राजस्थान सरकार ने मानसून से पहले सभी जर्जर स्कूल भवनों की मरम्मत और सुरक्षा जांच के सख्त निर्देश जारी किए हैं। अधिकारियों को समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है ताकि किसी भी तरह की दुर्घटना रोकी जा सके।
जयपुर: राज्य सरकार ने मानसून से पहले पूरे प्रदेश में जर्जर और मरम्मत योग्य स्कूल भवनों की स्थिति सुधारने के लिए सख्त निर्देश दिए हैं। बैठक में अधिकारियों को समयबद्ध ढंग से सुरक्षा जांच और मरम्मत कार्य पूरा करने के आदेश दिए गए। पिछले हादसों को देखते हुए सरकार ने स्कूलों की संरचना मजबूत करने और नई निर्माण योजनाओं को तेजी से लागू करने पर जोर दिया है।
मानसून से पहले स्कूल भवन सुरक्षा अभियान
राजस्थान सरकार ने मानसून की शुरुआत से पहले राज्यभर के जर्जर और कमजोर स्कूल भवनों की पहचान कर उनकी मरम्मत के लिए व्यापक अभियान शुरू करने के निर्देश दिए हैं। शिक्षा विभाग को सभी जिलों में सर्वे कर भवनों की स्थिति का आकलन करने और प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत कार्य शुरू करने को कहा गया है ताकि छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
इसके तहत विभाग को उन स्कूलों को चिन्हित करने के लिए कहा गया है जहां संरचनात्मक जोखिम अधिक है। साथ ही समयबद्ध कार्ययोजना बनाकर मरम्मत और आवश्यक होने पर नए भवनों के निर्माण की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश भी दिए गए हैं ताकि आगामी बारिश के मौसम में किसी प्रकार की दुर्घटना की आशंका न रहे।
झालावाड़ हादसे से मिली चेतावनी
बैठक में पिछले वर्ष झालावाड़ जिले में हुए दर्दनाक स्कूल हादसे का उल्लेख किया गया, जिसमें छत गिरने से कई बच्चों की जान चली गई थी और दर्जनों घायल हुए थे। इस घटना को राज्य के स्कूल ढांचे की कमजोर स्थिति का गंभीर उदाहरण मानते हुए तत्काल सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि ऐसी किसी भी घटना की पुनरावृत्ति न हो। इसके लिए सभी विद्यालयों में सुरक्षा मानकों का पालन, कमजोर ढांचों की पहचान और नियमित निरीक्षण को अनिवार्य बनाने की बात कही गई, साथ ही लापरवाही पर जवाबदेही तय करने का भी संकेत दिया गया।
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शिक्षा योजनाओं की समीक्षा और सुधार पर जोर
अतिरिक्त मुख्य सचिव ने शिक्षा विभाग की प्रमुख योजनाओं जैसे समग्र शिक्षा, पीएम-श्री योजना, फ्री यूनिफॉर्म डीबीटी, आईसीटी लैब और टैबलेट वितरण की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और समय पर लक्ष्य पूरा करने को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।
इसके साथ ही मध्याह्न भोजन योजना, राजस्थान पाठ्यपुस्तक बोर्ड और राज्य मुक्त विद्यालय जैसे संस्थानों के कामकाज की भी समीक्षा की गई। शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए विभागीय समन्वय बढ़ाने और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान देने के निर्देश जारी किए गए।









