Budget 2026 में सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा को तकनीकी रूप से मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। Technology in National Security के तहत 9,800 करोड़ रुपये का प्रावधान बदलते युद्ध स्वरूप को ध्यान में रखते हुए किया गया है, ताकि साइबर, ड्रोन और AI जैसे खतरों से प्रभावी तरीके से निपटा जा सके।
Budget 2026 Technology in National Security: केंद्रीय बजट 2026 में भारत सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा को नई तकनीकी धार देने के लिए 9,800 करोड़ रुपये का विशेष बजट तय किया है। यह फैसला भारत में पेश बजट के जरिए ऐसे समय लिया गया है, जब वैश्विक स्तर पर साइबर अटैक, ड्रोन हमले और AI आधारित जासूसी जैसी चुनौतियां बढ़ रही हैं। इस निवेश से सेना, अर्धसैनिक बलों और सुरक्षा एजेंसियों को आधुनिक तकनीक से लैस किया जाएगा, ताकि सीमाओं की निगरानी, आंतरिक सुरक्षा और खुफिया तंत्र को अधिक मजबूत और तेज बनाया जा सके।
बदलते युद्ध और भारत की तैयारी
आज वैश्विक स्तर पर संघर्ष का मैदान केवल सीमाओं तक सीमित नहीं है। साइबर अटैक, ड्रोन हमले, सैटेलाइट सिस्टम को निशाना बनाना और AI आधारित जासूसी जैसे खतरे तेजी से बढ़े हैं। कई देश तकनीकी बढ़त के जरिए रणनीतिक बढ़त हासिल कर रहे हैं।
ऐसे माहौल में Budget 2026 में Technology in National Security पर जोर यह संकेत देता है कि भारत भविष्य के खतरों को गंभीरता से ले रहा है। सरकार का फोकस पारंपरिक सुरक्षा के साथ-साथ डिजिटल और हाई-टेक सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने पर है।

किन तकनीकों पर होगा फोकस
9,800 करोड़ रुपये के इस बजट का इस्तेमाल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी, ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम, सैटेलाइट निगरानी, डेटा एनालिटिक्स और क्वांटम टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में किया जाएगा। इन तकनीकों से सीमाओं की निगरानी ज्यादा सटीक और तेज हो सकेगी।
इसके साथ ही आंतरिक सुरक्षा और खुफिया तंत्र को भी तकनीकी रूप से मजबूत किया जाएगा। रियल-टाइम डेटा और स्मार्ट एनालिसिस के जरिए संभावित खतरों को पहले ही पहचानना संभव होगा।
सुरक्षा एजेंसियों को मिलेगी नई ताकत
इस निवेश से सेना, अर्धसैनिक बलों और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को अत्याधुनिक सिस्टम मिलेंगे। ऑटोमेटेड थ्रेट डिटेक्शन और तेज निर्णय लेने वाली प्रणालियां प्रतिक्रिया समय को काफी कम कर सकती हैं।
सरकार का मानना है कि टेक्नोलॉजी आधारित सुरक्षा से नुकसान को रोकना और जोखिम को कम करना ज्यादा आसान होगा। यह न केवल सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि संसाधनों के बेहतर उपयोग में भी मदद करेगा।









