
बताया गया कि संबंधित मामले में पांच वर्ष से अधिक की सजा का प्रावधान है और अदालत इस प्रकरण में संज्ञान ले चुकी है। रिकॉर्ड के अनुसार 29 अगस्त 2024 को मामले में आरोप भी तय किए गए थे। इसी आधार पर निर्वाचन अधिकारी ने नामांकन पत्र को स्वीकार नहीं किया।
इस घटनाक्रम से कांग्रेस को वार्ड 111 में चुनावी नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि नामांकन खारिज होने के बाद आगे की कानूनी या चुनावी प्रक्रिया संबंधित नियमों के अनुसार तय होगी।
जयपुर में भाजपा का अधिकृत प्रत्याशी मैदान में नहीं
जयपुर नगर निगम के वार्ड नंबर 146 में भाजपा की ओर से अफसाना को प्रत्याशी घोषित किया गया था, लेकिन उन्होंने नामांकन पत्र दाखिल नहीं किया। इसके परिणामस्वरूप इस वार्ड में भाजपा का कोई अधिकृत उम्मीदवार मैदान में नहीं रह गया।
कांग्रेस ने इस वार्ड से अफरोज को प्रत्याशी बनाया है। ऐसे में नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद वार्ड 146 का चुनावी मुकाबला एक अलग स्थिति में पहुंच गया है।
सीकर में भाजपा के दो घोषित प्रत्याशियों ने नहीं भरा नामांकन
सीकर नगर निकाय चुनाव में भी भाजपा के टिकट वितरण और नामांकन को लेकर अलग तस्वीर सामने आई। वार्ड नंबर 4 से भाजपा ने मोहम्मद आसिफ को अधिकृत प्रत्याशी घोषित किया था, लेकिन उन्होंने नामांकन दाखिल नहीं किया। इसी वार्ड से सुभाष चंद्र शर्मा ने भाजपा की ओर से नामांकन किया था। ऐसे में पार्टी के नियमों के अनुसार उन्हें सिंबल मिलने की स्थिति बनी है।
वार्ड नंबर 23 में भी भाजपा ने मोहम्मद साहिद को अधिकृत प्रत्याशी बनाया था, लेकिन उन्होंने नामांकन नहीं भरा। यहां पवन कुमार ने पार्टी की ओर से नामांकन दाखिल किया था। अब पार्टी सिंबल के आधार पर पवन कुमार के प्रत्याशी बनने की संभावना बनी है।
वार्ड नंबर 16 में भाजपा ने मोहम्मद वसीम को अधिकृत प्रत्याशी घोषित किया था। इस वार्ड में वसीम, इस्ताक और अनीता ने भाजपा की ओर से नामांकन दाखिल किया था। स्क्रूटनी में वसीम और इस्ताक के नामांकन खारिज होने के बाद अनीता पार्टी की अधिकृत प्रत्याशी के तौर पर बची हैं।
झालावाड़ में तीन नामांकन खारिज
झालावाड़ नगर परिषद के 45 वार्डों में दाखिल नामांकन पत्रों की जांच के दौरान तीन प्रमुख नामांकन खारिज हुए। वार्ड नंबर 5 से कांग्रेस प्रत्याशी पुष्पेंद्र सिंह का नामांकन होमगार्ड सेवा से संबंधित कारणों के चलते रद्द किया गया। इस वार्ड में भाजपा प्रत्याशी प्रदीप सिंह राजावत का ही नामांकन बचा, जिसके चलते उन्हें निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया।
वार्ड नंबर 7 में भाजपा प्रत्याशी सागर कहार का नामांकन एक मामले के कारण खारिज हुआ। यहां कांग्रेस प्रत्याशी महेंद्र सिंह का नामांकन शेष रहने के कारण उन्हें भी निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया।
वार्ड नंबर 31 में कांग्रेस प्रत्याशी शाहरुख का नामांकन खारिज होने के बाद भाजपा और आम आदमी पार्टी के प्रत्याशियों के बीच सीधा मुकाबला रह गया।
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पाली में सिंबल को लेकर कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने
पाली नगर निगम चुनाव में कांग्रेस ने आरोप लगाया कि उसके दो पार्टी सिंबल प्रशासन की ओर से गायब कर दिए गए। कांग्रेस पर्यवेक्षक हेमसिंह शेखावत ने दावा किया कि पार्टी ने निर्धारित समय से पहले 65 सिंबल जमा किए थे, लेकिन बाद में दो सिंबल कम बताए गए।
कांग्रेस ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए गंभीर मामला बताते हुए प्रशासन पर दबाव में काम करने का आरोप लगाया। वहीं भाजपा जिलाध्यक्ष सुशील भंडारी ने कांग्रेस के आरोपों को निराधार बताया। इस मामले में दोनों दलों के दावों के बीच प्रशासनिक रिकॉर्ड और आधिकारिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
