बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना ने स्पष्ट किया कि उनकी देश वापसी अवामी लीग पर प्रतिबंध हटने और लोकतंत्र बहाल होने पर निर्भर करेगी। उन्होंने यूनुस सरकार पर कूटनीतिक विफलता और अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव का आरोप लगाया।
Bangaldesh: बांग्लादेश की अपदस्थ पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने स्पष्ट किया है कि उनका देश वापसी का निर्णय पूरी तरह लोकतंत्र की बहाली और अवामी लीग पर लगे प्रतिबंधों के हटने पर निर्भर करेगा। भारत में एक अज्ञात स्थान से पीटीआई-भाषा को दिए गए विशेष ईमेल साक्षात्कार में हसीना ने कहा कि वह तभी लौटेंगी जब बांग्लादेश में स्वतंत्र, निष्पक्ष और समावेशी चुनाव संपन्न हों। उन्होंने यह भी कहा कि उनके देश के लोग वही चाहते हैं जो लोकतंत्र में सही सहभागिता सुनिश्चित करे।
यूनुस सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
पूर्व प्रधानमंत्री ने यूनुस सरकार पर भारत के साथ संबंधों को कमजोर करने और चरमपंथी ताकतों को सशक्त बनाने का आरोप लगाया। हसीना ने कहा कि ढाका और नई दिल्ली के बीच संबंधों की मजबूती को यूनुस सरकार की “मूर्खतापूर्ण गतिविधियों” से खतरा है। उन्होंने भारत सरकार को शरण देने और उदारतापूर्ण आतिथ्य के लिए धन्यवाद दिया और बताया कि बांग्लादेश लौटने की उनकी प्राथमिक शर्त वही है जो जनता चाहती है: सहभागितापूर्ण लोकतंत्र की वापसी।
सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रही हसीना
शेख हसीना बांग्लादेश की सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रह चुकी हैं। 5 अगस्त 2024 को देश में बड़े पैमाने पर हिंसक विरोध प्रदर्शन के बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा और भारत आना पड़ा। उन्होंने स्वीकार किया कि सरकार विरोध प्रदर्शनों को पूरी तरह संभाल नहीं पाई थी, लेकिन उनका कहना था कि प्रदर्शनकारी छात्र नेताओं ने भीड़ को उकसाया।

हसीना ने उन रिपोर्टों को खारिज किया जिनमें कहा गया था कि उन्होंने अगले साल फरवरी में होने वाले चुनाव का बहिष्कार करने का आह्वान किया है। उनका कहना था कि अवामी लीग के बिना कोई भी चुनाव वैध नहीं होगा और लाखों समर्थकों की आवाज को नजरअंदाज करना गलत होगा।
अवामी लीग पर लगे प्रतिबंध को हटाने की मांग
हसीना ने कहा कि अवामी लीग पर लगे प्रतिबंध को हटाया जाना चाहिए ताकि पार्टी राजनीतिक संवाद में भाग ले सके। उनका कहना था कि भारत हमेशा बांग्लादेश का सबसे महत्वपूर्ण मित्र रहा है और रहेगा। उन्होंने यूनुस सरकार पर “मूर्खतापूर्ण और आत्म-पराजय वाली” कूटनीतिक गलतियों का आरोप लगाया, जिनसे ढाका-नई दिल्ली संबंधों को खतरा हुआ। हसीना का कहना था कि यूनुस सरकार भारत के प्रति शत्रुता दिखाकर कमजोर स्थिति में दिखाई देती है और चरमपंथियों के समर्थन पर निर्भर है।
अंतरराष्ट्रीय निगरानी और आईसीसी चुनौती
पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि वह अंतरराष्ट्रीय निगरानी में और अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय में मुकदमा सामना करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यूनुस सरकार ऐसी प्रक्रिया से बच रही है क्योंकि एक निष्पक्ष न्यायाधिकरण उन्हें बरी कर देगा। हसीना ने कहा कि उन्होंने यूनुस सरकार को चुनौती दी थी कि अगर वे आत्मविश्वासी हैं, तो उन्हें अंतरराष्ट्रीय अदालत में मुकदमा चलाना चाहिए।
लोकतंत्र पर यूनुस सरकार का प्रभाव
हसीना ने यूनुस सरकार को अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव करने और संविधान के उल्लंघन का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार विपक्षी दलों को कमजोर करने के लिए राजनीतिक मामलों में अत्यधिक दबाव डाल रही है और लोकतंत्र और न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान नहीं कर रही। हसीना के अनुसार, यूनुस को पश्चिमी उदारवादियों का कुछ समर्थन मिला था, लेकिन सरकार की कट्टरपंथी नीतियों और अल्पसंख्यकों के खिलाफ भेदभाव के कारण यह समर्थन अब खत्म हो गया।










