प्रियंका गोस्वामी से भारत को इस स्पर्धा में पदक की उम्मीद थी। वह एशियन गेम्स में भारत की ओर से मजबूत दावेदारों में शामिल थीं, लेकिन रेस के शुरुआती हिस्से में ही चार रेड कार्ड मिलने के कारण उनका सफर खत्म हो गया। रविवार को हुई इस स्पर्धा में प्रियंका को पहला रेड कार्ड ग्राउंड से संपर्क टूटने के लिए मिला। इसके बाद दूसरा कार्ड घुटने के मुड़ने, तीसरा फिर ग्राउंड से संपर्क टूटने और चौथा घुटने के मुड़ने के कारण दिया गया। चौथा रेड कार्ड मिलते ही उन्हें डिसक्वालिफाई कर दिया गया।
रेस वॉक सामान्य दौड़ से अलग तकनीकी नियमों वाली एथलेटिक्स स्पर्धा है। इसमें खिलाड़ी के लिए हर समय कम से कम एक पैर का जमीन से संपर्क दिखाई देना जरूरी होता है। इसके साथ ही आगे बढ़ते समय आगे वाला घुटना सीधा रहना चाहिए। यदि जज को लगता है कि खिलाड़ी का जमीन से संपर्क टूट गया है या पैर आगे बढ़ाते समय घुटना नियम के मुताबिक सीधा नहीं है, तो उसके खिलाफ रेड कार्ड दर्ज किया जा सकता है।
रेस के दौरान अलग-अलग जज खिलाड़ियों की तकनीक पर लगातार नजर रखते हैं। तीन रेड कार्ड मिलने के बाद खिलाड़ी को पेनल्टी जोन में भेजा जा सकता है और उसे समय की पेनल्टी पूरी करनी पड़ती है। लेकिन चौथा रेड कार्ड मिलने पर खिलाड़ी को प्रतियोगिता से बाहर कर दिया जाता है। प्रियंका के मामले में भी यही हुआ। उन्हें 9 किलोमीटर के आसपास चौथा रेड कार्ड मिला और इसके बाद उन्हें आधिकारिक तौर पर डिसक्वालिफाई कर दिया गया।
प्रियंका के चारों रेड कार्ड दो अलग-अलग तकनीकी कारणों से आए। उन्हें दो कार्ड लॉस ऑफ कॉन्टैक्ट यानी चलते समय जमीन से संपर्क दिखाई नहीं देने के कारण मिले, जबकि दो कार्ड नी फ्लेक्शन यानी आगे बढ़ते समय घुटना मुड़ने के कारण दिए गए। इस तरह चार कार्ड पूरे होते ही उनका 42 किलोमीटर की मैराथन रेस वॉक का अभियान शुरुआती चरण में ही समाप्त हो गया।
प्रियंका गोस्वामी के लिए यह पहला ऐसा मौका नहीं है जब रेड कार्ड ने उनकी रेस को प्रभावित किया हो। 2025 की वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी उन्हें तीन रेड कार्ड मिले थे। हालांकि उस प्रतियोगिता में वह डिसक्वालिफाई होने से बच गई थीं और उन्हें पेनल्टी के तौर पर समय गंवाना पड़ा था। टोक्यो में उन्होंने 35 किलोमीटर रेस वॉक पूरी की थी और 3 घंटे 5 मिनट 58 सेकंड का समय दर्ज किया था। उस दौरान उन्होंने लगभग साढ़े तीन मिनट की पेनल्टी भी झेली थी।
2025 की उस प्रतियोगिता में प्रियंका ने खुद रेस वॉक की तकनीकी चुनौतियों और रेड कार्ड के प्रभाव पर बात की थी। उन्होंने बताया था कि रेस वॉक में पहले रेस पूरी करने और चेतावनियों से बचने पर ध्यान देना पड़ता है, क्योंकि तकनीकी नियमों के उल्लंघन से पूरा प्रदर्शन प्रभावित हो सकता है। इस बार एशियन गेम्स में चार रेड कार्ड मिलने के कारण उन्हें रेस पूरी करने का अवसर ही नहीं मिला।
भारत की दूसरी खिलाड़ी मंजू रानी ने हालांकि रेस पूरी की। उन्हें भी प्रतियोगिता के दौरान तीन रेड कार्ड मिले और पेनल्टी का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने 3 घंटे 40 मिनट 17 सेकंड के समय के साथ छठा स्थान हासिल किया। रेस के एक चरण में तीसरा रेड कार्ड मिलने के बाद उन्हें पेनल्टी पूरी करनी पड़ी, जिसके कारण उनकी स्थिति पर भी असर पड़ा।
