भारत के सबसे बड़े सरकारी बैंक State Bank of India (SBI) ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र के लिए बड़े वित्तीय समर्थन का संकेत दिया है। बैंक ने कहा है कि केंद्र सरकार की नई इमरजेंसी क्रेडिट गारंटी योजना के तहत MSME सेक्टर को 75,000 से 80,000 करोड़ रुपये तक का कर्ज उपलब्ध कराया जा सकता है।
बिजनेस न्यूज़: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब भारत के कारोबार और आर्थिक गतिविधियों पर भी दिखाई देने लगा है। ऐसे माहौल में State Bank of India (SBI) ने MSME सेक्टर को बड़ी राहत देने की तैयारी शुरू कर दी है। केंद्र सरकार की ओर से लाई जा रही नई योजना के तहत छोटे और मध्यम कारोबारियों को आसान शर्तों पर कर्ज उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि बाजार में नकदी की कमी और व्यापारिक दबाव का असर कम किया जा सके। इस पहल का उद्देश्य MSME सेक्टर को आर्थिक मजबूती देना, रोजगार बनाए रखना और कारोबार की रफ्तार को स्थिर रखना है।
MSME सेक्टर को मजबूती देने की तैयारी
वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक चुनौतियों का असर भारत के छोटे कारोबारों पर भी पड़ रहा है। ऐसे समय में केंद्र सरकार और बैंकिंग क्षेत्र MSME उद्योगों को वित्तीय सहायता देकर अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। SBI के चेयरमैन सीएस सेटी के अनुसार, बैंक की अधिकतम ऋण क्षमता ECLGS 5.0 योजना के तहत 80,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वास्तविक कर्ज वितरण इससे कम रहने की संभावना है क्योंकि फिलहाल सभी पात्र इकाइयों की ओर से मांग नहीं आई है।
क्या है ECLGS 5.0 योजना?

Emergency Credit Line Guarantee Scheme (ECLGS) भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक विशेष योजना है, जिसका उद्देश्य छोटे और मध्यम उद्योगों को आपातकालीन वित्तीय सहायता प्रदान करना है। इस योजना के तहत सरकार बैंकों को गारंटी देती है, जिससे बैंक कम जोखिम के साथ कारोबारियों को ऋण उपलब्ध करा सकें।
नई ECLGS 5.0 योजना विशेष रूप से उन MSME इकाइयों को ध्यान में रखकर बनाई गई है जो आर्थिक दबाव, नकदी संकट या बाजार में अनिश्चितता का सामना कर रही हैं।
1 करोड़ से अधिक लोगों को मिल सकता है अप्रत्यक्ष लाभ
MSME क्षेत्र भारत की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। यह सेक्टर करोड़ों लोगों को रोजगार देता है और देश के निर्यात व उत्पादन में बड़ी भूमिका निभाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि SBI और अन्य बैंक इस योजना के तहत बड़े स्तर पर कर्ज वितरित करते हैं, तो इसका फायदा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 1 करोड़ से अधिक लोगों तक पहुंच सकता है। छोटे उद्योगों को वित्तीय मदद मिलने से रोजगार सुरक्षित रखने और नए अवसर पैदा करने में सहायता मिल सकती है।
SBI के अनुसार अभी तक इस योजना के तहत लोन की मांग सीमित रही है। इसकी मुख्य वजह यह है कि योजना के विस्तृत दिशा-निर्देश पूरी तरह लागू नहीं हुए हैं। बैंक का अनुमान है कि पात्र MSME इकाइयों में से केवल 30 से 40 प्रतिशत व्यवसाय ही शुरुआती चरण में इसका लाभ उठा सकते हैं। सरकार ने सबसे खराब आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए इस योजना के तहत कुल 2.55 लाख करोड़ रुपये तक के उपयोग की संभावना जताई है।
SBI ने यह भी संकेत दिया है कि बैंकिंग उद्योग अब साइबर सुरक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े जोखिमों को गंभीरता से ले रहा है। डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर हमलों का खतरा भी बढ़ा है, जिसके चलते बैंक सुरक्षा ढांचे में निवेश बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। बैंक ने FY27 के लिए 13 से 15 प्रतिशत क्रेडिट ग्रोथ का लक्ष्य तय किया है। इसके अलावा होम लोन, गोल्ड लोन और पर्सनल लोन की मांग भी मजबूत बनी हुई है।








