ग्रीनलैंड को लेकर डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद अमेरिका-यूरोप संबंधों में तनाव बढ़ गया है। NATO प्रमुख मार्क रूट्टे ने कहा कि अमेरिकी सैन्य समर्थन के बिना यूरोप अपनी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर सकता।
America: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के ग्रीनलैंड पर कब्जे को लेकर दिए गए बयानों के बाद अमेरिका और यूरोप के रिश्तों में तनाव साफ दिखाई देने लगा है। दशकों से चले आ रहे ट्रांस-अटलांटिक संबंधों में पहली बार इतनी खुली असहजता देखी जा रही है। कई यूरोपीय देशों ने ट्रंप के इस प्रस्ताव को सीधे तौर पर खारिज कर दिया है। इसी पृष्ठभूमि में नाटो (NATO) प्रमुख मार्क रूट्टे का बयान सामने आया है, जिसने यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ दी है।
NATO चीफ मार्क रूट्टे का दो टूक बयान
नाटो महासचिव मार्क रूट्टे ने साफ शब्दों में कहा है कि अमेरिका की सैन्य मदद के बिना यूरोप अपनी सुरक्षा नहीं कर सकता। उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी को लगता है कि यूरोपीय यूनियन या पूरा यूरोप अकेले अपनी रक्षा कर सकता है, तो यह एक भ्रम है।
मार्क रूट्टे के मुताबिक यूरोप और अमेरिका दोनों को एक-दूसरे की जरूरत है। उनका कहना है कि मौजूदा हालात में यूरोप को अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए कहीं ज्यादा निवेश करना होगा।
रक्षा बजट बढ़ाने की सख्त सलाह

नाटो प्रमुख ने यूरोपीय देशों को अपनी रक्षा खर्च नीति पर गंभीरता से विचार करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि केवल नीतिगत बयान देने से काम नहीं चलेगा। यूरोप को अपना रक्षा बजट कम से कम दोगुना करना होगा।
रूट्टे ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर यूरोपीय देश अपनी जीडीपी का 5 प्रतिशत हिस्सा भी रक्षा पर खर्च करते हैं, तब भी वे अमेरिका की सैन्य ताकत की बराबरी नहीं कर पाएंगे। उनके अनुसार, अमेरिका के बराबर पहुंचने के लिए यूरोप को अपनी जीडीपी का लगभग 10 प्रतिशत रक्षा क्षेत्र में लगाना पड़ेगा।
NATO सम्मेलन में क्या तय हुआ था
जुलाई 2025 में हेग में आयोजित नाटो सम्मेलन में सदस्य देशों ने एक अहम फैसला लिया था। इस बैठक में सभी देशों ने अपनी जीडीपी का 3.5 प्रतिशत हिस्सा रक्षा पर खर्च करने का संकल्प लिया था।
इसके साथ ही यह लक्ष्य भी तय किया गया था कि वर्ष 2035 तक रक्षा बजट को बढ़ाकर 5 प्रतिशत किया जाएगा। हालांकि मार्क रूट्टे का मानना है कि यह लक्ष्य भी यूरोप को आत्मनिर्भर सुरक्षा शक्ति नहीं बना पाएगा।
अमेरिका की सैन्य ताकत से तुलना
मार्क रूट्टे ने अपने बयान में यह भी कहा कि अमेरिका दशकों से यूरोप की सुरक्षा की रीढ़ रहा है। अमेरिकी सेना की मौजूदगी और तकनीकी बढ़त के बिना यूरोप खुद को सुरक्षित नहीं रख सकता।
उन्होंने माना कि यूरोप को अब अपनी जिम्मेदारी खुद उठानी होगी, लेकिन यह भी स्वीकार किया कि अमेरिका की बराबरी करना आसान नहीं है। इसके लिए यूरोप को रक्षा उद्योग, आधुनिक हथियार प्रणालियों और परमाणु क्षमता पर भारी निवेश करना होगा।
परमाणु क्षमता पर इशारा
नाटो प्रमुख ने यह भी संकेत दिया कि यूरोप को अपनी सुरक्षा के लिए परमाणु क्षमता पर गंभीरता से विचार करना होगा। इसके लिए अरबों यूरो खर्च करने की जरूरत पड़ेगी।

उनका कहना है कि मौजूदा वैश्विक माहौल में केवल पारंपरिक हथियारों के भरोसे सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती। यूरोप को दीर्घकालिक रणनीति बनानी होगी।
ग्रीनलैंड विवाद की जड़
डोनल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड पर कब्जे की इच्छा जाहिर करने के बाद यह विवाद गहराया है। ग्रीनलैंड नाटो सदस्य देश डेनमार्क का हिस्सा है। ऐसे में ट्रंप का यह बयान नाटो के भीतर ही सवाल खड़े कर रहा है।
अमेरिका भी नाटो का प्रमुख सदस्य है और संगठन में उसकी भूमिका सबसे प्रभावशाली मानी जाती है। नाटो में कुल 32 देश शामिल हैं और सभी की सुरक्षा एक-दूसरे से जुड़ी हुई है।
ट्रंप की टैरिफ धमकी
ग्रीनलैंड मुद्दे पर ट्रंप यहीं नहीं रुके। उन्होंने उन यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी भी दी, जो उनके ग्रीनलैंड प्लान का समर्थन नहीं कर रहे हैं। इससे यूरोप में यह चिंता बढ़ गई है कि अमेरिका अब अपने पुराने सहयोगियों पर आर्थिक दबाव बनाने से भी पीछे नहीं हटेगा।
NATO अनुच्छेद 5 पर सवाल
नाटो का अनुच्छेद 5 यह कहता है कि किसी एक सदस्य देश पर हमला, सभी सदस्य देशों पर हमला माना जाएगा। यही नाटो की सबसे बड़ी ताकत है।
लेकिन ग्रीनलैंड विवाद ने इस सिद्धांत पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर नाटो का ही एक सदस्य दूसरे सदस्य के क्षेत्र पर दावा करे, तो संगठन की एकजुटता कैसे बनी रहेगी, यह बड़ा सवाल बन गया है।










