राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित चोरी मामले की जांच कर रहे विशेष जांच दल (Special Investigation Team) ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट तैयार कर ली है। रिपोर्ट के अनुसार, टीम ने मामले से जुड़े तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों का प्रारंभिक आकलन पूरा कर लिया है।
अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े कथित चढ़ावा प्रबंधन में अनियमितताओं की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार कर ली है। यह रिपोर्ट सोमवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी जा सकती है। प्रारंभिक निष्कर्षों में ट्रस्ट के पुनर्गठन और प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव की सिफारिश की गई है। यह मामला 7 जून को सामने आया था, जिसके बाद राज्य सरकार ने उच्च स्तरीय जांच के लिए SIT का गठन किया था।
SIT की प्रमुख सिफारिशें
सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक रिपोर्ट में ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन और पारदर्शिता को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं। इनमें सबसे अहम सिफारिश श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पुनर्गठन की है। इसके साथ ही, श्रीकाशी विश्वनाथ धाम मॉडल की तर्ज पर एक मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) की नियुक्ति की भी अनुशंसा की गई है, ताकि प्रशासनिक और वित्तीय कार्यों में अधिक पारदर्शिता लाई जा सके।
रिपोर्ट के अनुसार, जांच में ट्रस्ट से जुड़े कई लोगों की भूमिका पर सवाल उठे हैं। इनमें ट्रस्ट महासचिव चंपत राय, सदस्य डॉ. अनिल मिश्र, व्यवस्थापक गोपाल राव और अन्य प्रशासनिक स्टाफ शामिल हैं। इसके अलावा कुल 14 लोगों के नाम जांच के दायरे में आए हैं, जिनमें ट्रस्ट और बैंकिंग व्यवस्था से जुड़े कर्मचारी भी शामिल बताए जा रहे हैं।
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छह दिन की गहन जांच
SIT ने 15 जून से जांच शुरू की थी और लगभग छह दिनों तक अयोध्या में विभिन्न स्तरों पर पूछताछ की। जांच टीम ने ट्रस्ट अधिकारियों से विस्तृत जानकारी ली
लगभग 150 से अधिक लोगों के बयान दर्ज किए. नकदी प्रबंधन और दान प्रक्रिया की समीक्षा की. बैंकिंग रिकॉर्ड और प्रशासनिक दस्तावेजों की जांच की. जांच के दौरान कुछ मामलों में बयान में असंगति पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों से दोबारा पूछताछ भी की गई।
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि दानपात्रों की चाबियों और उनके संचालन से जुड़े प्रबंधन में अस्पष्टता पाई गई। रिपोर्ट में कुछ सेवादारों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, अभी तक किसी भी व्यक्ति पर औपचारिक आरोप सिद्ध नहीं हुए हैं, और यह रिपोर्ट केवल प्रारंभिक निष्कर्षों पर आधारित है।
SIT की रिपोर्ट में मंदिर प्रशासन में संरचनात्मक सुधार की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया है। सुझावों में पारदर्शी लेखा प्रणाली, डिजिटल ट्रैकिंग और स्वतंत्र ऑडिट व्यवस्था शामिल होने की संभावना जताई गई है।












