प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद के बीच योग गुरु बाबा रामदेव का बयान सामने आया है, जिसने धार्मिक और सामाजिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।
Ramdev on Shankaracharya Controversy: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ माघ मेले में हुए विवाद के बीच योग गुरु बाबा रामदेव ने प्रतिक्रिया दी है। गोवा में एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे बाबा रामदेव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि सनातनी इस समय आपस में ही लड़ने में व्यस्त हैं, जबकि पहले से ही भारत विरोधी और सनातन विरोधी दुश्मनों की कमी नहीं है।
किस संदर्भ में आया बाबा रामदेव का बयान?
बाबा रामदेव गोवा में एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे, जहां मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने शंकराचार्य विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद माघ मेले में पालकी और स्नान से जुड़े विवादों को लेकर चर्चा के केंद्र में हैं।बाबा रामदेव ने कहा कि सनातन परंपरा हमेशा से एकता, सह-अस्तित्व और सहिष्णुता का संदेश देती रही है, लेकिन आज संत समाज और सनातनी समुदाय के भीतर ही मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं, जो चिंता का विषय है।
‘आपस में नहीं, चुनौतियों के खिलाफ लड़ना चाहिए’

बाबा रामदेव ने अपने बयान में कहा, हम पहले से ही भारत विरोधी और सनातन विरोधी ताकतों से जूझ रहे हैं। ऐसे में संतों और सनातनियों का आपस में लड़ना ठीक नहीं है। यह समय एकजुट होने का है, न कि टकराव बढ़ाने का। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ देश विरोधी तत्व, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को नुकसान पहुंचाने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में, उन्होंने संत समाज से अपील की कि वे राजनीतिक या व्यक्तिगत नाराजगी को सार्वजनिक विवाद का रूप न दें।
बाबा रामदेव ने इस मौके पर गाय संरक्षण को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि गायों की रक्षा सिर्फ नारे लगाने से नहीं होगी, बल्कि इसके लिए ठोस प्रयास करने होंगे।उनके अनुसार, गायों को बचाना सभी हिंदुओं की साझा जिम्मेदारी है। सभी संतों को चाहिए कि वे अपने-अपने आश्रमों में 5 से 10 हजार गायों की देखभाल करें। पतंजलि पीठ आज करीब एक लाख गायों का संरक्षण कर रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि शंकराचार्यों और बड़े धार्मिक संस्थानों को इस दिशा में आगे आना चाहिए, ताकि गाय संरक्षण केवल आंदोलन न रहकर व्यवहारिक पहल बन सके।
प्रयागराज माघ मेले में भी जताई थी चिंता
इससे पहले बाबा रामदेव प्रयागराज के माघ मेले में संगम स्नान के लिए पहुंचे थे। वहां भी उन्होंने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ कथित बदसलूकी और विवाद को “दुर्भाग्यपूर्ण” बताया था। उन्होंने कहा, यह स्वीकार्य नहीं है कि हमारे पूजनीय संतों और योगियों को अपमान या अपशब्दों का सामना करना पड़े। चाहे वह शंकराचार्य हों या कोई भी साधु, हर व्यक्ति की गरिमा का सम्मान होना चाहिए।
बाबा रामदेव ने संतों की भूमिका पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि साधु वही होता है जिसने अहंकार त्याग दिया हो। उनका कहना था, तीर्थ स्थल पर न स्नान को लेकर विवाद होना चाहिए, न पालकी को लेकर। धर्म स्थानों पर विवाद सनातन की छवि को नुकसान पहुंचाता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि जब बाहरी शक्तियां भारत और सनातन धर्म को कमजोर करने की कोशिश कर रही हों, तब अंदरूनी कलह और ज्यादा नुकसानदायक साबित होती है।











