1 करोड़ की चोरी का माल बॉर्डर पर हड़पने का आरोप, उत्तराखंड SI समेत 4 गिरफ्तार नेपाल से आए फोन ने खोला राज

शिमला में करीब 1 करोड़ की चोरी के मामले में उत्तराखंड आबकारी SI समेत 4 गिरफ्तार हुए। रुद्रपुर बॉर्डर पर चोरी का माल हड़पने का आरोप, 80% सामान बरामद।
1 करोड़ की चोरी का माल बॉर्डर पर हड़पने का आरोप, उत्तराखंड SI समेत 4 गिरफ्तार नेपाल से आए फोन ने खोला राज
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शिमला में एक घर से करीब एक करोड़ रुपये के आभूषण, नकदी और अन्य कीमती सामान चोरी होने के मामले में जांच के दौरान उत्तराखंड आबकारी विभाग के एक दरोगा समेत चार कर्मचारियों की गिरफ्तारी से मामला नया मोड़ ले चुका है। आरोप है कि चोरी के सामान को लेकर जा रहे लोगों को उत्तराखंड के रुद्रपुर-रामपुर सीमा क्षेत्र में चेकिंग के दौरान रोका गया था। चेकिंग के बाद बरामद सामान को पुलिस के हवाले करने के बजाय कथित तौर पर उसमें से कीमती सामान निकाल लिया गया और चोरी के आरोपियों को आगे जाने दिया गया। हिमाचल पुलिस की जांच में सीसीटीवी फुटेज के जरिए कथित रूप से चेकिंग करने वाले कर्मचारियों की पहचान हुई, जिसके बाद चार लोगों को गिरफ्तार किया गया।

मामला शिमला के सदर थाना क्षेत्र में दर्ज चोरी की शिकायत से शुरू हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, कालीबाड़ी क्षेत्र की रहने वाली रेनू बालजी ने शिकायत दी थी कि उनके घर से सोने और हीरे के आभूषण, चांदी के सिक्के, करीब 1.5 लाख रुपये नकद, घड़ियां और अन्य कीमती सामान गायब हैं। शिकायत के बाद पुलिस ने घर में काम करने वाली नेपाल मूल की युवती करिश्मा और उसके साथियों की भूमिका की जांच शुरू की। पुलिस के मुताबिक, चोरी के बाद आरोपी उत्तराखंड की तरफ बढ़े थे।

पुलिस जांच के अनुसार, चोरी के बाद आरोपी उत्तर प्रदेश के रामपुर से रुद्रपुर की ओर जा रहे थे। इसी दौरान सीमा क्षेत्र में आबकारी विभाग की चेकिंग टीम ने उनकी गाड़ी को रोका। आरोप है कि तलाशी के दौरान चोरी का सामान बरामद हुआ, लेकिन बरामदगी को नियमानुसार पुलिस को सौंपने के बजाय उसमें से कुछ जेवर और अन्य कीमती सामान कथित तौर पर चेकिंग टीम में शामिल लोगों ने अपने पास रख लिया। इसके बाद चोरी के आरोपियों को छोड़ दिया गया। यह आरोप जांच और पुलिस कार्रवाई का हिस्सा है, इसलिए मामले में अंतिम स्थिति अदालत और आगे की जांच से स्पष्ट होगी।

इस पूरे मामले में सबसे अहम मोड़ तब आया, जब चोरी के आरोप में शामिल बताई जा रही नेपाल मूल की युवती नेपाल पहुंचने के बाद अपनी मालकिन को फोन कर कथित तौर पर पूरी जानकारी दी। रिपोर्टों के अनुसार, युवती ने बताया कि रास्ते में रुद्रपुर के पास चेकिंग के दौरान चोरी का सामान पकड़ लिया गया था और चेकिंग करने वाले कर्मचारियों ने सामान अपने कब्जे में ले लिया। इस फोन के बाद शिमला पुलिस को इस बात की जानकारी मिली कि चोरी के सामान की कड़ी उत्तराखंड के रुद्रपुर तक पहुंच रही है।

