राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित नई एसआईटी ने फिलहाल जांच शुरू नहीं की है। टीम पुरानी जांच रिपोर्टों और साक्ष्यों का अध्ययन कर रही है। जरूरत पड़ने पर नए लोगों से पूछताछ और अतिरिक्त जांच की जा सकती है।
अयोध्या: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित नई विशेष जांच दल (SIT) ने फिलहाल जांच शुरू करने के बजाय पहले की जांच रिपोर्टों और उपलब्ध साक्ष्यों का अध्ययन शुरू किया है। अधिकारियों का कहना है कि पुराने रिकॉर्ड की समीक्षा के बाद यदि नए तथ्य सामने आते हैं, तो जांच का दायरा बढ़ाया जा सकता है।
नई SIT पहले पुरानी जांच का कर रही है विश्लेषण
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित नई विशेष जांच दल (SIT) ने अभी औपचारिक रूप से नई जांच शुरू नहीं की है। फिलहाल टीम पहले से हुई जांच, पुलिस रिपोर्ट और उपलब्ध दस्तावेजों का विस्तृत अध्ययन कर रही है। अधिकारियों का उद्देश्य यह समझना है कि अब तक की जांच में कौन-कौन से पहलुओं को शामिल किया गया और किन बिंदुओं पर अभी भी स्पष्टता की आवश्यकता है।

सूत्रों के अनुसार, यदि पुरानी रिपोर्टों की समीक्षा के दौरान कोई नया तथ्य सामने आता है या किसी महत्वपूर्ण सवाल का संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो एसआईटी उन लोगों से भी पूछताछ कर सकती है जिनसे पहले पूछताछ नहीं हुई थी। इनमें ट्रस्ट के कर्मचारी, ट्रस्टी और संबंधित बैंक अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं, जिनका नाम अब तक दर्ज प्राथमिकी में नहीं है।
जून में सामने आया था चढ़ावा चोरी का मामला
राम मंदिर में चढ़ावे की गणना के दौरान जून महीने में कथित गड़बड़ी का मामला सामने आया था। शुरुआती स्तर पर मंदिर ट्रस्ट ने आंतरिक जांच कराई थी, जिसमें कुछ संदिग्ध कर्मचारियों से धनराशि की रिकवरी भी की गई थी। मामला सार्वजनिक होने और विवाद बढ़ने के बाद ट्रस्ट ने राज्य सरकार से स्वतंत्र जांच कराने की सिफारिश की थी।
इसके बाद गठित एसआईटी ने 15 जून से जांच शुरू की और शुरुआती छह दिनों में लगभग 150 कर्मचारियों से पूछताछ की। इनमें कई ऐसे लोग भी शामिल थे, जिनकी भूमिका को लेकर सवाल उठे थे। जांच के आधार पर 25 जून को प्राथमिकी दर्ज की गई, जिसमें कुल आठ लोगों को आरोपी बनाया गया। इनमें छह गणना कर्मी और दो ट्रस्ट कर्मचारी शामिल थे।
अन्य आरोपों पर भी रह सकती है जांच की नजर
चढ़ावा चोरी के मामले के साथ-साथ दान में मिले आभूषणों के कथित रूप से लापता होने, भूमि खरीद में अधिक भुगतान और विभिन्न आयोजनों में कथित अनियमित खर्च जैसे आरोप भी चर्चा में रहे हैं। हालांकि ट्रस्ट की 6 जुलाई को हुई बैठक में यह दावा किया गया था कि दान में मिले सभी आभूषण सुरक्षित हैं और उनकी जानकारी सार्वजनिक भी की गई थी। इसके बावजूद कुछ दानदाताओं और शिकायतकर्ताओं ने इस स्पष्टीकरण पर सवाल उठाए हैं।
इसी तरह भूमि खरीद और अन्य वित्तीय मामलों को लेकर उठे सवालों पर भी अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। ऐसे में माना जा रहा है कि यदि जांच के दौरान इन मामलों से जुड़े नए तथ्य सामने आते हैं, तो नई एसआईटी इनके पहलुओं की भी समीक्षा कर सकती है।
फिलहाल अयोध्या के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. गौरव ग्रोवर का कहना है कि उन्हें नई जांच शुरू करने संबंधी कोई औपचारिक आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में वे पहले से चल रही जांच का पर्यवेक्षण कर रहे हैं। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि रिपोर्टों की समीक्षा के बाद एसआईटी जांच को किस दिशा में आगे बढ़ाती है और क्या नए तथ्य सामने आते हैं।










