कानपुर में भारी बारिश से कच्चे मकान की दीवार गिरी, 8 लोग मलबे में दबे: ग्रामीणों ने रेस्क्यू कर निकाला

कानपुर के सचेंडी में भारी बारिश के बीच कच्चे मकान की दीवार गिरने से एक ही परिवार के 8 लोग मलबे में दब गए। चार गंभीर घायलों को एलएलआर अस्पताल भेजा गया।
कानपुर में भारी बारिश से कच्चे मकान की दीवार गिरी, 8 लोग मलबे में दबे: ग्रामीणों ने रेस्क्यू कर निकाला
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कानपुर में लगातार हो रही बारिश के बीच सोमवार तड़के बड़ा हादसा हो गया। सचेंडी थाना क्षेत्र के कैधा नयापुरवा गांव में बारिश के कारण एक कच्चे मकान की दीवार अचानक भरभराकर गिर गई। दीवार के पास बने छप्पर के नीचे परिवार के आठ सदस्य सो रहे थे। दीवार गिरते ही सभी लोग मलबे में दब गए। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। तेज आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे और राहत-बचाव का काम शुरू किया। ग्रामीणों ने काफी मशक्कत के बाद मलबा हटाकर सभी आठ लोगों को बाहर निकाला और इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा।

हादसा सोमवार भोर करीब तीन बजे हुआ। कैधा नयापुरवा गांव निवासी मुन्ना सिंह अपने परिवार के साथ कच्चे मकान में रहते हैं। रविवार रात परिवार के सदस्य कोठरी से सटे छप्पर के नीचे सोए हुए थे। रात में लगातार बारिश होती रही। बारिश के कारण कच्ची दीवार कमजोर हो गई और भोर के समय अचानक भरभराकर गिर पड़ी। उस वक्त परिवार के सभी लोग नींद में थे, इसलिए किसी को संभलने का मौका नहीं मिला और आठ लोग दीवार के मलबे के नीचे दब गए।

मलबे में दबने वालों में मुन्ना सिंह, उनकी पत्नी रमाकांती, बेटे दीपक, शुभम और रौनक तथा बेटियां अंजली, रिंकी और पिंकी शामिल हैं। हादसे के बाद आसपास के लोगों ने बिना समय गंवाए बचाव अभियान शुरू किया। ग्रामीणों ने हाथों और उपलब्ध साधनों की मदद से मलबा हटाना शुरू किया। साथ ही पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी गई। आसपास के लोगों की तत्परता से सभी आठ लोगों को मलबे से बाहर निकाल लिया गया।

मलबे से निकाले जाने के बाद सभी घायलों को कल्याणपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया। वहां चिकित्सकों ने प्राथमिक जांच और उपचार के बाद परिवार के चार सदस्यों की हालत गंभीर बताई। गंभीर घायलों में मुन्ना सिंह, उनकी पत्नी रमाकांती, बेटी अंजली और बेटा शुभम शामिल हैं। इन चारों को बेहतर इलाज के लिए एलएलआर अस्पताल रेफर किया गया है। वहीं परिवार के अन्य चार सदस्यों को अपेक्षाकृत हल्की चोटें आईं। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें अस्पताल से घर भेज दिया गया।

हादसे की जानकारी मिलते ही पुलिस भी मौके पर पहुंची और घटनास्थल का जायजा लिया। थाना प्रभारी दीनानाथ मिश्रा ने बताया कि घायलों का उपचार कराया जा रहा है और घटना के बाद मौके की स्थिति सामान्य है। बारिश के कारण कच्चे मकानों और उनकी कमजोर दीवारों के गिरने का खतरा बना हुआ है, ऐसे में ग्रामीण इलाकों में प्रशासन की निगरानी भी महत्वपूर्ण हो गई है।

कानपुर में पिछले कई दिनों से लगातार बारिश के कारण कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। इससे जनजीवन प्रभावित हुआ है और कई जगह कच्चे मकानों को भी नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आई हैं। इससे पहले भी कानपुर के अलग-अलग इलाकों में बारिश के कारण कच्चे मकानों और उनकी छतों के गिरने की घटनाएं सामने आई हैं। प्रशासन और स्थानीय स्तर पर लोगों को कमजोर मकानों और जलभराव वाले इलाकों में सावधानी बरतने की जरूरत बताई जा रही है।

कैधा नयापुरवा की घटना में राहत की बात यह रही कि दीवार गिरने के बाद ग्रामीणों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर बचाव कार्य शुरू कर दिया। अगर मलबा हटाने और घायलों को अस्पताल पहुंचाने में ज्यादा समय लगता तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी। पड़ोसियों और ग्रामीणों ने पुलिस तथा एंबुलेंस को सूचना देने के साथ ही खुद भी बचाव कार्य में हिस्सा लिया। कुछ ही समय में मलबे में दबे सभी आठ लोगों को बाहर निकाल लिया गया।

लगातार बारिश के बीच कच्चे मकानों में रहने वाले परिवारों के लिए इस तरह की घटनाएं चिंता बढ़ाने वाली हैं। बारिश के कारण मिट्टी, ईंट और गारे से बनी दीवारों में नमी बढ़ जाती है और लंबे समय तक पानी पड़ने से उनकी मजबूती प्रभावित हो सकती है। ऐसे में कमजोर दीवारों और पुराने कच्चे मकानों के आसपास रहने वाले लोगों के लिए अतिरिक्त सतर्कता जरूरी हो जाती है। कानपुर में लगातार बारिश के कारण कई इलाकों में पहले ही जलभराव और दूसरी समस्याएं सामने आ चुकी हैं।

फिलहाल इस हादसे में किसी की मौत की सूचना नहीं है। चार लोगों की हालत गंभीर बताई गई है और उन्हें एलएलआर अस्पताल में इलाज के लिए भेजा गया है, जबकि चार अन्य घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया। पुलिस ने मौके की स्थिति का जायजा लिया है और घायलों के इलाज की प्रक्रिया जारी है। सोमवार भोर हुए इस हादसे ने गांव में रहने वाले लोगों को भी सतर्क कर दिया है। लगातार बारिश के बीच आसपास के दूसरे कच्चे मकानों को लेकर भी ग्रामीणों में चिंता बनी हुई है।

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