मंत्री रेखा आर्य ने हरकी पैड़ी से उठाई कांवड़ 22 KM पैदल चलकर ऋषिकेश में किया रुद्राभिषेक, 4 करोड़ कांवड़िए जल लेकर लौटे

उत्तराखंड की मंत्री रेखा आर्य ने हरकी पैड़ी से कांवड़ उठाकर 22 KM पैदल ऋषिकेश तक यात्रा की। उन्होंने रुद्राभिषेक किया, करोड़ों कांवड़िए लौटे।
मंत्री रेखा आर्य ने हरकी पैड़ी से उठाई कांवड़ 22 KM पैदल चलकर ऋषिकेश में किया रुद्राभिषेक, 4 करोड़ कांवड़िए जल लेकर लौटे
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उत्तराखंड में सावन के दौरान चल रही कांवड़ यात्रा के बीच खेल मंत्री रेखा आर्य ने भी हरकी पैड़ी से कांवड़ उठाकर अपनी धार्मिक यात्रा शुरू की। उन्होंने हरिद्वार से ऋषिकेश तक करीब 22 किलोमीटर की दूरी पैदल तय की। इस यात्रा का उद्देश्य केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा नहीं था, बल्कि 2036 ओलंपिक की मेजबानी भारत को मिले, इस संकल्प को भी इससे जोड़ा गया था। रेखा आर्य ने यात्रा के दौरान कांवड़ लेकर पैदल चलने के बाद ऋषिकेश में भगवान शिव का रुद्राभिषेक किया। यात्रा को लेकर पहले ही जानकारी सामने आई थी कि यह 10 अगस्त से शुरू होगी। 

हरकी पैड़ी से कांवड़ उठाने के दौरान धार्मिक माहौल देखने को मिला। गंगा स्नान और पूजा-अर्चना के बाद कांवड़ में गंगाजल लेकर रेखा आर्य ऋषिकेश की ओर रवाना हुईं। उनके साथ संत समाज के प्रमुख लोगों के शामिल होने की भी जानकारी सामने आई थी। इस यात्रा में महंत हरि गिरि और रवींद्र पुरी के शामिल होने की बात कही गई थी। 

रेखा आर्य की इस कांवड़ यात्रा को 2036 ओलंपिक की मेजबानी के संकल्प से जोड़कर देखा गया। उन्होंने इससे पहले कहा था कि भारत को 2036 ओलंपिक की मेजबानी मिले, इसी संकल्प के साथ वह हरिद्वार से ऋषिकेश तक पैदल कांवड़ यात्रा करेंगी। धार्मिक आस्था और खेलों के माध्यम से राष्ट्र निर्माण का संदेश इस यात्रा का प्रमुख उद्देश्य बताया गया था। 

हरिद्वार से ऋषिकेश तक करीब 22 किलोमीटर की दूरी पैदल तय करना कांवड़ यात्रा की परंपरा से भी जुड़ा है। सावन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार और आसपास के क्षेत्रों से गंगाजल लेकर अपने-अपने गंतव्य की ओर रवाना होते हैं। कांवड़िए पैदल यात्रा करते हुए शिव मंदिरों में पहुंचकर गंगाजल से भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं।

इस वर्ष भी हरिद्वार में कांवड़ियों की भारी भीड़ देखने को मिली। सावन की समाप्ति और शिवरात्रि के आसपास हरकी पैड़ी समेत प्रमुख घाटों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक शिवरात्रि के मौके पर हरिद्वार में लाखों कांवड़ियों की मौजूदगी रही और प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की। 

हरकी पैड़ी से लेकर ऋषिकेश तक कांवड़ियों के जत्थे लगातार नजर आए। भगवा कपड़ों में श्रद्धालु, कंधों पर सजी कांवड़ और हाथों में गंगाजल लेकर शिवभक्त बोल बम और हर-हर महादेव के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ते रहे। कई स्थानों पर स्थानीय लोगों और स्वयंसेवी संगठनों ने कांवड़ियों की सेवा के लिए पानी, भोजन और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था की।

कांवड़ यात्रा के दौरान हरिद्वार और ऋषिकेश के बीच बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही रहती है। इस कारण प्रशासन की ओर से यातायात और सुरक्षा को लेकर विशेष इंतजाम किए जाते हैं। प्रमुख घाटों और मार्गों पर निगरानी बढ़ाई जाती है तथा भीड़ वाले स्थानों पर पुलिस बल तैनात किया जाता है। हालिया रिपोर्ट के अनुसार हरिद्वार में कांवड़ियों की भारी भीड़ को देखते हुए सीसीटीवी और ट्रैफिक व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया। 

रेखा आर्य की यात्रा के बाद ऋषिकेश पहुंचकर रुद्राभिषेक किए जाने को धार्मिक यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव माना गया। कांवड़ में लाए गए गंगाजल को भगवान शिव को अर्पित किया गया। रुद्राभिषेक के दौरान भगवान शिव की पूजा-अर्चना की गई और देश के विकास, खेलों में सफलता तथा 2036 ओलंपिक की मेजबानी के संकल्प के साथ प्रार्थना की गई।

