राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायती राज संस्थाओं और नगरीय निकायों के आगामी चुनावों में प्रत्याशियों द्वारा खर्च की जाने वाली राशि की सीमा बढ़ा दी है। अब जिला परिषद सदस्य, पंचायत समिति सदस्य और सरपंच पद के उम्मीदवार पिछले चुनाव की तुलना में दोगुनी राशि खर्च कर सकेंगे।
Panchayat Chunav 2026: राजस्थान में पंचायती राज और नगरीय निकाय चुनावों के लिए उम्मीदवारों की चुनावी खर्च सीमा में दोगुनी बढ़ोतरी कर दी गई है। राज्य निर्वाचन आयोग ने इस संबंध में नई अधिसूचना जारी की है, जिसके तहत सरपंच, पंचायत समिति, जिला परिषद सदस्य और नगर निकायों के उम्मीदवार अब पिछले मुकाबलों की तुलना में अधिक राशि खर्च कर सकेंगे। इस कदम का उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी, व्यावहारिक और समयानुकूल बनाना बताया गया है।
दोगुनी हुई चुनावी खर्च सीमा
राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने बताया कि आयोग समय-समय पर पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों में प्रत्याशियों के लिए अधिकतम खर्च की सीमा बढ़ाता रहा है। आगामी पंचायती राज चुनावों 2026 में भी यही नियम लागू किया गया है।
- जिला परिषद सदस्य: पिछले चुनाव 2019 में अधिकतम 1.5 लाख रुपए खर्च करने की अनुमति थी। अब इसे बढ़ाकर 3 लाख रुपए कर दिया गया है।
- पंचायत समिति सदस्य: वर्ष 2019 में 75,000 रुपए की सीमा थी, अब इसे 1.5 लाख रुपए किया गया।
- सरपंच पद: 50,000 रुपए की सीमा को बढ़ाकर अब 1 लाख रुपए कर दिया गया है।
इस तरह सभी प्रमुख पंचायत पदों के प्रत्याशी अब दोगुनी राशि खर्च कर सकेंगे।

पिछले 10 वर्षों में खर्च सीमा में कई गुना वृद्धि
पिछले दस वर्षों में राजस्थान में चुनावी खर्च की सीमा लगातार बढ़ती रही है।
- जिला परिषद सदस्य: 2014 में 80,000 रुपए → 2019 में 1.5 लाख रुपए → 2026 में 3 लाख रुपए।
- पंचायत समिति सदस्य: 2014 में 40,000 रुपए → 2019 में 75,000 रुपए → 2026 में 1.5 लाख रुपए।
- सरपंच पद: 2014 में 20,000 रुपए → 2019 में 50,000 रुपए → 2026 में 1 लाख रुपए।
इस तरह पिछले 10 वर्षों में सभी प्रमुख पंचायत चुनावों के लिए अधिकतम खर्च सीमा में कई गुना वृद्धि हुई है।
नगरीय निकाय चुनावों में भी बढ़ोतरी
राजस्थान में नगरीय निकाय चुनावों में भी खर्च सीमा बढ़ाई गई है:
- नगर निगम (पार्षद पद): 2014 में अधिकतम 80,000 रुपए → 2019 में 2.5 लाख रुपए → 2026 में 3.5 लाख रुपए।
- नगर परिषद: 2014 में 60,000 रुपए → 2019 में 1.5 लाख रुपए → अब 2 लाख रुपए।
- नगर पालिका: 2014 में 40,000 रुपए → 2019 में 1 लाख रुपए → अब 1.5 लाख रुपए।
इस तरह, नगर निकायों के लिए भी प्रत्याशियों की चुनावी खर्च सीमा में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी की गई है, जिससे उम्मीदवार चुनाव प्रचार में अधिक संसाधनों का उपयोग कर सकेंगे। राज्य निर्वाचन आयोग का कहना है कि चुनावी खर्च सीमा बढ़ाने का उद्देश्य न केवल प्रत्याशियों को प्रचार में पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराना है, बल्कि चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी और नियंत्रित बनाना भी है।
अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि सभी उम्मीदवारों को अपनी खर्च सीमा के अनुसार वित्तीय विवरण दाखिल करना अनिवार्य होगा, ताकि चुनावी प्रक्रिया में अनियमितताओं को रोका जा सके।











