समस्तीपुर में दंगल का रोमांच: महिला पहलवानों ने दिखाया दमखम, बिहार की पूजा ने यूपी की नीतू को किया चित

समस्तीपुर में दंगल के अखाड़े में महिला पहलवानों ने शानदार प्रदर्शन किया। बिहार की पूजा ने यूपी की नीतू को हराया, वहीं अमरीश पुरी ने शक्ति कपूर को मात दी

समस्तीपुर जिले में आयोजित पारंपरिक दंगल प्रतियोगिता इस बार खास चर्चा में रही, जहां महिला और पुरुष पहलवानों ने अपने दमखम से दर्शकों का दिल जीत लिया। दंगल के अखाड़े में दूर-दराज के राज्यों से आए पहलवानों ने शिरकत की और रोमांचक मुकाबलों ने पूरे माहौल को जोश से भर दिया। खास बात यह रही कि महिला पहलवानों ने भी पूरी ताकत और आत्मविश्वास के साथ मुकाबला करते हुए यह साबित कर दिया कि वे किसी से कम नहीं हैं।

महिला वर्ग के सबसे चर्चित मुकाबले में बिहार की पूजा और उत्तर प्रदेश की नीतू आमने-सामने थीं। दोनों पहलवानों के बीच मुकाबला शुरू से ही कड़ा रहा। कई मिनट तक चले संघर्ष में दोनों ने एक-दूसरे को चित करने की भरपूर कोशिश की। दर्शकों की निगाहें अखाड़े पर टिकी रहीं और तालियों व नारों से माहौल गूंजता रहा। अंततः बिहार की पूजा ने शानदार दांव-पेंच का प्रदर्शन करते हुए यूपी की नीतू को चित कर दिया। पूजा की इस जीत पर स्थानीय दर्शकों में खासा उत्साह देखने को मिला और लोगों ने जमकर तालियां बजाकर उनका हौसला बढ़ाया।

वहीं पुरुष वर्ग के मुकाबले में झारखंड के अमरीश पुरी और हरिद्वार के शक्ति कपूर के बीच जोरदार भिड़ंत देखने को मिली। दोनों पहलवानों ने अपनी ताकत, तकनीक और अनुभव का भरपूर प्रदर्शन किया। मुकाबला काफी देर तक चला और कई बार दोनों पहलवान एक-दूसरे पर भारी पड़ते नजर आए। अंत में झारखंड के अमरीश पुरी ने सूझबूझ और दमदार रणनीति के साथ हरिद्वार के शक्ति कपूर को शिकस्त दी। इस मुकाबले ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा।

दंगल आयोजन स्थल पर बड़ी संख्या में ग्रामीण और आसपास के इलाकों से आए लोग मौजूद रहे। ढोल-नगाड़ों और उद्घोषणा के बीच अखाड़े का माहौल पूरी तरह से मेले जैसा नजर आ रहा था। आयोजकों ने बताया कि इस तरह के दंगल का उद्देश्य पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देना और युवा पीढ़ी को कुश्ती जैसे खेलों के प्रति प्रेरित करना है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि महिला पहलवानों की भागीदारी ने इस दंगल को और खास बना दिया। महिलाओं ने जिस आत्मविश्वास और ताकत के साथ मुकाबला किया, उसने समाज में खेलों के प्रति सकारात्मक संदेश दिया है। आयोजकों ने विजेता पहलवानों को सम्मानित किया और भविष्य में ऐसे और बड़े दंगल आयोजित करने की बात कही।

कुल मिलाकर, समस्तीपुर का यह दंगल रोमांच, परंपरा और खेल भावना का शानदार उदाहरण बना, जहां महिला और पुरुष पहलवानों ने अपनी प्रतिभा से साबित कर दिया कि अखाड़े में असली जीत मेहनत, हौसले और जुनून की होती है।

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