इस यात्रा में धार्मिक आस्था के साथ खेलों को जोड़ने की कोशिश भी नजर आई। खेल मंत्री होने के नाते रेखा आर्य ने 2036 ओलंपिक की मेजबानी के लिए भारत के प्रयासों को इस धार्मिक यात्रा के माध्यम से जनभावना से जोड़ने का संदेश दिया। इससे पहले सामने आई जानकारी में भी यात्रा को राष्ट्र निर्माण के संकल्प से जोड़कर बताया गया था। 

हरिद्वार में इस बार कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या बेहद अधिक रही। अलग-अलग राज्यों से शिवभक्त गंगाजल लेने पहुंचे। कांवड़िए हरकी पैड़ी और आसपास के घाटों से जल भरकर अपने शहरों और गांवों की ओर लौटे। रिपोर्ट में हरिद्वार से करीब 4 करोड़ कांवड़ियों के जल लेकर लौटने का दावा किया गया है।

कांवड़ यात्रा के दौरान हरिद्वार का पूरा क्षेत्र शिवभक्ति में डूबा नजर आया। सड़कों पर कांवड़ियों के जत्थे, जगह-जगह सेवा शिविर और लगातार गूंजते धार्मिक जयकारे इस धार्मिक आयोजन की पहचान बने रहे। कांवड़ मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं को भी सक्रिय रखा गया।

हरकी पैड़ी से कांवड़ उठाने के बाद पैदल ऋषिकेश जाने का फैसला भी रेखा आर्य के लिए व्यक्तिगत धार्मिक आस्था से जुड़ा रहा। कांवड़ यात्रा में पैदल चलने और गंगाजल को कंधे पर लेकर शिवधाम तक पहुंचाने की परंपरा का विशेष महत्व है। इसी परंपरा के तहत उन्होंने भी कांवड़ लेकर पैदल यात्रा पूरी की।

यात्रा के दौरान कांवड़ियों की भीड़ के बीच रेखा आर्य के शामिल होने से यह यात्रा राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा में रही। हालांकि उन्होंने इसे मुख्य रूप से धार्मिक आस्था और देश के लिए संकल्प से जुड़ी यात्रा के तौर पर प्रस्तुत किया।

उत्तराखंड में कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा फायदा होता है। हरिद्वार, ऋषिकेश और आसपास के क्षेत्रों में होटल, धर्मशाला, खानपान, परिवहन, पूजा सामग्री और छोटे कारोबार से जुड़े लोगों को इस दौरान बड़ी संख्या में ग्राहक मिलते हैं।

कांवड़ियों की भारी संख्या के कारण प्रशासन के सामने यातायात व्यवस्था बनाए रखना भी बड़ी चुनौती रहती है। कई मार्गों पर सामान्य यातायात को नियंत्रित किया जाता है और कांवड़ियों के लिए अलग व्यवस्था की जाती है। हरिद्वार पुलिस ने भीड़ को देखते हुए अतिरिक्त बल की तैनाती और रोटेशन के आधार पर पुलिसकर्मियों की ड्यूटी जैसी व्यवस्थाएं की थीं। 

हरिद्वार से लौटते कांवड़ियों के साथ इस बार भी बड़ी संख्या में परिवार और समूह दिखाई दिए। कुछ श्रद्धालु वर्षों से इस यात्रा की परंपरा निभा रहे हैं, जबकि कई युवा पहली बार कांवड़ यात्रा में शामिल हुए। शिवभक्ति के साथ अनुशासन और सेवा भावना भी इस पूरे आयोजन का अहम हिस्सा रही।

रेखा आर्य की 22 किलोमीटर की यात्रा के दौरान भी यही धार्मिक माहौल दिखाई दिया। हरकी पैड़ी से गंगाजल लेकर शुरू हुई यात्रा ऋषिकेश में भगवान शिव के रुद्राभिषेक के साथ पूरी हुई। इस दौरान 2036 ओलंपिक की मेजबानी भारत को मिलने का संकल्प भी प्रमुख रूप से सामने रहा।

कांवड़ यात्रा के दौरान संत समाज की मौजूदगी ने भी इस पहल को धार्मिक महत्व दिया। यात्रा से पहले सामने आई जानकारी में महंत हरि गिरि और रवींद्र पुरी के इसमें शामिल होने की बात कही गई थी। इससे यात्रा को धार्मिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर समर्थन मिलने की तस्वीर सामने आई। 

फिलहाल हरिद्वार से कांवड़ियों की वापसी का सिलसिला जारी है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपने-अपने गंतव्य की ओर लौट चुके हैं। हरिद्वार में कांवड़ यात्रा के दौरान उमड़ी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात और निगरानी की व्यवस्था को लगातार सक्रिय रखा।

कुल मिलाकर, उत्तराखंड की खेल मंत्री रेखा आर्य ने हरकी पैड़ी से कांवड़ उठाकर करीब 22 किलोमीटर की पैदल यात्रा की और ऋषिकेश पहुंचकर रुद्राभिषेक किया। उनकी यह यात्रा 2036 ओलंपिक की मेजबानी भारत को मिलने के संकल्प से जुड़ी रही। वहीं सावन के दौरान हरिद्वार में करोड़ों कांवड़ियों की मौजूदगी ने पूरे क्षेत्र को शिवमय कर दिया। प्रशासन के लिए इतनी बड़ी भीड़ को सुरक्षित तरीके से संभालना बड़ी चुनौती रही, लेकिन सुरक्षा और यातायात व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखी गई

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