हिमाचल प्रदेश सरकार ने प्रदेश के सड़क नेटवर्क को अधिक टिकाऊ और सुरक्षित बनाने के लिए विशेष सड़क जल निकासी नीति और सड़क सुरक्षा ऑडिट नीति लागू की है। मल्टी-यूटिलिटी डक्ट, डिजिटल रोड स्टेटस सिस्टम और ब्लैक स्पॉट की पहचान जैसे उपायों पर भी काम किया जा रहा है।
शिमला: हिमाचल प्रदेश सरकार ने प्रदेश के विषम भौगोलिक परिवेश और प्राकृतिक आपदाओं की चुनौतियों को देखते हुए सड़क नेटवर्क को अधिक टिकाऊ और सुरक्षित बनाने की दिशा में नई नीतियों पर अमल शुरू किया है। 31 अगस्त तक प्रदेश में सड़कों का नेटवर्क 41,903 किलोमीटर तक पहुंच चुका है, जिससे 15,608 गांवों को सीधा मोटर संपर्क मिल रहा है। सरकार ने सड़क निर्माण में जल निकासी, सुरक्षा मानकों और आधुनिक प्रबंधन प्रणाली पर विशेष जोर दिया है।
विशेष सड़क जल निकासी नीति लागू
पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश का पानी सड़कों के धंसने और टूटने का प्रमुख कारण बनता है। इस समस्या से स्थायी रूप से निपटने के लिए सरकार ने फरवरी में विशेष सड़क जल निकासी नीति लागू की है। अब सड़क की प्लानिंग और डिजाइन के स्तर पर ही वर्षा की तीव्रता और जलग्रहण क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए नालियों और जल निकासी ढांचों का निर्माण अनिवार्य किया गया है।
नालियों में अवरोध डालने या अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का भी प्रविधान किया गया है। इससे बारिश के दौरान सड़क पर पानी जमा होने और जल निकासी की समस्या को कम करने का प्रयास किया जाएगा।
संपर्क मार्गों के लिए तय किए गए कड़े मानक
सरकार ने जीप और एंबुलेंस लिंक सड़कों की गुणवत्ता को लेकर भी दिशा-निर्देश अधिसूचित किए हैं। इनके तहत सड़क की चौड़ाई, पेवमेंट, रिटेनिंग और ब्रेस्ट वाल, ढलानों के संरक्षण तथा क्रैश बैरियर जैसे सुरक्षा उपायों के लिए मानक तय किए गए हैं।
रोड स्टेटस सिस्टम से मिलेगी लाइव जानकारी
सड़क प्रबंधन को हाईटेक बनाने के लिए केंद्रीकृत रोड स्टेटस इन्फार्मेशन सिस्टम तैयार किया जा रहा है। मानसून या प्राकृतिक आपदा के दौरान इसके माध्यम से लोगों को सड़क बंद होने, वैकल्पिक मार्गों और बहाली कार्य की लाइव जानकारी मिल सकेगी।
निर्माण कार्यों और वित्तीय पारदर्शिता के लिए वर्क्स एंड अकाउंट्स मैनेजमेंट इन्फार्मेशन सिस्टम भी लागू किया जा रहा है। इसके जरिए माप पुस्तिका और बिलिंग से जुड़े काम डिजिटल और पारदर्शी बनाए जाएंगे।
सड़क सुरक्षा ऑडिट होगा अनिवार्य
जुलाई 2026 में स्वीकृत सड़क सुरक्षा ऑडिट नीति के तहत सड़कों की योजना, निर्माण और वर्तमान स्थिति का नियमित सुरक्षा ऑडिट अनिवार्य किया गया है। लोक निर्माण विभाग मुख्यालय में सड़क सुरक्षा प्रकोष्ठ स्थापित किया जा रहा है। यह प्रकोष्ठ ब्लैक स्पॉट की पहचान करेगा और दुर्घटना संभावित क्षेत्रों को सुरक्षित बनाने के लिए काम करेगा।
सड़कों पर गड्ढों और पैचवर्क की समयबद्ध मरम्मत के लिए एसओपी भी तय की गई है। इसका उद्देश्य सड़क की खराब स्थिति के कारण होने वाली दुर्घटनाओं और यातायात संबंधी जोखिमों को कम करना है।
मल्टी-यूटिलिटी डक्ट से बार-बार खुदाई पर रोक
अक्सर नई सड़क बनने के बाद पानी, बिजली या टेलीकाम केबल बिछाने के लिए उसकी दोबारा खुदाई की जाती है। इससे सड़क की गुणवत्ता और उम्र प्रभावित होती है तथा सार्वजनिक धन का भी नुकसान होता है। इसे रोकने के लिए सरकार मुख्य मार्गों के साथ भूमिगत मल्टी-यूटिलिटी डक्ट बनाने की योजना पर काम कर रही है।
इस व्यवस्था से विभिन्न सेवाओं के लिए सड़क की बार-बार खुदाई रोकने में मदद मिलेगी और सड़क की उम्र के साथ सार्वजनिक संसाधनों को भी सुरक्षित रखने का प्रयास किया जाएगा।