इसके बाद हिमाचल प्रदेश पुलिस ने उत्तराखंड पुलिस से संपर्क किया और रुद्रपुर क्षेत्र में जांच शुरू की। स्थानीय पुलिस की मदद से सीमा क्षेत्र और चेकिंग प्वाइंट के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई। फुटेज में चेकिंग करते कुछ कर्मचारी दिखाई दिए। पुलिस ने फुटेज और अन्य जांच के आधार पर आबकारी विभाग के दरोगा देवेंद्र कुमार, कांस्टेबल बलजीत सिंह, उपनल कर्मचारी पप्पू लाल और पीआरडी जवान नईम की पहचान की। चारों को बाद में हिमाचल पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तार आरोपियों में देवेंद्र कुमार की उम्र 56 वर्ष बताई गई है और वह रामनगर क्षेत्र के निवासी हैं। बलजीत सिंह 35 वर्ष के बताए गए हैं और किच्छा क्षेत्र से जुड़े हैं। पप्पू लाल 58 वर्ष के हैं और गदरपुर क्षेत्र के निवासी बताए गए हैं, जबकि नईम 36 वर्ष के हैं और केलाखेड़ा क्षेत्र से संबंधित हैं। पुलिस के अनुसार, चारों की गिरफ्तारी रुद्रपुर क्षेत्र से की गई और उन्हें शिमला ले जाया गया है, जहां मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

इस मामले में सीसीटीवी फुटेज जांच की महत्वपूर्ण कड़ी बनी। शुरुआत में यह पता लगाने की कोशिश की गई कि चोरी के सामान को लेकर जा रहे लोगों को किस टीम ने रोका था। जब बॉर्डर क्षेत्र की फुटेज खंगाली गई तो कथित तौर पर आबकारी विभाग के कर्मचारियों के चेकिंग करने की जानकारी सामने आई। इसके बाद जांच का दायरा चोरी करने वाले आरोपियों से आगे बढ़कर उन कर्मचारियों तक पहुंचा, जिन्होंने कथित तौर पर चोरी का सामान बरामद किया था।

शिमला पुलिस के अनुसार, चोरी की घटना में करीब एक करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति शामिल थी। इसमें सोने और हीरे के आभूषण, नकदी, घड़ियां और अन्य कीमती सामान बताए गए हैं। पुलिस ने जांच के दौरान चोरी की करीब 80 प्रतिशत संपत्ति बरामद करने की जानकारी दी है। बरामद सामान में चोरी के मामले से जुड़े कीमती सामान शामिल हैं। बाकी संपत्ति की बरामदगी और अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच अभी जारी है।

शिमला पुलिस ने इस मामले में 8 सितंबर को शिकायत मिलने के बाद जांच शुरू की थी। शिकायतकर्ता के मुताबिक सुबह घर में सामान बिखरा मिला और कमरों में रखी अलमारियां खुली थीं। जब परिवार ने सामान की जांच की तो सोने-हीरे के आभूषण, नकदी और अन्य कीमती सामान गायब मिले। इसके बाद पुलिस ने चोरी की जांच शुरू की और घर में काम करने वाली महिला समेत अन्य संदिग्धों की तलाश शुरू की।

जांच में यह भी सामने आया कि चोरी के बाद संदिग्ध उत्तराखंड की तरफ गए थे। पुलिस ने अलग-अलग स्थानों पर उनकी गतिविधियों और आवाजाही की जानकारी जुटाई। इसी क्रम में रुद्रपुर क्षेत्र के बॉर्डर चेकिंग प्वाइंट तक जांच पहुंची। वहां लगे कैमरों की फुटेज ने मामले की एक अहम कड़ी सामने रखी। हिमाचल पुलिस की टीम ने उत्तराखंड पुलिस के सहयोग से संदिग्ध कर्मचारियों से पूछताछ की और कथित तौर पर चोरी के माल की बरामदगी भी की।

मामले में उत्तराखंड आबकारी विभाग ने भी विभागीय स्तर पर कार्रवाई शुरू की है। रिपोर्टों के अनुसार जिला प्रशासन की ओर से दरोगा और कांस्टेबल के निलंबन की संस्तुति की गई थी और आबकारी आयुक्त स्तर से दोनों के निलंबन की कार्रवाई की गई। विभागीय जांच की जिम्मेदारी उप आयुक्त आबकारी हल्द्वानी विवेक सोनकिया को दिए जाने की जानकारी सामने आई है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि चेकिंग के दौरान वास्तव में क्या हुआ और विभागीय कर्मचारियों की भूमिका कितनी थी।

इस मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि चारों गिरफ्तार लोग एक ही विभाग के नियमित अधिकारी नहीं हैं। इनमें आबकारी विभाग का दरोगा और कांस्टेबल शामिल हैं, जबकि अन्य दो कर्मचारी उपनल और पीआरडी से जुड़े बताए गए हैं। इसलिए जांच में यह भी देखा जा रहा है कि उस समय चेकिंग टीम में किसकी क्या जिम्मेदारी थी और बरामद सामान को संभालने की प्रक्रिया क्या थी।

