रुद्रपुर में साइबर ठगी से जुड़े दो म्यूल अकाउंट का खुलासा, खाताधारकों पर केस दर्ज

रुद्रपुर में साइबर ठगी से जुड़े दो म्यूल अकाउंट का खुलासा हुआ है। I4C पोर्टल की शिकायतों के आधार पर पुलिस ने खाताधारकों पर केस दर्ज कर जांच शुरू की।

रुद्रपुर में साइबर ठगी से जुड़े दो संदिग्ध म्यूल अकाउंट का खुलासा हुआ है। गृह मंत्रालय के I4C पोर्टल पर मिली शिकायतों के बाद पुलिस ने दोनों खाताधारकों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

रुद्रपुर: उत्तराखंड के रुद्रपुर में साइबर ठगी के लिए इस्तेमाल किए जा रहे दो म्यूल अकाउंट का खुलासा हुआ है। गृह मंत्रालय के I4C पोर्टल पर मिली शिकायतों के आधार पर पुलिस ने जांच की, जिसमें संदिग्ध लेनदेन और कई राज्यों से ऑनलाइन ठगी की शिकायतें सामने आने के बाद दोनों खाताधारकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई।

I4C पोर्टल की शिकायतों से सामने आए संदिग्ध बैंक खाते

उत्तराखंड के रुद्रपुर में साइबर अपराध के खिलाफ कार्रवाई के दौरान पुलिस ने दो ऐसे बैंक खातों की पहचान की है, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर ऑनलाइन ठगी से प्राप्त रकम को जमा करने और आगे ट्रांसफर करने के लिए किया जा रहा था। गृह मंत्रालय के इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) के समन्वय पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों के आधार पर साइबर सेल ने जांच शुरू की। जांच में दोनों खातों में संदिग्ध वित्तीय लेनदेन और विभिन्न राज्यों से साइबर धोखाधड़ी की शिकायतें सामने आईं।

पहले खाते में कई राज्यों से मिलीं शिकायतें

पहले मामले में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की आवास विकास शाखा में खोले गए एक बैंक खाते की जांच की गई। पुलिस के अनुसार यह खाता एक अप्रैल 2026 को खोला गया था। जांच में पता चला कि चार अप्रैल से 18 जून 2026 के बीच इस खाते में यूपीआई के माध्यम से बड़ी संख्या में संदिग्ध लेनदेन हुए।

राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर इस खाते के खिलाफ उत्तराखंड, महाराष्ट्र, हरियाणा और अरुणाचल प्रदेश सहित कई राज्यों से ऑनलाइन ठगी की शिकायतें दर्ज थीं। उपलब्ध दस्तावेजों और लेनदेन के आधार पर पुलिस ने इसे कथित म्यूल अकाउंट के रूप में इस्तेमाल किया जाना पाया।

दूसरे खाते से भी निकली संदिग्ध रकम

दूसरे मामले में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के एक खाते की जांच की गई। पुलिस के अनुसार इस खाते के खिलाफ महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और गुजरात से साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायतें दर्ज थीं। जांच में सामने आया कि खाते से लगभग 1.98 लाख रुपये की विवादित राशि विभिन्न माध्यमों से निकाली गई थी।

पुलिस को आशंका है कि इस खाते का उपयोग भी साइबर अपराध से प्राप्त धनराशि को प्राप्त करने और आगे भेजने के लिए किया जा रहा था। दोनों मामलों में संबंधित बैंकों से खाते से जुड़े दस्तावेज और लेनदेन का पूरा रिकॉर्ड मंगाकर जांच की गई।

दोनों खाताधारकों पर दर्ज हुई प्राथमिकी

पुलिस ने दोनों खाताधारकों के खिलाफ संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली है और मामले की विस्तृत विवेचना शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान पूरे नेटवर्क की पड़ताल की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इन खातों के जरिए साइबर ठगी का संचालन किन लोगों द्वारा किया जा रहा था।

सीओ सिटी विभव सैनी ने बताया कि जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में खाताधारकों की संलिप्तता की पुष्टि होती है तो उनकी गिरफ्तारी भी की जाएगी। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी व्यक्ति के कहने पर अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड या बैंकिंग विवरण किसी अन्य को इस्तेमाल के लिए न दें, क्योंकि ऐसा करना उन्हें भी साइबर अपराध के मामलों में कानूनी कार्रवाई के दायरे में ला सकता है।

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