राजस्थान निकाय-पंचायत चुनाव पर OBC आरक्षण विवाद तेज, मंत्री जोगाराम पटेल का कांग्रेस पर निशाना

राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव OBC आरक्षण विवाद में अटके हैं। मंत्री जोगाराम पटेल ने कांग्रेस पर देरी का आरोप लगाते हुए बड़ा बयान दिया।

राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव OBC आरक्षण के मुद्दे पर अटके हुए हैं। मंत्री जोगाराम पटेल ने कांग्रेस पर देरी का आरोप लगाते हुए कहा कि बिना आरक्षण चुनाव कराने पर सहमति मिले तो भाजपा तैयार है।

जोधपुर: राजस्थान में लंबे समय से लंबित पंचायत और निकाय चुनावों को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि OBC आरक्षण को लेकर कांग्रेस का रुख चुनाव प्रक्रिया में देरी की बड़ी वजह है। उन्होंने दावा किया कि यदि कांग्रेस बिना आरक्षण चुनाव कराने पर सहमत हो जाए तो भाजपा तत्काल चुनाव कराने के पक्ष में है।

OBC आरक्षण को लेकर भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने

राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनावों की तारीखों का इंतजार लगातार बढ़ता जा रहा है। इस बीच संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल के बयान ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि OBC आरक्षण के मुद्दे पर उसका रुख स्पष्ट नहीं होने से चुनाव प्रक्रिया अटकी हुई है।

जोधपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान पटेल ने कहा कि अगर कांग्रेस सार्वजनिक रूप से बिना OBC आरक्षण चुनाव कराने के लिए तैयार हो जाए, तो भाजपा भी तुरंत चुनाव कराने का समर्थन करेगी। उन्होंने कहा कि इस संबंध में वे खुद सरकार से प्रक्रिया आगे बढ़ाने की मांग कर सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला

मंत्री ने चुनाव में देरी के पीछे सुप्रीम कोर्ट के 2021 के फैसले का जिक्र किया। उनके मुताबिक अदालत ने स्पष्ट किया था कि OBC राजनीतिक आरक्षण लागू करने से पहले राज्य सरकार को आयोग गठित कर उसकी रिपोर्ट लेनी होगी।

उन्होंने कहा कि इसी कानूनी प्रक्रिया के कारण पंचायत और निकाय चुनाव आगे नहीं बढ़ पाए हैं। जोगाराम पटेल ने यह भी कहा कि चुनाव करवाना सरकार का नहीं बल्कि राज्य निर्वाचन आयोग का दायित्व है, जबकि सरकार केवल प्रशासनिक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराती है।

आयोग की रिपोर्ट के बाद आगे बढ़ेगी प्रक्रिया

भाजपा सरकार ने दावा किया है कि सत्ता में आने के बाद उसने OBC आयोग का गठन कर दिया है और अब रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। मंत्री ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाया कि उसने अपने कार्यकाल में आयोग गठन की प्रक्रिया में देरी की।

हालांकि उन्होंने माना कि आयोग की रिपोर्ट आने की कोई निश्चित समयसीमा तय नहीं है। ऐसे में फिलहाल पंचायत और निकाय चुनाव कब होंगे, इस पर स्थिति साफ नहीं हो पाई है।

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