प्रियंका गोस्वामी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से जुड़ी प्रमुख भारतीय रेस वॉकर हैं और लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करती रही हैं। 2025 वर्ल्ड चैंपियनशिप में उन्होंने महिलाओं की 35 किलोमीटर रेस वॉक में हिस्सा लिया था। वह उस स्पर्धा में 23वें स्थान पर रही थीं। इससे पहले वह 20 किलोमीटर रेस वॉक में भी भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं और एशियन चैंपियनशिप में पदक जीत चुकी हैं।
एशियन गेम्स 2026 में मैराथन रेस वॉक को लेकर भारतीय दल की उम्मीदें इसलिए भी महत्वपूर्ण थीं क्योंकि यह लंबी दूरी और तकनीकी अनुशासन वाली स्पर्धा है। खिलाड़ियों को लगातार अपनी चाल, शरीर की स्थिति और जमीन से संपर्क बनाए रखने पर ध्यान देना पड़ता है। थोड़ी सी तकनीकी गलती भी जजों की नजर में आने पर रेड कार्ड का कारण बन सकती है। प्रियंका के मामले में चार अलग-अलग तकनीकी उल्लंघनों के कारण प्रतियोगिता से बाहर होना पड़ा।
रेस के शुरुआती 9 किलोमीटर में ही चार रेड कार्ड मिलना प्रियंका के लिए बड़ा झटका रहा। जिस स्पर्धा में उन्हें लंबी दूरी तय करनी थी, उसमें वह शुरुआती चरण से आगे नहीं बढ़ सकीं। भारत की पदक उम्मीदों को भी इससे नुकसान हुआ। वहीं मंजू रानी ने रेस पूरी कर छठा स्थान हासिल किया, लेकिन तीन रेड कार्ड और पेनल्टी के कारण उनके प्रदर्शन पर भी तकनीकी उल्लंघनों का असर पड़ा।
रेस वॉक में रेड कार्ड को लेकर नियम बेहद सख्त होते हैं क्योंकि प्रतियोगिता की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए सभी खिलाड़ियों को निर्धारित तकनीक के अनुसार चलना होता है। ग्राउंड से संपर्क बनाए रखना और आगे बढ़ते समय घुटने की स्थिति नियमों के अनुरूप रखना अनिवार्य है। इसी तकनीकी व्यवस्था के तहत प्रियंका के खिलाफ चार रेड कार्ड दर्ज हुए और उन्हें TR54.7.5 के तहत प्रतियोगिता से बाहर कर दिया गया।
प्रियंका के लिए एशियन गेम्स 2026 का यह नतीजा निराशाजनक जरूर रहा, लेकिन उनका अंतरराष्ट्रीय रेस वॉक करियर इससे समाप्त नहीं होता। इससे पहले भी वह बड़े मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं और कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुकी हैं। 2025 में उन्होंने 35 किलोमीटर की स्पर्धा में कठिन परिस्थितियों के बावजूद रेस पूरी की थी। अब एशियन गेम्स में शुरुआती दूरी पर डिसक्वालिफिकेशन के बाद उनके अगले मुकाबलों और प्रतियोगिताओं में वापसी पर नजर रहेगी।
एशियन गेम्स 2026 की इस स्पर्धा में भारत की ओर से प्रियंका गोस्वामी का अभियान चार रेड कार्ड के साथ 9 किलोमीटर पर खत्म हुआ, जबकि मंजू रानी ने 3:40:17 के समय के साथ छठा स्थान हासिल किया। प्रियंका को दो रेड कार्ड लॉस ऑफ कॉन्टैक्ट और दो नी फ्लेक्शन के लिए मिले। चौथा कार्ड मिलते ही नियमों के तहत उन्हें डिसक्वालिफाई कर दिया गया।










