वैभव मुंजाल के पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान कॉमेडियन राजीव ठाकुर अपने संघर्ष भरे बचपन को याद कर भावुक हो गए। द ग्रेट इंडियन कपिल शो में अपनी शानदार कॉमिक टाइमिंग के लिए मशहूर राजीव ने बताया कि वह अपने शुरुआती दिनों के बारे में बहुत कम बात करते हैं, क्योंकि उनसे जुड़ी कई यादें आज भी बेहद दर्दनाक हैं।
एंटरटेनमेंट न्यूज़: भारतीय स्टैंडअप कॉमेडियन और अभिनेता राजीव ठाकुर ने अपने जीवन के शुरुआती संघर्षों को याद करते हुए अपनी भावनाएं साझा की हैं। एक हालिया पॉडकास्ट इंटरव्यू में राजीव ठाकुर ने बताया कि उनका बचपन बेहद कठिन परिस्थितियों में गुजरा। उन्होंने कहा कि उनके परिवार ने गरीबी, आर्थिक संकट और सीमित संसाधनों के बीच जीवन बिताया, लेकिन इन्हीं अनुभवों ने उन्हें मजबूत बनाया और सफलता की राह दिखाई।
‘द ग्रेट इंडियन कपिल शो’ में अपनी कॉमिक टाइमिंग और शानदार प्रस्तुति के लिए पहचाने जाने वाले राजीव ठाकुर ने बताया कि वह आमतौर पर अपने बचपन के बारे में ज्यादा बात नहीं करते, क्योंकि उन दिनों की यादें आज भी उन्हें भावुक कर देती हैं। उन्होंने कहा कि उनके जीवन की शुरुआती कहानी इतनी संघर्षपूर्ण है कि कई लोगों को इसे सुनकर यकीन करना मुश्किल हो सकता है।
एक कमरे के घर में बीता बचपन
वैभव मुंजाल के पॉडकास्ट पर बातचीत के दौरान राजीव ठाकुर ने बताया कि उनके परिवार की स्थिति उनके माता-पिता की शादी के बाद अचानक बदल गई थी। उन्होंने कहा कि उनके पिता को परिवार से अलग होना पड़ा, जिसके बाद वे एक छोटे से कमरे में रहने लगे। राजीव के मुताबिक, वह एक कमरा ही उनके परिवार का पूरा संसार था। उसी जगह पर सोना, खाना बनाना, रहना और रोजमर्रा की सभी गतिविधियां करनी पड़ती थीं। परिवार में कई सदस्य होने के कारण निजता जैसी कोई चीज नहीं थी।
उन्होंने भावुक होते हुए बताया कि कई बार उन्हें लगता था कि उनका घर किसी सार्वजनिक स्थान जैसा है, क्योंकि परिवार के सभी सदस्यों को बेहद कम जगह में जीवन बिताना पड़ता था। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति नहाने जाता था तो बाकी लोगों को बाहर इंतजार करना पड़ता था।
आर्थिक संकट और पिता की फैक्ट्री का नुकसान
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राजीव ठाकुर ने अपने परिवार के आर्थिक संघर्ष का जिक्र करते हुए बताया कि उनके पिता अमृतसर में धागे की फैक्ट्री चलाते थे, लेकिन 1984 के दंगों में फैक्ट्री बर्बाद हो गई। इसके बाद परिवार के सामने रोजी-रोटी का बड़ा संकट खड़ा हो गया। उन्होंने बताया कि उस समय घर की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि किराया चुकाना भी मुश्किल हो जाता था। घर में सिर्फ 40 वाट का एक बल्ब था, जिसकी हल्की पीली रोशनी में वह पढ़ाई करते थे।
राजीव ने कहा कि उन्हें बचपन में सफेद रोशनी वाली ट्यूबलाइट देखने की इच्छा होती थी। जब वह किसी दूसरे के घर जाते और वहां अच्छी रोशनी देखते, तो उनके मन में भी ऐसा घर होने का सपना पैदा होता था।
मां ने सिलाई करके संभाला परिवार
कॉमेडियन ने अपनी मां के संघर्ष को याद करते हुए बताया कि परिवार की आर्थिक मदद के लिए उनकी मां कपड़े सिलती थीं। वह ग्राहकों के कपड़े तैयार करतीं और उन्हें पहुंचाने का काम भी करती थीं। उन्होंने बताया कि परिवार एक ऐसी इमारत में रहता था जहां लिफ्ट नहीं थी और रोजमर्रा के कामों के लिए काफी मेहनत करनी पड़ती थी। पानी की बाल्टियां ऊपर तक ले जाना भी परिवार की दिनचर्या का हिस्सा था।
राजीव ठाकुर ने कहा कि आज जब वह पीछे मुड़कर देखते हैं तो उन्हें एहसास होता है कि उन्होंने अपनी परिस्थितियों से कहीं ज्यादा हासिल किया है। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि जिंदगी में हमेशा कोई न कोई व्यक्ति आगे बढ़ता हुआ दिखाई देता है और यही जीवन की वास्तविकता है।
संघर्ष से सफलता तक का सफर
राजीव ठाकुर ने मनोरंजन जगत में अपनी पहचान बनाने से पहले अमृतसर में ही कॉमेडी की शुरुआत की थी। उन्होंने कॉमेडी की दुनिया में कदम रखने के दौरान कपिल शर्मा और चंदन प्रभाकर जैसे कलाकारों के साथ काम किया। समय के साथ उन्होंने कई कॉमेडी शो में अपनी प्रतिभा दिखाई और आज वह भारतीय मनोरंजन जगत के लोकप्रिय चेहरों में शामिल हैं। ‘द ग्रेट इंडियन कपिल शो’ के जरिए वह देश और विदेश के दर्शकों तक अपनी पहचान बना चुके हैं।








