Shambhu Border बंद होने से अंबाला के कारोबारियों की बढ़ी चिंता, 2024 जैसा नुकसान दोहराने का सताने लगा डर

शंभू बॉर्डर बंद होने से अंबाला के कारोबारियों की चिंता बढ़ी। लंबी बंदी से 2024 की तरह व्यापार और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर असर का डर है।

भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में किसानों के आंदोलन के दौरान शंभू बॉर्डर कुछ समय के लिए बंद होने से अंबाला के व्यापारियों की चिंता बढ़ गई। कारोबारियों को आशंका थी कि यदि बॉर्डर फिर लंबे समय तक बंद रहा तो 2024 की तरह कारोबार पर गंभीर असर पड़ सकता है।

अंबाला: भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में किसानों के आंदोलन के दौरान हरियाणा-पंजाब के शंभू बॉर्डर को कुछ समय के लिए बंद किए जाने से अंबाला के व्यापारियों की चिंता एक बार फिर बढ़ गई। कारोबारियों का कहना है कि पिछले वर्ष लंबे समय तक बॉर्डर बंद रहने से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा था और वे अभी तक पूरी तरह उससे उबर नहीं पाए हैं।

किसान आंदोलन के कारण कुछ समय के लिए बंद हुआ शंभू बॉर्डर

भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में विभिन्न किसान संगठनों ने देशव्यापी आंदोलन शुरू किया था। इसी के तहत 21 जुलाई को दिल्ली में प्रस्तावित महापंचायत में शामिल होने जा रहे पंजाब के किसानों को हरियाणा पुलिस ने शंभू इंटरस्टेट बॉर्डर पर रोक दिया। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर बॉर्डर पर बैरिकेडिंग कर कुछ समय के लिए सीमा को पूरी तरह सील कर दिया गया। इसके चलते हरियाणा और पंजाब के बीच यातायात प्रभावित रहा और लोगों को वैकल्पिक मार्गों से यात्रा करनी पड़ी।

हालांकि यह बंदी लंबे समय तक नहीं रही, लेकिन इसकी खबर ने अंबाला के व्यापारियों और कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी। उन्हें आशंका थी कि यदि स्थिति फिर पहले जैसी बनी तो व्यापार को दोबारा बड़ा झटका लग सकता है।

2024 के आंदोलन का नुकसान आज भी नहीं भूले व्यापारी

अंबाला के व्यापारियों का कहना है कि शंभू बॉर्डर बंद होने की खबर ने उन्हें वर्ष 2024 के किसान आंदोलन की याद दिला दी। उस समय 'दिल्ली चलो' आंदोलन के दौरान शंभू बॉर्डर लंबे समय तक बंद रहा था, जिससे अंबाला के बाजारों पर गंभीर असर पड़ा था।

व्यापारियों के अनुसार अंबाला के बाजारों का सालाना कारोबार करीब 2,000 करोड़ रुपये का है। पंजाब से बड़ी संख्या में ग्राहक खरीदारी के लिए अंबाला आते हैं, लेकिन बॉर्डर बंद रहने के कारण ग्राहकों की आवाजाही लगभग ठप हो गई थी। इतना ही नहीं, चंडीगढ़ और अन्य राज्यों से आने वाले खरीदारों की संख्या भी काफी कम हो गई थी। कारोबार में आई गिरावट के कारण कई व्यापारियों को अपने कर्मचारियों की संख्या तक कम करनी पड़ी थी।

ट्रेड डील को लेकर किसानों की चिंता बरकरार

देश बचाओ मोर्चा के बैनर तले किसान संगठनों का कहना है कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील से भारतीय किसानों के हित प्रभावित हो सकते हैं। उनका आरोप है कि यदि कृषि और डेयरी उत्पादों पर आयात शुल्क कम किया गया तो अमेरिका से आने वाले सब्सिडी वाले उत्पाद भारतीय बाजार में सस्ते दामों पर उपलब्ध होंगे। इससे स्थानीय किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य मिलने में कठिनाई हो सकती है और उनकी आय पर सीधा असर पड़ सकता है।

इसी मांग को लेकर किसान संगठन लगातार सरकार पर दबाव बना रहे हैं और ट्रेड डील से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट नीति की मांग कर रहे हैं।

बीजेपी ने किसानों से संयम बरतने की अपील की

इस बीच पंजाब बीजेपी अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने किसानों से संयम बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर अभी कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है और सरकार किसानों तथा पशुपालकों के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगी।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आश्वासन का हवाला देते हुए कहा कि केंद्र सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि किसान संगठन सरकार के इन आश्वासनों से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं और उनका कहना है कि जब तक ट्रेड डील के सभी प्रावधान सार्वजनिक नहीं किए जाते, तब तक उनकी चिंताएं बनी रहेंगी।

व्यापारियों का भी मानना है कि किसान आंदोलन और बॉर्डर बंद होने जैसी परिस्थितियों का सीधा असर व्यापार, परिवहन और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। इसलिए सभी पक्षों को बातचीत के माध्यम से समाधान निकालना चाहिए, ताकि किसानों के हित सुरक्षित रहें और व्यापारिक गतिविधियां भी बिना किसी बाधा के जारी रह सकें।

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