रुपये को संभालने के लिए RBI का बड़ा कदम, एक दिन में 7 अरब डॉलर बेचकर बाजार में किया हस्तक्षेप

भारतीय रुपये में गिरावट को थामने के लिए RBI ने बड़ा कदम उठाया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, केंद्रीय बैंक ने एक ही दिन में करीब 7 अरब डॉलर बेचकर बाजार में हस्तक्षेप

भारतीय रुपये में लगातार कमजोरी को रोकने के लिए Reserve Bank of India (आरबीआई) ने पिछले शुक्रवार को विदेशी मुद्रा बाजार में लगभग 7 अरब डॉलर का हस्तक्षेप किया। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह कई महीनों में एक दिन के भीतर किया गया सबसे बड़ा हस्तक्षेप माना जा रहा है।

Rupee vs Dollar: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रुपये पर बढ़ते दबाव को कम करने और विदेशी मुद्रा बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए बड़ा कदम उठाया है। रिपोर्टों के अनुसार, केंद्रीय बैंक ने पिछले सप्ताह एक ही दिन में लगभग 7 अरब अमेरिकी डॉलर की बिक्री कर बाजार में हस्तक्षेप किया। इसे हाल के महीनों में RBI द्वारा किया गया सबसे बड़ा एकदिवसीय विदेशी मुद्रा हस्तक्षेप माना जा रहा है।

यह कदम ऐसे समय उठाया गया जब भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब पहुंच गया था। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और डॉलर की मजबूती के कारण भारतीय मुद्रा पर दबाव लगातार बढ़ रहा था।

रुपये पर क्यों बढ़ा दबाव?

भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातक देशों में शामिल है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने से आयात बिल बढ़ता है, जिससे डॉलर की मांग में वृद्धि होती है। जब डॉलर की मांग बढ़ती है और विदेशी निवेश प्रवाह अपेक्षाकृत कमजोर रहता है, तब स्थानीय मुद्रा पर दबाव पड़ता है। हाल के सप्ताहों में यही स्थिति देखने को मिली। 

विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की मजबूती और वैश्विक निवेशकों की सतर्कता के कारण रुपया लगातार कमजोर होता गया। इसी दबाव को कम करने के लिए RBI ने बाजार में डॉलर बेचकर रुपये को समर्थन देने का फैसला किया।

ऑनशोर और ऑफशोर बाजारों में हस्तक्षेप

बाजार सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय बैंक ने केवल घरेलू (ऑनशोर) विदेशी मुद्रा बाजार में ही नहीं, बल्कि ऑफशोर बाजार में भी सक्रिय हस्तक्षेप किया। इसका उद्देश्य रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोकना और निवेशकों के बीच विश्वास बनाए रखना था। विशेषज्ञों का मानना है कि जब कोई केंद्रीय बैंक विदेशी मुद्रा बाजार में बड़े पैमाने पर डॉलर बेचता है, तो बाजार में डॉलर की उपलब्धता बढ़ती है। इससे डॉलर की कीमत पर दबाव पड़ता है और स्थानीय मुद्रा को मजबूती मिलने में मदद मिलती है।

RBI ने इस हस्तक्षेप को लेकर आधिकारिक रूप से कोई विस्तृत टिप्पणी नहीं की है, लेकिन बाजार सहभागियों का कहना है कि केंद्रीय बैंक की मौजूदगी स्पष्ट रूप से महसूस की गई।

रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब पहुंचा था रुपया

हाल के कारोबारी सत्रों में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले काफी कमजोर हुआ था। बाजार में यह आशंका बढ़ रही थी कि भारतीय मुद्रा फिर से अपने ऐतिहासिक निचले स्तर के करीब पहुंच सकती है। विश्लेषकों के अनुसार, मुद्रा बाजार में अत्यधिक अस्थिरता निवेशकों की भावना को प्रभावित कर सकती है। इसलिए केंद्रीय बैंक आमतौर पर ऐसे समय हस्तक्षेप करता है जब विनिमय दर में तेज और असामान्य उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। RBI के हस्तक्षेप के बाद रुपये में कुछ मजबूती दर्ज की गई और बाजार को यह संकेत मिला कि केंद्रीय बैंक मुद्रा की अत्यधिक कमजोरी को लेकर सतर्क है।

विदेशी मुद्रा भंडार ने बढ़ाई RBI की ताकत

रुपये को समर्थन देने में भारत के मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हाल के सप्ताहों में देश के विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे RBI को बाजार में हस्तक्षेप करने के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हुए हैं। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने हाल ही में बताया था कि पूंजी प्रवाह को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए कदमों को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। बैंकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा बड़ी मात्रा में विदेशी पूंजी जुटाने से देश के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती मिली है।

विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि किसी भी केंद्रीय बैंक के लिए महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि इससे वह जरूरत पड़ने पर अपनी मुद्रा को स्थिर रखने के लिए बाजार में प्रभावी हस्तक्षेप कर सकता है।

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