रिपोर्टों के मुताबिक, हिमाचल पुलिस की टीम ने रुद्रपुर में कई दिनों तक जांच की। स्थानीय पुलिस के सहयोग से सीसीटीवी फुटेज जुटाई गई और संदिग्ध कर्मचारियों की गतिविधियों को देखा गया। पूछताछ के बाद पुलिस ने चारों को हिरासत में लिया। इसके बाद चोरी के मामले से जुड़ी कीमती संपत्ति की बरामदगी की गई और आरोपियों को गिरफ्तार कर हिमाचल ले जाया गया।

मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि चोरी की घटना में शामिल लोगों की संख्या कितनी थी और चोरी के बाद सामान को कहां-कहां ले जाया गया। एक अज्ञात व्यक्ति की भूमिका सामने आने की भी रिपोर्ट है, जिसकी तलाश की जा रही है। इसके अलावा जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि बरामद सामान में से कितना सामान किस व्यक्ति के पास पहुंचा था।

पुलिस के सामने यह भी अहम सवाल है कि चोरी के सामान को सीमा क्षेत्र में रोके जाने के बाद उसकी आधिकारिक जब्ती क्यों नहीं दिखाई गई, यदि आरोपों की पुष्टि जांच में होती है। सामान्य तौर पर किसी अपराध से जुड़े सामान की बरामदगी होने पर उसे केस का हिस्सा बनाकर संबंधित जांच एजेंसी को सौंपा जाता है। इस मामले में पुलिस अब यह जांच रही है कि कथित रूप से बरामद सामान के साथ क्या प्रक्रिया अपनाई गई और उसमें नियमों का पालन हुआ या नहीं।

चोरी की मूल घटना को लेकर भी जांच जारी है। शिकायतकर्ता के घर से कीमती सामान गायब होने के बाद पुलिस ने घर में मौजूद लोगों, घरेलू कर्मचारियों और उनके संपर्कों की जानकारी जुटाई। नेपाल मूल की महिला के नेपाल पहुंचने और वहां से फोन करने की जानकारी सामने आने के बाद जांच की दिशा बदली। इसी फोन कॉल ने चोरी के सामान की संभावित बरामदगी और रुद्रपुर में हुई कथित चेकिंग के बीच कड़ी जोड़ने में मदद की।

फिलहाल पुलिस ने चोरी के मामले में करीब 80 प्रतिशत संपत्ति बरामद होने की जानकारी दी है। इसका मतलब यह है कि चोरी की पूरी संपत्ति अभी बरामद नहीं हुई है। पुलिस बाकी सामान की तलाश के साथ-साथ इस बात की भी जांच कर रही है कि कहीं चोरी के माल को अन्य स्थानों पर तो नहीं भेजा गया। गिरफ्तार लोगों से पूछताछ और बरामद सामान की जांच से आगे की तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।

इस घटना ने सीमा क्षेत्र में होने वाली चेकिंग व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। हालांकि इन सवालों का अंतिम जवाब विभागीय जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल चार कर्मचारियों पर चोरी के मामले से जुड़े गंभीर आरोप हैं और हिमाचल पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। आरोप सिद्ध होना अभी बाकी है।

उत्तराखंड प्रशासन की ओर से विभागीय कार्रवाई और हिमाचल पुलिस की आपराधिक जांच अब समानांतर रूप से आगे बढ़ रही है। एक तरफ यह पता लगाया जा रहा है कि चेकिंग के दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों ने क्या कार्रवाई की, वहीं दूसरी तरफ चोरी के मूल मामले में शामिल लोगों और बाकी बचे सामान की तलाश जारी है। जांच में सीसीटीवी फुटेज, बरामद सामान और आरोपियों से पूछताछ को महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जा रहा है।

फिलहाल इस मामले में सबसे बड़ा खुलासा नेपाल से आए उस फोन के बाद हुआ, जिसने शिमला पुलिस को रुद्रपुर तक पहुंचने वाली कड़ी दी। इसके बाद बॉर्डर की सीसीटीवी फुटेज खंगाली गई और कथित चेकिंग टीम की पहचान हुई। करीब एक करोड़ रुपये की चोरी के मामले में अब चार कर्मचारियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और चोरी की करीब 80 प्रतिशत संपत्ति बरामद होने की बात पुलिस ने कही है। आगे की जांच से यह स्पष्ट होगा कि पूरी घटना में कितने लोग शामिल थे और चोरी के सामान की बरामदगी के दौरान वास्तव में क्या हुआ था।

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