रीवा के गोविंदगढ़ तालाब में जलस्तर और गहराई की ड्रोन मैपिंग के दौरान विशाल मगरमच्छ कैमरे में कैद हुआ। ग्रामीणों का दावा है कि तालाब में 1000 से अधिक मगरमच्छ मौजूद हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
रीवा: ऐतिहासिक गोविंदगढ़ तालाब में जलस्तर और गहराई का सर्वे करने के दौरान ड्रोन कैमरे में एक विशाल मगरमच्छ दिखाई दिया। पानी की सतह पर तैरते मगरमच्छ का फुटेज सामने आने के बाद स्थानीय लोगों के बीच चर्चा तेज हो गई। ग्रामीण लंबे समय से तालाब में बड़ी संख्या में मगरमच्छ होने का दावा करते रहे हैं, हालांकि 1000 से अधिक मगरमच्छों की संख्या की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
ड्रोन सर्वे के दौरान दिखा विशाल मगरमच्छ
गोविंदगढ़ तालाब के जलभराव क्षेत्र और गहराई की जानकारी जुटाने के लिए ड्रोन को पानी के ऊपर उड़ाया जा रहा था। इसी दौरान पानी की सतह पर हलचल नजर आई। कैमरे की फुटेज को देखने पर कई फीट लंबा मगरमच्छ तैरता हुआ दिखाई दिया।
तालाब में मगरमच्छ दिखाई देने की यह घटना स्थानीय लोगों के लिए नई नहीं है। आसपास रहने वाले ग्रामीणों का कहना है कि यहां लंबे समय से मगरमच्छ देखे जाते रहे हैं। हालांकि ड्रोन फुटेज में एक मगरमच्छ दिखाई देने से तालाब में मौजूद कुल मगरमच्छों की संख्या निर्धारित नहीं की जा सकती।
ग्रामीणों का दावा, तालाब में 1000 से ज्यादा मगरमच्छ
स्थानीय ग्रामीणों का दावा है कि गोविंदगढ़ तालाब में 1000 से अधिक मगरमच्छ मौजूद हो सकते हैं। उनका कहना है कि तालाब का क्षेत्र काफी बड़ा है और कई हिस्सों में घनी जलकुंभी होने के कारण मगरमच्छ आसानी से नजर नहीं आते।
ग्रामीणों के अनुसार, कई बार मगरमच्छ तालाब के किनारे आकर धूप सेंकते हुए भी दिखाई देते हैं। इस वजह से आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों को तालाब के किनारे जाते समय सावधानी बरतनी पड़ती है।
हालांकि ग्रामीणों द्वारा बताई जा रही संख्या काफी बड़ी है, लेकिन उपलब्ध जानकारी के आधार पर 1000 से अधिक मगरमच्छों की संख्या की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसके लिए वन विभाग या विशेषज्ञों की ओर से विस्तृत सर्वे की आवश्यकता होगी।
गोविंदगढ़ का ऐतिहासिक महत्व
गोविंदगढ़ तालाब केवल जलीय जीवों की मौजूदगी के कारण महत्वपूर्ण नहीं है। इसका संबंध रीवा रियासत के इतिहास से भी रहा है। गोविंदगढ़ कभी रीवा रियासत की ग्रीष्मकालीन राजधानी के रूप में जाना जाता था।
19वीं सदी में रीवा के महाराजाओं के शासनकाल में यहां तालाब और गोविंदगढ़ महल का विकास हुआ। ऐतिहासिक विरासत के साथ प्राकृतिक सुंदरता के कारण यह इलाका लंबे समय से लोगों और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहा है।
ड्रोन सर्वे के दौरान सामने आए मगरमच्छ के फुटेज ने गोविंदगढ़ तालाब को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। अब सर्वे के जरिए तालाब की गहराई और जलभराव क्षेत्र की स्थिति के साथ यहां मौजूद जलीय जीवों की वास्तविक स्थिति भी सामने आने की उम्मीद है।













