रांची में छात्र आंदोलन का 19वां दिन: लाठीचार्ज पर देवेंद्र महतो ने सरकार से पूछा- क्यों हुआ? अनशन जारी, छात्रों ने निकाला मौन जुलूस

रांची में JPSC-JSSC मुद्दों को लेकर छात्र आंदोलन 19वें दिन भी जारी है। देवेंद्र महतो ने लाठीचार्ज पर सरकार से सवाल किया, छात्रों ने मौन जुलूस निकाला।
रांची में छात्र आंदोलन का 19वां दिन: लाठीचार्ज पर देवेंद्र महतो ने सरकार से पूछा- क्यों हुआ? अनशन जारी, छात्रों ने निकाला मौन जुलूस
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रांची में JPSC और JSSC से जुड़े मुद्दों को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन लगातार जारी है। आंदोलन के 19वें दिन छात्रों ने मौन जुलूस निकालकर विरोध जताया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि आंदोलन के दौरान हुए पुलिस लाठीचार्ज का जवाब सरकार को देना चाहिए। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने भी सरकार से सवाल किया कि आखिर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखने वाले छात्रों पर लाठीचार्ज क्यों किया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि मांगें पूरी होने तक उनका अनशन जारी रहेगा। हालिया रिपोर्टों में भी छात्रों के मौन मार्च और देवेंद्र नाथ महतो की भूख हड़ताल जारी रहने की जानकारी सामने आई है।

छात्रों का यह आंदोलन JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों, पारदर्शिता और अभ्यर्थियों की मांगों से जुड़े मुद्दों को लेकर चल रहा है। आंदोलन के दौरान छात्रों की ओर से लगातार सरकार और संबंधित आयोग से जवाब मांगा जा रहा है। छात्रों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं से जुड़ी किसी भी शिकायत का निष्पक्ष तरीके से समाधान होना चाहिए, क्योंकि इन परीक्षाओं से हजारों युवाओं का भविष्य जुड़ा हुआ है।

19वें दिन प्रदर्शन का तरीका पहले के मुकाबले अलग नजर आया। छात्रों ने मौन जुलूस निकालकर अपनी नाराजगी जाहिर की। कई प्रदर्शनकारियों ने मुंह पर पट्टी बांधकर और हाथों में पोस्टर लेकर मार्च किया। रिपोर्टों के अनुसार, छात्रों ने रांची की सड़कों पर मौन मार्च निकालते हुए पुलिस लाठीचार्ज का विरोध किया।

मौन जुलूस के जरिए छात्रों ने यह संदेश देने की कोशिश की कि वे अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी के बजाय मौन रहकर सरकार और प्रशासन का ध्यान अपनी मांगों की ओर खींचने की कोशिश की गई। छात्रों का कहना है कि उनकी आवाज दबाने के बजाय उनकी समस्याओं पर बातचीत की जानी चाहिए।

आंदोलन में देवेंद्र नाथ महतो की भूमिका भी लगातार प्रमुख बनी हुई है। वह छात्रों की मांगों को लेकर अनशन पर बैठे हैं। हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, भूख हड़ताल के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ने की जानकारी भी सामने आई थी और उन्होंने अस्पताल से खुला पत्र लिखकर अपनी मांगों को दोहराया।

देवेंद्र महतो का कहना है कि आंदोलन तब तक समाप्त नहीं किया जाएगा, जब तक छात्रों की प्रमुख मांगों पर सरकार की ओर से ठोस पहल नहीं होती। उन्होंने लाठीचार्ज को लेकर सरकार से जवाब मांगा है। उनका सवाल है कि अगर छात्र अपने भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे तो उन पर बल प्रयोग की जरूरत क्यों पड़ी।

छात्रों के मुताबिक आंदोलन का मुख्य उद्देश्य किसी राजनीतिक दल के खिलाफ प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य से जुड़े सवालों का जवाब हासिल करना है। आंदोलन के दौरान छात्रों की ओर से अलग-अलग तरीकों से सरकार तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।

रांची में मौन मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों ने अनुशासन बनाए रखने की कोशिश की। आंदोलनकारियों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना चाहते हैं। इससे पहले भी छात्रों की ओर से शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने और किसी तरह की हिंसा से बचने की अपील की गई थी। स्थानीय स्तर पर आंदोलन को लेकर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आती रही हैं।

छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव का मुद्दा भी लगातार चर्चा में है। छात्रों का आरोप है कि पुलिस कार्रवाई में लाठीचार्ज किया गया, जबकि प्रशासन की ओर से किसी भी कार्रवाई का कारण और परिस्थितियां अलग तरीके से बताई जा सकती हैं। इसलिए लाठीचार्ज के वास्तविक कारणों और घटनाक्रम को लेकर आधिकारिक जांच या स्पष्ट बयान महत्वपूर्ण होगा।

आंदोलनकारियों का कहना है कि भर्ती परीक्षा में किसी भी तरह की अनियमितता का असर केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं रहता। हजारों अभ्यर्थी महीनों और वर्षों तक तैयारी करते हैं। परीक्षा प्रक्रिया को लेकर विवाद खड़ा होने पर उनका समय, पैसा और मानसिक मेहनत प्रभावित होती है। इसी वजह से छात्र चाहते हैं कि सरकार उनकी शिकायतों को गंभीरता से ले।

JPSC और JSSC से जुड़े मामलों को लेकर पहले भी झारखंड में छात्र आंदोलनों का लंबा इतिहास रहा है। दिसंबर 2024 में भी JSSC CGL से जुड़े विरोध प्रदर्शन के दौरान देवेंद्र नाथ महतो के नेतृत्व में छात्रों के प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई की खबर सामने आई थी।

वर्तमान आंदोलन में भी छात्रों की ओर से परीक्षा प्रक्रिया, कथित गड़बड़ियों और जवाबदेही को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि सरकार को केवल आश्वासन देने के बजाय स्पष्ट समयसीमा और ठोस कार्रवाई की जानकारी देनी चाहिए।

19वें दिन निकाले गए मौन जुलूस में छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर एकजुटता दिखाई। प्रदर्शनकारियों के हाथों में पोस्टर और बैनर नजर आए। मौन मार्च का उद्देश्य यह संदेश देना था कि लगातार आंदोलन के बावजूद उनकी मांगों की अनदेखी होने से छात्रों में नाराजगी बढ़ रही है।

देवेंद्र महतो के अनशन को लेकर भी आंदोलनकारियों में चिंता बनी हुई है। लंबे समय तक भूख हड़ताल से स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। हालिया रिपोर्ट में उनके अस्पताल से खुला पत्र लिखने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में आंदोलन के साथ उनकी स्वास्थ्य स्थिति भी महत्वपूर्ण मुद्दा बन गई है।

छात्रों का कहना है कि वे आंदोलन को लंबा खींचना नहीं चाहते, लेकिन जब तक उनकी मांगों पर संतोषजनक समाधान नहीं मिलता, तब तक पीछे हटने का सवाल नहीं है। दूसरी ओर प्रशासन के लिए भी चुनौती यह है कि प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनी रहे और आम लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो।

रांची में छात्र आंदोलन के कारण प्रशासन को प्रदर्शन स्थल और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था पर भी नजर रखनी पड़ रही है। किसी भी बड़े प्रदर्शन के दौरान यातायात और आम लोगों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। इसलिए पुलिस और प्रशासन की ओर से भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाए जा सकते हैं।

छात्रों की मांगों का समाधान बातचीत के जरिए निकालने की जरूरत पर भी जोर दिया जा रहा है। यदि सरकार और आंदोलनकारी प्रतिनिधियों के बीच औपचारिक बातचीत होती है तो कई मुद्दों पर स्थिति स्पष्ट हो सकती है। इससे आंदोलन को समाप्त करने की दिशा में भी रास्ता खुल सकता है।

फिलहाल आंदोलन 19वें दिन भी जारी है। छात्र मौन जुलूस के जरिए अपना विरोध दर्ज करा चुके हैं और देवेंद्र महतो ने अनशन जारी रखने की बात कही है। अब छात्रों की नजर सरकार की अगली प्रतिक्रिया पर है। आने वाले दिनों में आंदोलन की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार छात्रों की मांगों पर क्या कदम उठाती है।

कुल मिलाकर, रांची में JPSC-JSSC से जुड़े मुद्दों को लेकर छात्र आंदोलन 19वें दिन भी जारी है। छात्रों ने लाठीचार्ज के विरोध में मौन जुलूस निकाला, जबकि छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने सरकार से सवाल किया कि छात्रों पर लाठीचार्ज क्यों किया गया। महतो का अनशन भी जारी है। अब आंदोलनकारी सरकार से बातचीत और मांगों पर ठोस कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं।

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