बिहार के भागलपुर जिले का सुल्तानगंज विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले के पहले दिन पूरी तरह शिवभक्ति में डूबा नजर आया। देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में कांवरिया और शिवभक्त सुल्तानगंज पहुंचे। महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों से आए श्रद्धालुओं ने गंगा घाट पर स्नान और पूजा-अर्चना की। इसके बाद पवित्र गंगाजल कांवर में भरकर बाबा बैद्यनाथ के जलाभिषेक के लिए देवघर की पैदल यात्रा शुरू की।
Ajgaibinath Temple में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ रही। भक्तों ने बाबा अजगैबीनाथ की पूजा-अर्चना की और गंगा जल लेकर अपनी कांवर यात्रा शुरू की। घाटों पर हर-हर महादेव, बोल बम और बाबा बैद्यनाथ के जयकारों से वातावरण गूंजता रहा। भगवा वस्त्र पहने कांवरियों की लंबी कतारें सुल्तानगंज से देवघर की ओर बढ़ती नजर आईं।
श्रावणी मेले की सबसे खास परंपरा सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर देवघर स्थित Baba Baidyanath Temple तक पैदल यात्रा करना है। कांवरिया सुल्तानगंज में गंगा से जल भरते हैं और करीब 100 किलोमीटर की यात्रा पूरी कर देवघर पहुंचते हैं। वहां बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करने के बाद उनकी कांवर यात्रा पूरी होती है।
मेले के पहले दिन ही सुल्तानगंज के गंगा घाटों पर देश के विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालुओं की मौजूदगी देखने को मिली। कई कांवरिया समूहों में पहुंचे तो बड़ी संख्या में श्रद्धालु परिवार और मित्रों के साथ यात्रा करते नजर आए। दूर-दराज से आने वाले शिवभक्तों के लिए रास्ते में सेवा शिविर और ठहरने की व्यवस्थाएं भी की गई हैं।
श्रावणी मेले को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर विशेष तैयारी की है। सुल्तानगंज शहर और कांवरिया मार्ग पर वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए विशेष ट्रैफिक प्लान लागू किया गया है। भीड़ वाले क्षेत्रों में सामान्य वाहनों के प्रवेश को नियंत्रित किया जा रहा है, ताकि कांवरियों को पैदल चलने में परेशानी न हो।
गंगा घाटों पर भी सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं। पुलिस और प्रशासन की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं। श्रद्धालुओं को सुरक्षित तरीके से स्नान कराने और घाटों पर भीड़ को नियंत्रित रखने के लिए जवानों की तैनाती की गई है। नदी में किसी तरह की अनहोनी रोकने के लिए भी सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
कांवरिया मार्ग पर वाहनों के दबाव को कम करने के लिए रूट डायवर्जन और पार्किंग व्यवस्था का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रशासन की कोशिश है कि मेले में आने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को यातायात संबंधी परेशानी कम से कम हो। भारी वाहनों की आवाजाही को लेकर भी निर्धारित व्यवस्था लागू की गई है।
सुल्तानगंज से देवघर तक कांवरिया पथ पर शिवभक्तों की सेवा के लिए जगह-जगह शिविर लगाए गए हैं। इन शिविरों में पानी, शरबत, भोजन, चिकित्सा सहायता और आराम की व्यवस्था की जाती है। कई सामाजिक और धार्मिक संगठन भी कांवरियों की सेवा में जुटे हैं।
मेले के दौरान सुल्तानगंज के बाजारों में भी खास रौनक देखने को मिल रही है। कांवर, पूजा सामग्री, भगवा कपड़े, गेरुआ गमछे, रुद्राक्ष, बेलपत्र और अन्य धार्मिक सामान की दुकानें सज गई हैं। कांवरिया पथ के आसपास दुकानदारों ने श्रद्धालुओं की जरूरत के हिसाब से विशेष इंतजाम किए हैं।
श्रावणी मेले में आने वाले कांवरियों के लिए इस बार भी प्रशासन की ओर से स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। लंबी पैदल यात्रा के दौरान थकान, चोट या अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर चिकित्सा केंद्रों से मदद उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।
श्रद्धालुओं में भी मेले को लेकर जबरदस्त उत्साह है। कई कांवरियों ने बताया कि वे वर्षों से सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर देवघर जाते हैं। कुछ श्रद्धालु पहली बार इस यात्रा में शामिल हुए हैं। उनका कहना है कि सुल्तानगंज से जल भरने और बाबा बैद्यनाथ के दरबार तक पैदल पहुंचने की उनकी मनोकामना पूरी हुई है।
मेले की शुरुआत के साथ ही सुल्तानगंज से देवघर जाने वाला कांवरिया मार्ग शिवभक्तों से भर गया है। बोल बम के जयघोष के बीच कांवरिए अपने कंधे पर कांवर लेकर लगातार आगे बढ़ रहे हैं। प्रशासन ने भी श्रद्धालुओं से निर्धारित मार्ग का पालन करने, नदी में सावधानी से स्नान करने और यातायात व्यवस्था में सहयोग करने की अपील की है।
विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले के पहले दिन से ही जिस तरह महाराष्ट्र, गुजरात समेत देश के कई राज्यों से श्रद्धालु सुल्तानगंज पहुंच रहे हैं, उससे आने वाले दिनों में भी कांवरिया पथ पर भारी भीड़ रहने की संभावना है। सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर देवघर की ओर बढ़ते शिवभक्तों के साथ पूरा इलाका बोल बम और हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज रहा है।










