भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के अध्यक्ष तुहिन कांत पांडे ने बाजार की साइबर सुरक्षा और क्वांटम कंप्यूटिंग से जुड़े संभावित जोखिमों को लेकर नियामक की चिंता जाहिर की है।
बिजनेस न्यूज़: भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने देश के वित्तीय बाजारों की साइबर सुरक्षा और क्वांटम कंप्यूटिंग से भविष्य में पैदा होने वाले जोखिमों को लेकर गंभीरता दिखाई है। सेबी के अध्यक्ष तुहिन कांत पांडे ने कहा है कि नियामक इस महत्वपूर्ण विषय पर बाजार के विभिन्न भागीदारों से लगातार संवाद कर रहा है। इसका मकसद मौजूदा साइबर सुरक्षा व्यवस्था, संभावित कमजोरियों और भविष्य की चुनौतियों को बेहतर तरीके से समझना है।
तेजी से डिजिटल होते वित्तीय बाजारों में साइबर हमलों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। शेयर बाजार, ब्रोकिंग प्लेटफॉर्म, डिपॉजिटरी, एक्सचेंज और अन्य वित्तीय संस्थान बड़ी मात्रा में संवेदनशील डेटा और डिजिटल लेनदेन को संभालते हैं। ऐसे में किसी भी तकनीकी कमजोरी का असर केवल एक संस्था तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि व्यापक बाजार व्यवस्था और निवेशकों के भरोसे को भी प्रभावित कर सकता है।
तुहिन कांत पांडे के अनुसार, सेबी की टीमें बाजार के अलग-अलग प्रतिभागियों के साथ सक्रिय रूप से जुड़कर उनकी चिंताओं और तैयारियों का आकलन कर रही हैं। नियामक को सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से भी सुझाव मिल रहे हैं, जिनका विश्लेषण किया जा रहा है। इन सभी विचारों और फीडबैक के आधार पर सेबी भविष्य की रणनीति और नियामकीय दृष्टिकोण को अंतिम रूप देने की दिशा में काम करेगा।
क्वांटम कंप्यूटिंग से क्यों बढ़ी चिंता?
सेबी प्रमुख ने क्वांटम कंप्यूटिंग को भविष्य की साइबर सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती बताया। क्वांटम तकनीक के विकसित होने के साथ वर्तमान में इस्तेमाल होने वाली कुछ पारंपरिक एन्क्रिप्शन प्रणालियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो सकते हैं। यही वजह है कि संगठनों को अभी से अपनी क्रिप्टोग्राफिक व्यवस्था की समीक्षा करने की जरूरत है।
उन्होंने इस प्रक्रिया में इन्वेंटोराइजेशन को सबसे महत्वपूर्ण शुरुआती कदम बताया। संस्थानों को यह स्पष्ट रूप से पहचानना होगा कि उनके सिस्टम में किस-किस जगह क्रिप्टोग्राफी का इस्तेमाल हो रहा है और कौन-से एन्क्रिप्शन मानक या एल्गोरिदम भविष्य में कमजोर साबित हो सकते हैं। इस विस्तृत पहचान और रिकॉर्ड को क्रिप्टोग्राफिक बिल ऑफ मैटेरियल्स के रूप में देखा जाता है।
यह प्रक्रिया संगठनों को अपनी मौजूदा डिजिटल सुरक्षा संरचना का पूरा नक्शा तैयार करने में मदद कर सकती है। इसके बाद वे संभावित जोखिम वाले सिस्टम को प्राथमिकता के आधार पर अधिक सुरक्षित तकनीकों की ओर स्थानांतरित कर सकते हैं।
पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी पर होगा जोर

भविष्य की साइबर सुरक्षा रणनीति में पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफिक मानकों की भूमिका अहम मानी जा रही है। सेबी अध्यक्ष ने संकेत दिया कि संगठनों को समय रहते ऐसे सुरक्षा मानकों को अपनाने की तैयारी करनी चाहिए, जो क्वांटम कंप्यूटिंग की उन्नत क्षमताओं से पैदा होने वाले जोखिमों का सामना कर सकें। इसके लिए केवल नई तकनीक अपनाना पर्याप्त नहीं होगा।
संस्थानों को पहले अपनी कमजोरियों का मूल्यांकन करना होगा, फिर जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान कर चरणबद्ध तरीके से सुरक्षित मानकों की ओर बढ़ना होगा। इससे भविष्य में अचानक बड़े बदलाव की जरूरत और संभावित सुरक्षा संकट को कम किया जा सकता है।
छोटे ब्रोकरों के लिए मार्केट SOC का विकल्प
साइबर सुरक्षा को मजबूत बनाने में छोटे ब्रोकर और अन्य बाजार भागीदार भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। पांडे ने कहा कि मार्केट सिक्योरिटी ऑपरेशंस सेंटर (Market SOC) के जरिए साइबर जोखिमों को कम करने में मदद मिल सकती है। इस तरह की साझा व्यवस्था का संचालन एक्सचेंज स्तर पर किया जा सकता है।
छोटे संस्थानों के पास कई बार बड़े साइबर सुरक्षा ढांचे को विकसित और संचालित करने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं होते। ऐसे में साझा सुरक्षा संचालन केंद्र संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी, संभावित खतरों की पहचान और समय पर प्रतिक्रिया में उपयोगी साबित हो सकते हैं।












