रांची में हाई-प्रोफाइल चोरी मामले की जांच में पुलिस की शुरुआती लापरवाही सामने आई है। आरोपित पुलिस के होटल पहुंचने से करीब 13 घंटे पहले ही झारखंड छोड़ चुके थे, जिससे जांच और अधिक चुनौतीपूर्ण हो गई है।
रांची: राजधानी रांची में कारोबारी अखिलेश पांडे के घर हुई हाई-प्रोफाइल चोरी की जांच के दौरान पुलिस की शुरुआती कार्रवाई पर सवाल उठे हैं। जांच में सामने आया है कि आरोपी होटल छोड़कर कई घंटे पहले ही फरार हो चुके थे। अब पुलिस सीसीटीवी फुटेज, कॉल डंप और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर उनकी तलाश में जुटी है।
होटल पहुंचने से पहले ही फरार हो चुके थे आरोपी
रांची में चर्चित चोरी के मामले की जांच के दौरान यह जानकारी सामने आई है कि दोनों आरोपी 9 जुलाई की सुबह करीब 5:20 बजे होटल छोड़कर निकल गए थे। वहीं पुलिस उसी दिन शाम लगभग 7 बजे होटल पहुंची। यानी पुलिस के पहुंचने से करीब 13 घंटे पहले ही आरोपी झारखंड की सीमा पार कर चुके थे। इस देरी के कारण शुरुआती जांच का महत्वपूर्ण मौका हाथ से निकल गया और आरोपितों को पकड़ना पुलिस के लिए अधिक कठिन हो गया।
जांच अधिकारियों के अनुसार चोरी की सूचना रात में ही मिल गई थी, लेकिन शहर से बाहर जाने वाले प्रमुख मार्गों पर समय रहते प्रभावी नाकेबंदी नहीं की गई। यदि तत्काल वाहनों की जांच शुरू कर दी जाती तो आरोपितों के फरार होने की संभावना काफी कम हो सकती थी।
फर्जी आधार कार्ड और नंबर प्लेट का किया इस्तेमाल
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपितों ने होटल में ठहरने के दौरान फर्जी पहचान का सहारा लिया। उन्होंने एक अन्य व्यक्ति के नाम पर बने आधार कार्ड से होटल में कमरा लिया। शुरुआती जांच में कार्ड पर लगी तस्वीर उसी व्यक्ति की प्रतीत हुई, लेकिन बाद में दस्तावेज फर्जी पाए गए।
इसके अलावा चोरी में इस्तेमाल की गई जगुआर कार पर लगा पंजीकरण नंबर भी फर्जी निकला। जांच में पता चला कि यह नंबर किसी दूसरी कार का था। हालांकि पुलिस के पास होटल के सीसीटीवी कैमरों से आरोपितों की स्पष्ट तस्वीरें और वाहन की फुटेज मौजूद हैं, लेकिन अभी तक उनकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।
कॉल डंप और सीसीटीवी के आधार पर जांच तेज
मामले की जांच के लिए पुलिस की कई विशेष टीमें गठित की गई हैं। जांच के दौरान घटनास्थल और उसके आसपास सक्रिय मोबाइल नंबरों का कॉल डंप निकाला गया है। इनमें कुछ संदिग्ध नंबर मिले हैं, जिनकी तकनीकी जांच जारी है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन नंबरों का संबंध आरोपितों या उनके सहयोगियों से है या नहीं।
जांच में यह भी सामने आया कि दोनों आरोपी 8 जुलाई को होटल में ठहरने के बाद उसी शाम करीब तीन घंटे तक शहर में घूमते रहे। इस दौरान उनकी कार कई स्थानों पर लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हुई। पुलिस को आशंका है कि इसी दौरान आरोपितों ने चोरी से पहले इलाके की रेकी की थी। अब उन सभी फुटेज का विश्लेषण कर यह पता लगाया जा रहा है कि वे किन-किन स्थानों पर गए और किन लोगों के संपर्क में आए।
फिलहाल पुलिस तकनीकी साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल डेटा और अन्य सुरागों के आधार पर आरोपितों की तलाश कर रही है। हालांकि शुरुआती स्तर पर हुई देरी ने जांच को जटिल बना दिया है और अब पुलिस को राज्य के बाहर भी विभिन्न एजेंसियों के साथ समन्वय बनाकर कार्रवाई करनी पड़ रही है।








