रॉयल नीदरलैंड्स नौसेना का अत्याधुनिक युद्धपोत HNLMS डी रूयटर (F804) भारत के कोच्चि बंदरगाह पर पहुंचा है। यह युद्धपोत डी जेवेन प्रोविन्सियन श्रेणी का आधुनिक फ्रिगेट है और वर्तमान में पांच महीने की लंबी इंडो-पैसिफिक तैनाती पर है।
नई दिल्ली: HNLMS De Ruyter (F804), जो Royal Netherlands Navy का अत्याधुनिक युद्धपोत है, भारत पहुंच गया है। यह डी जेवेन प्रोविन्सियन श्रेणी का एक आधुनिक फ्रिगेट है, जिसे उन्नत समुद्री सुरक्षा और निगरानी क्षमताओं के लिए जाना जाता है। यह युद्धपोत Kochi के समुद्री तट पर पहुंचा, जहां इसके आगमन के साथ ही द्विपक्षीय नौसैनिक सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। इस दौरे के दौरान रॉयल नीदरलैंड्स नौसेना के उप कमांडर मेजर जनरल (रॉयल मरीन्स) Rob de Witt भी कोच्चि में मौजूद हैं।
उच्चस्तरीय डच प्रतिनिधिमंडल भी भारत में मौजूद
इस यात्रा के दौरान रॉयल नीदरलैंड्स नौसेना के उप कमांडर मेजर जनरल (रॉयल मरीन्स) रॉब डी विट भी कोच्चि में मौजूद हैं। उनके साथ नीदरलैंड्स की राजदूत मारिसा गेरार्ड्स के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है। यह प्रतिनिधिमंडल दक्षिणी नौसैनिक कमान, कोच्चि के साथ रणनीतिक और परिचालन सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से विभिन्न बैठकों और गतिविधियों में भाग ले रहा है।
नीदरलैंड्स के राष्ट्रीय स्मरण दिवस के अवसर पर मेजर जनरल रॉब डी विट और राजदूत मारिसा गेरार्ड्स ने दक्षिणी नौसैनिक कमान के युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस दौरान दोनों देशों के अधिकारियों ने शहीदों को श्रद्धांजलि दी। यह क्षण सम्मान और भावनाओं से भरा हुआ रहा, जिसने भारत और नीदरलैंड्स के बीच आपसी सम्मान को और मजबूत किया।

भारत-नीदरलैंड्स समुद्री साझेदारी को नई मजबूती
यह दौरा भारत और नीदरलैंड्स के बीच बढ़ते समुद्री सहयोग का प्रतीक माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग को लेकर लगातार संवाद बढ़ रहा है। मेजर जनरल रॉब डी विट इससे पहले फरवरी 2026 में विशाखापत्तनम में आयोजित मिलन-26 और इंडियन ओशन नेवल संगोष्ठी में भी भाग ले चुके हैं।
इस बार कोच्चि दौरे के दौरान उन्होंने दक्षिणी नौसैनिक कमान के चीफ ऑफ स्टाफ रियर एडमिरल प्रकाश गोपालन से मुलाकात की। दोनों पक्षों ने समुद्री सहयोग, संयुक्त प्रशिक्षण और सर्वोत्तम नौसैनिक प्रथाओं के आदान-प्रदान पर चर्चा की। प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय नौसेना के विभिन्न प्रशिक्षण संस्थानों का दौरा किया, जहां उन्होंने आधुनिक सिमुलेटर और उन्नत प्रशिक्षण सुविधाओं का अवलोकन किया।
इसके अलावा, डच प्रतिनिधिमंडल ने कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड का भी दौरा किया। यहां उन्होंने भारत की जहाज निर्माण क्षमताओं और रक्षा उत्पादन क्षेत्र में संभावित सहयोग की संभावनाओं को समझा।









