Sanwaliya Seth Donation: पांचवें राउंड में 40 करोड़ पार, सोना-चांदी की गणना बाकी, क्या 100 करोड़ छुएगा सांवलिया सेठ का खजाना?

Sanwaliya Seth Donation: पांचवें राउंड में 40 करोड़ पार, सोना-चांदी की गणना बाकी, क्या 100 करोड़ छुएगा सांवलिया सेठ का खजाना?

राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में मंडफिया स्थित विश्व प्रसिद्ध धार्मिक स्थल और मेवाड़ की आस्था के केंद्र, श्री सांवलियाजी मंदिर के भंडार में इस बार दो माह बाद शुरू हुई रुपयों की गिनती का क्रम लगातार जारी है।

चित्तौड़गढ़: राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के मंडफिया स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री सांवलियाजी मंदिर से इस बार आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा है, जिसने अब तक के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। दो महीने बाद खुले मंदिर के दान भंडार से अब तक नकद चढ़ावे की राशि 40 करोड़ रुपये के पार पहुंच चुकी है, जबकि सोने-चांदी की गिनती अभी शेष है। ऐसे में यह अनुमान लगाया जा रहा है कि इस बार सांवलिया सेठ का कुल खजाना ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच सकता है।

मंदिर प्रशासन द्वारा गिनती के अब तक पांच राउंड पूरे हो चुके हैं, लेकिन नोट गिनने वाली मशीनें अब भी थमने का नाम नहीं ले रही हैं। केवल पांचवें चरण में ही 4 करोड़ 19 लाख 79 हजार रुपये की नकद राशि निकली है। इसके साथ ही अब तक कुल 40 करोड़ 33 लाख 39 हजार रुपये नकद चढ़ावे के रूप में प्राप्त हो चुके हैं।

दो महीने बाद खुला भंडार, नोटों की “बरसात” से हर कोई हैरान

दो महीने के अंतराल के बाद जब श्री सांवलियाजी मंदिर का भंडार खोला गया, तो पहले ही दिन आस्था की ताकत ने सभी को चौंका दिया। मंदिर मंडल की मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रभा गौतम के अनुसार, पहले ही दिन 12 करोड़ 35 लाख रुपये गिने गए। इसके बाद:

  • दूसरा राउंड: 8 करोड़ 54 लाख रुपये
  • तीसरा राउंड: 7 करोड़ 8 लाख 80 हजार रुपये
  • चौथा राउंड: 8 करोड़ 15 लाख रुपये
  • पांचवां राउंड: 4 करोड़ 19 लाख 79 हजार रुपये

22 और 23 नवंबर को भारी भीड़ के कारण गिनती स्थगित रही। इसके बाद फिर से प्रक्रिया शुरू की गई। हर दिन नया रिकॉर्ड बनता जा रहा है, जिससे यह साफ हो गया है कि इस बार चढ़ावे की राशि मंदिर के इतिहास में एक नया अध्याय लिख रही है। बीते वर्ष दीपावली के बाद दो महीने की गणना में श्री सांवलियाजी मंदिर को 34 करोड़ 91 लाख 95 हजार रुपये का चढ़ावा मिला था, जो उस समय तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड था। 

लेकिन इस बार केवल नकद राशि ही उस आंकड़े को पार कर चुकी है। अभी कई कट्टों में छोटे नोट, सिक्के, ऑनलाइन दान, चेक और सोने-चांदी के आभूषणों की तौल बाकी है, इसलिए अंतिम आंकड़ा और भी बड़ा हो सकता है।

क्यों बढ़ा इस बार चढ़ावा?

मंदिर मंडल अध्यक्ष हजारी दास वैष्णव के अनुसार, दीपावली पर्व के कारण पिछले दो महीनों से भंडार नहीं खोला गया था, जिससे दान पेटियों में भक्तों की आस्था लगातार जमा होती रही। इसके अलावा देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचे। भक्तों की यह मान्यता है कि सांवलिया सेठ को दिया गया दान कई गुना होकर लौटता है, और यही विश्वास इस रिकॉर्डतोड़ चढ़ावे की सबसे बड़ी वजह माना जा रहा है।

सांवलिया सेठ को केवल मेवाड़ ही नहीं, बल्कि देश और विदेश में रहने वाले करोड़ों भक्त “धन के देवता” के रूप में पूजते हैं। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि सच्चे मन से दिया गया दान जीवन में समृद्धि लाता है। यही कारण है कि सामान्य दिनों में भी हजारों भक्त रोज़ाना मंदिर पहुंचते हैं, जबकि त्योहारों के दौरान यह संख्या कई गुना बढ़ जाती है।

 

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