Kota ग्रामीण पुलिस ने हरियाणा की नूंह गैंग से जुड़े दो साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है। आरोपी रिश्तेदारों और परिचितों के बैंक खातों का इस्तेमाल कर करोड़ों रुपए की ठगी की रकम ट्रांसफर करते थे और कमीशन लेते थे।
कोटा: राजस्थान की Rajasthan पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए हरियाणा की कुख्यात नूंह गैंग से जुड़े दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि दोनों आरोपी करोड़ों रुपए की साइबर ठगी की रकम को अलग-अलग बैंक खातों और डिजिटल माध्यमों से ठिकाने लगाने का काम करते थे।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने पिछले 11 महीनों में 30 से अधिक किराए और परिचितों के बैंक खातों के जरिए लगभग 4 करोड़ 27 लाख रुपए का लेन-देन किया। इस मामले ने देश में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराध नेटवर्क और बैंक खातों के दुरुपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
झालावाड़ में पकड़े गए आरोपी
Rajasthan Police के कोटा ग्रामीण पुलिस विभाग ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान जावेद (25) और मोहम्मद इरशाद (30) के रूप में हुई है। दोनों हरियाणा के नूंह जिले के फिरोजपुर झिरका क्षेत्र के निवासी हैं।
पुलिस के मुताबिक, दोनों आरोपी 13 मई को राजस्थान के झालावाड़ जिले में ठगी की रकम लेने पहुंचे थे। सूचना मिलने के बाद मंडाना थाना पुलिस ने नाकाबंदी कर दोनों को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने उनके पास से 4 एटीएम कार्ड, 2 POS मशीन, 4 मोबाइल फोन, 5 सिम कार्ड और 1.71 लाख रुपए नकद बरामद किए। जिस कार में दोनों यात्रा कर रहे थे, उसे भी जब्त कर लिया गया है।
नूंह गैंग से जुड़े होने का दावा
ग्रामीण पुलिस अधीक्षक Sujeet Shankar ने बताया कि दोनों आरोपी हरियाणा की चर्चित साइबर ठगी गैंग “नूंह गैंग” से जुड़े हुए हैं।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क का कथित मास्टरमाइंड मोहम्मद अकील नामक व्यक्ति है, जो नूंह जिले में सक्रिय बताया जा रहा है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जावेद करीब एक साल पहले इस गिरोह से जुड़ा था और बाद में उसने मोहम्मद इरशाद को भी इस नेटवर्क में शामिल कर लिया। इरशाद पहले कपड़ों का व्यवसाय करता था, लेकिन अतिरिक्त कमाई के लालच में साइबर ठगी के नेटवर्क का हिस्सा बन गया।
ठगी के पैसों को ठिकाने लगाने का तरीका
जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपी साइबर ठगी की रकम को सीधे अपने खातों में रखने के बजाय रिश्तेदारों, परिचितों और किराए के बैंक खातों का इस्तेमाल करते थे।
इन खाताधारकों को बदले में 10 से 15 हजार रुपए तक दिए जाते थे। आरोपियों का काम ठगी से प्राप्त रकम को कई खातों में ट्रांसफर कर उसे नकद में बदलना था।
पुलिस का कहना है कि आरोपी दो प्रमुख तरीकों से पैसों को इधर-उधर करते थे:
1. बैंक खातों के जरिए रकम निकालना
ठगी की रकम पहले अलग-अलग खातों में भेजी जाती थी। इसके बाद आरोपी संबंधित खाताधारकों से नकद राशि लेकर उसे आगे पहुंचाते थे।
2. POS मशीन और ATM का इस्तेमाल
आरोपी POS मशीनों के जरिए रकम को डिजिटल रूप से ट्रांसफर करते थे और बाद में ATM से नकदी निकाल लेते थे।

4.27 करोड़ रुपए के लेन-देन का खुलासा
पुलिस जांच में अब तक 30 से अधिक खातों का पता चला है, जिनके जरिए 11 महीनों में करीब 4 करोड़ 27 लाख रुपए का लेन-देन हुआ।
इनमें कई खाते कथित तौर पर किराए पर लिए गए थे, जबकि कुछ खाते आरोपियों के रिश्तेदारों और परिचितों के थे।
अब तक पुलिस ने 7 प्रमुख बैंक खातों की पहचान की है। इनमें चार खाते जावेद से जुड़े बताए जा रहे हैं, जबकि तीन खाते राजस्थान के झालावाड़ निवासी एक ही परिवार के सदस्यों के हैं।
POS मशीन से लाखों रुपए ट्रांसफर
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने केवल तीन महीनों में POS मशीनों के जरिए लगभग 15 लाख रुपए इधर-उधर किए।
इसके अलावा, झालावाड़ के कुछ स्थानीय खातों में भी पिछले दो से तीन महीनों में लगभग 3 लाख रुपए की संदिग्ध रकम ट्रांसफर की गई।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन खातों के धारकों को साइबर ठगी के बारे में जानकारी थी या वे केवल लालच में अपने खाते इस्तेमाल करने दे रहे थे।
साइबर अपराध का बढ़ता नेटवर्क
भारत में साइबर ठगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अपराधी अब केवल ऑनलाइन फ्रॉड तक सीमित नहीं हैं, बल्कि संगठित नेटवर्क बनाकर रकम को छिपाने और ट्रैकिंग से बचने के नए तरीके अपना रहे हैं।
हरियाणा का नूंह क्षेत्र पिछले कुछ वर्षों में साइबर ठगी और डिजिटल फ्रॉड मामलों को लेकर कई बार चर्चा में रहा है। विभिन्न राज्यों की पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां ऐसे गिरोहों के खिलाफ लगातार अभियान चला रही हैं।
पुलिस की आगे की जांच जारी
Rajasthan Police अब इस मामले में अन्य आरोपियों और नेटवर्क से जुड़े लोगों की तलाश कर रही है।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इस गिरोह का संबंध देश के अन्य राज्यों में सक्रिय साइबर फ्रॉड नेटवर्क से भी है।
अधिकारियों का कहना है कि बैंक खातों, मोबाइल डेटा और डिजिटल ट्रांजैक्शन की गहन जांच की जा रही है, ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।
लोगों को सतर्क रहने की सलाह
पुलिस और साइबर विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति को अपना बैंक खाता, ATM कार्ड या मोबाइल नंबर इस्तेमाल करने के लिए न दें।
विशेषज्ञों के अनुसार, कई बार लोग छोटे कमीशन के लालच में अपने खाते उपलब्ध करा देते हैं, लेकिन बाद में वे भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं।
साइबर अपराध से बचने के लिए मजबूत डिजिटल सुरक्षा, सतर्कता और जागरूकता बेहद जरूरी मानी जा रही है।










