पाक राजनीति में हलचल, सेना की नीति पर फजलुर रहमान का प्रहार, जानें क्या कहा?

पाक राजनीति में हलचल, सेना की नीति पर फजलुर रहमान का प्रहार, जानें क्या कहा?

मौलाना फजलुर रहमान ने अफगानिस्तान में पाक सेना की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भारत की कार्रवाई को गलत ठहराने वाला पाकिस्तान वही कदम अफगानिस्तान में उठाकर उसे जायज कैसे ठहरा सकता है।

Pakistan: पाकिस्तान की राजनीति में इन दिनों असहजता साफ दिखाई दे रही है। इसकी वजह बना है जमीयत उलेमा ए इस्लाम एफ के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान का वह बयान, जिसमें उन्होंने पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर के नेतृत्व में अफगानिस्तान के भीतर की गई सैन्य कार्रवाइयों पर खुलकर सवाल खड़े कर दिए हैं। फजलुर रहमान ने पाकिस्तान की दोहरी नीति को उजागर करते हुए कहा कि जब भारत की किसी कार्रवाई पर आपत्ति जताई जाती है, तो वही काम अफगानिस्तान में करना पाकिस्तान को जायज कैसे लगता है।

अफगानिस्तान में हमलों पर उठाए नैतिक सवाल

मौलाना फजलुर रहमान ने साफ शब्दों में कहा कि अफगानिस्तान के भीतर पाकिस्तान द्वारा की गई कार्रवाइयों में आम अफगान नागरिकों की मौत हुई है। उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान यह दावा करता है कि उसने अफगानिस्तान में अपने दुश्मनों को निशाना बनाया और यह उसका अधिकार है, तो भारत भी यही तर्क दे सकता है कि उसने अपने खिलाफ आतंक फैलाने वाले संगठनों पर कार्रवाई की है। ऐसे में आपत्ति का आधार क्या रह जाता है।

भारत के ऑपरेशन सिंदूर से की तुलना

फजलुर रहमान ने पाकिस्तान की अफगानिस्तान नीति की तुलना भारत के उस सैन्य कदम से की, जिसे दुनिया ऑपरेशन सिंदूर के नाम से जानती है। उन्होंने कहा कि जिस तरह भारत ने बहावलपुर और मुरिदके में उन संगठनों के ठिकानों पर हमला किया, जिन पर कश्मीर में आतंक फैलाने के आरोप हैं, उसी तरह पाकिस्तान भी अफगानिस्तान में अपने दुश्मनों को निशाना बनाने का दावा कर रहा है।

दोहरे रवैये पर सीधी चोट

मौलाना फजलुर रहमान ने यह भी कहा कि आज वही आरोप अफगानिस्तान पाकिस्तान पर लगा रहा है, जो दशकों तक पाकिस्तान भारत पर लगाता रहा है। ऐसे में एक ही समय पर दो विपरीत रुख अपनाना न नैतिक रूप से संभव है और न ही राजनीतिक रूप से टिकाऊ।

उनके इस बयान ने पाकिस्तान के भीतर उस सोच को चुनौती दी है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर हर सैन्य कदम को सही मान लिया जाता है और उस पर सवाल उठाने वालों को देशविरोधी करार दिया जाता है।

शहबाज शरीफ सरकार की बढ़ी परेशानी

फजलुर रहमान के इस बयान के बाद शहबाज शरीफ सरकार की असहजता साफ नजर आने लगी है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इस आलोचना को खारिज करने की कोशिश करते हुए कहा कि अफगानिस्तान में की गई कार्रवाई आतंकियों के खिलाफ थी, किसी देश के खिलाफ नहीं।

हालांकि यह सफाई उस मूल सवाल का जवाब नहीं देती, जो फजलुर रहमान ने उठाया है। सवाल यह है कि अगर आतंक के खिलाफ कार्रवाई हर देश का अधिकार है, तो पाकिस्तान भारत के उस अधिकार को क्यों नकारता रहा है।

नेशनल असेंबली में प्रभाव रखने वाले नेता

मौलाना फजलुर रहमान सिर्फ बयानबाजी करने वाले नेता नहीं हैं। उनकी पार्टी के पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में दस सदस्य हैं, जिससे उनके शब्दों का राजनीतिक वजन और बढ़ जाता है। यही वजह है कि उनके बयान को केवल एक विपक्षी हमला मानकर नजरअंदाज करना सरकार के लिए आसान नहीं है।

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बिगड़ते रिश्ते

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के रिश्ते पहले से ही तनावपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं। तालिबान की काबुल में वापसी के बाद सीमा पर तनाव लगातार बढ़ा है। पाकिस्तान का आरोप है कि अफगान धरती से आतंकी संगठन उसे निशाना बनाते हैं, जबकि अफगानिस्तान इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करता रहा है।

हालिया सीमा झड़पों में अफगान नागरिकों की मौत ने हालात को और गंभीर बना दिया है। यही वह संदर्भ है, जिसमें फजलुर रहमान का बयान सामने आया है और उसने पाकिस्तान की नीति को कठघरे में खड़ा कर दिया है।

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