अजमेर में बागियों ने बढ़ाई दोनों दलों की चिंता
अजमेर नगर निगम चुनाव में टिकट वितरण के बाद कांग्रेस और भाजपा दोनों के सामने बागियों की चुनौती सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार कांग्रेस के 92 और भाजपा के 36 बागी चुनावी मैदान में हैं। 80 वार्डों वाले नगर निगम में कुछ वार्डों में सीधा मुकाबला है, जबकि कुछ जगहों पर त्रिकोणीय संघर्ष की स्थिति बनी है।
टिकट से असंतुष्ट नेताओं का निर्दलीय मैदान में उतरना दोनों प्रमुख दलों के अधिकृत प्रत्याशियों के लिए चुनौती बन सकता है। स्थानीय चुनाव में व्यक्तिगत जनसंपर्क और वार्ड स्तर की पकड़ का असर परिणामों पर पड़ सकता है।
भाजपा में इस्तीफे और पैराशूट उम्मीदवारों का विरोध
अजमेर दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में टिकट वितरण से नाराज चार भाजपा नेताओं ने पार्टी से इस्तीफा देकर निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान किया। इनमें पूर्व मंडल अध्यक्ष और पूर्व पार्षद समेत संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां संभाल चुके नेता शामिल हैं।
जयपुर के सिविल लाइंस क्षेत्र के वार्ड नंबर 98 में भी भाजपा कार्यकर्ताओं ने कथित पैराशूट उम्मीदवार को टिकट दिए जाने का विरोध किया। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि लंबे समय से क्षेत्र में सक्रिय लोगों की अनदेखी कर बाहरी उम्मीदवार को मौका दिया गया।
चित्तौड़गढ़ में स्क्रूटनी के दौरान विवाद
चित्तौड़गढ़ नगर परिषद में नामांकन जांच के दौरान कांग्रेस और भाजपा नेताओं के साथ रिटर्निंग अधिकारी के बीच बहस की स्थिति बन गई। वार्ड नंबर 34 में कांग्रेस प्रत्याशी शांतिलाल ने भाजपा उम्मीदवार रमेश चंद्र मीणा के नामांकन पर आपत्ति जताई थी।
आपत्ति में एक पुराने आपराधिक मामले का हवाला दिया गया। रिटर्निंग अधिकारी ने आपत्ति खारिज करते हुए भाजपा प्रत्याशी का नामांकन स्वीकार कर लिया। इसके बाद कांग्रेस नेताओं ने विरोध किया और पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह जाड़ावत तथा अधिकारी के बीच तीखी बहस की स्थिति सामने आई।
उदयपुर और कोटा में भी टिकट को लेकर असंतोष
उदयपुर नगर निगम चुनाव में कांग्रेस के 22 बागी प्रत्याशियों के सामने आने की जानकारी सामने आई है। पार्टी ने अब बागियों से बातचीत कर उन्हें मनाने की कोशिश शुरू करने की बात कही है।
वहीं कोटा नगर निगम में कांग्रेस के टिकट वितरण को लेकर पार्टी के भीतर विवाद की खबरें सामने आईं। उम्मीदवार चयन को लेकर नेताओं के बीच मतभेद के बाद मामला प्रदेश नेतृत्व तक पहुंचा। इससे साफ है कि चुनाव से पहले दोनों प्रमुख दलों को अंदरूनी असंतोष से भी जूझना पड़ रहा है।
नाम वापसी के बाद स्पष्ट होगी अंतिम तस्वीर
नामांकन की स्क्रूटनी पूरी होने के बाद अब प्रत्याशियों के पास नाम वापस लेने का अवसर है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 3 सितंबर को दोपहर 3 बजे तक नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होगी। इसके बाद उसी दिन चुनाव लड़ने वाले अंतिम प्रत्याशियों की सूची जारी की जाएगी। 4 सितंबर को प्रत्याशियों को चुनाव चिह्न आवंटित किए जाएंगे।
इसके साथ ही राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव का वास्तविक मुकाबला स्पष्ट होगा। अभी कई वार्डों में बागियों, निर्दलीय प्रत्याशियों और नामांकन खारिज होने के कारण समीकरण बदल चुके हैं। अंतिम सूची सामने आने के बाद ही यह पता चलेगा कि किस वार्ड में मुकाबला सीधा, त्रिकोणीय या बहुकोणीय होगा। कुल मिलाकर नामांकन जांच के बाद राजस्थान के निकाय चुनाव में राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो गई हैं और अब सभी की नजर नाम वापसी तथा अंतिम प्रत्याशी सूची पर है।








