रायगढ़ कोल खदान विवाद में हिंसा, महिला TI को लात मार कर किया बेहोश, गाड़ी और एंबुलेंस भी फूंकी

रायगढ़ में JPL कोल खदान विरोध प्रदर्शन हिंसक, महिला TI को लात मार बेहोश, पुलिस वाहन और एंबुलेंस फूंकी गईं। प्रशासन ने सुरक्षा बढ़ाई, जांच शुरू की।
रायगढ़ कोल खदान विवाद में हिंसा, महिला TI को लात मार कर किया बेहोश, गाड़ी और एंबुलेंस भी फूंकी
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रायगढ़ जिले में JPL कोयला खदान विरोध प्रदर्शन उग्र हो गया। ग्रामीणों और पुलिस के बीच झड़प में कई घायल हुए, पुलिस वाहनों और कोल हैंडलिंग प्लांट में आग लगी। प्रशासन ने इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी और कड़ी कार्रवाई का ऐलान किया।

Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में JPL कोयला खदान को लेकर 14 प्रभावित गांवों के ग्रामीण 12 दिसंबर से लगातार धरने पर हैं। वे लिबरा रोड पर सड़क पर पेड़ काटकर रख चुके हैं, जिससे कोई भी वाहन आगे नहीं बढ़ सकता। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक प्रशासन खदान के निर्णय को वापस नहीं लेता, उनका विरोध जारी रहेगा।

जिला प्रशासन और ग्रामीणों के बीच कई बैठकें हुई हैं। घरघोड़ा SDM दुर्गा प्रसाद ने बताया कि प्रदर्शनकारी और जनप्रतिनिधि मिलकर प्रशासन के साथ बातचीत कर रहे हैं। धौराभाठा बाजार में हुई जनसुनवाई को निरस्त करने की प्रक्रिया भी इसी बातचीत का हिस्सा है।

पुलिस पर हमला कर किया घायल 

शनिवार को पुलिस ने धरने को हटाने के प्रयास किए। इसी दौरान प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर हमला कर दिया। महिलाओं ने तमनार थाना की थाना प्रभारी कमला पुषाम पर लात-घूसों से हमला किया, जिससे वह बेहोश होकर गिर गईं। SDOP अनिल विश्वकर्मा सहित कई पुलिसकर्मी भी घायल हुए।

घायलों का इलाज स्थानीय हॉस्पिटल और रायगढ़ रेफर अस्पताल में किया गया। हमला इतना हिंसक था कि पुलिस की गाड़ियां और एम्बुलेंस भी आग के हवाले हो गईं। प्रशासन ने तुरंत मौके पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया और शांतिपूर्ण वार्ता की कोशिश शुरू की।

कांग्रेस ने इस मामले में 9 सदस्यों की जांच कमेटी बनाई है। इसकी अध्यक्षता पूर्व मंत्री धनेंद्र साहू करेंगे। कमेटी प्रभावित इलाके का दौरा करेगी और रिपोर्ट सौंपेगी।

भीड़ का उग्र प्रदर्शन

जिला प्रशासन के अनुसार, शनिवार को धरना स्थल पर लगभग 300 ग्रामीण जमा हुए थे, जो बाद में बढ़कर लगभग 1000 तक पहुँच गए। सुबह 9 बजे से ही ग्रामीण सड़क पर बैठकर आने-जाने का मार्ग रोक रहे थे।

प्रशासन ने अनुविभागीय अधिकारी, पुलिस और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में लोगों को शांत रहने और धरने स्थल पर बने टेंट में लौटने की अपील की। थोड़ी देर तक माहौल शांत रहा, लेकिन दोपहर ढाई बजे अचानक हालात बिगड़ गए।

भीड़ ने पुलिस के बैरिकेड तोड़ दिए और पत्थरों व डंडों से हमला किया। कई पुलिसकर्मी और महिला आरक्षक घायल हुए। प्रशासन ने मौके पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए बार-बार संवाद की कोशिश की, लेकिन भीड़ बार-बार हिंसक हो गई।

पुलिस वाहनों पर भी हमला

उग्र भीड़ ने पुलिस वाहनों और एम्बुलेंस में आग लगा दी। इसके बाद जिंदल के कोल हैंडलिंग प्लांट की ओर बढ़कर कन्वेयर बेल्ट, ट्रैक्टर और अन्य उपकरणों में आग लगाई और प्लांट के दफ्तर में भी तोड़फोड़ की।

स्थिति को संभालने के लिए रायगढ़ कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी, विधायक विद्यावती सिदार और पुलिस अधीक्षक खुद मौके पर पहुंचे। अधिकारियों की मौजूदगी में भीड़ ने पथराव जारी रखा। प्रशासन ने बताया कि इलाके में पुलिस बल तैनात है और स्थिति पर नियंत्रण बनाए रखा गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या पुलिस पर हमला करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।

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