चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि SIR आदेश विधायी प्रकृति का है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची में त्रुटियों को दूर करना और वैध पंजीकरण सुनिश्चित कर चुनावों की निष्पक्षता और पारदर्शिता बढ़ाना है।
New Delhi: चुनाव आयोग ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि विभिन्न राज्यों में मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन (SIR) संबंधी उसका आदेश विधायी प्रकृति का है। आयोग ने कहा कि इस आदेश में मार्गदर्शक सिद्धांत और आवश्यक दस्तावेजों का स्पष्ट उल्लेख किया गया है। यह हलफनामा सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाओं की अंतिम सुनवाई के दौरान पेश किया गया।
सुप्रीम कोर्ट में पेश दलीलें
चुनाव आयोग की ओर से सीनियर एडवोकेट राकेश द्विवेदी ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ के सामने यह दलील दी। उन्होंने कहा कि उनका SIR आदेश पूरे देश में लागू होता है, असम मामले को छोड़कर। द्विवेदी ने बताया कि इस आदेश में स्पष्ट मार्गदर्शक सिद्धांत और दस्तावेजों का सेट तय किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि यह आदेश केवल एक सामान्य प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची में सही और वैध पंजीकरण सुनिश्चित करना है।
याचिकाओं में उठाए गए मुद्दे
इन याचिकाओं में बिहार सहित कई राज्यों में SIR प्रक्रिया को चुनौती दी गई थी। प्रमुख याचिकाओं में गैर-सरकारी संगठन 'एसोसिएशन फार डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स' की ओर से दायर याचिका भी शामिल थी। इन याचिकाओं में चुनाव आयोग की शक्तियों के दायरे, चुनावी उद्देश्यों के लिए नागरिकता के निर्धारण और मतदान के मौलिक अधिकार से जुड़े संवैधानिक सवाल उठाए गए।
आयोग के दावे का आधार
द्विवेदी ने कोर्ट में कहा कि मतदाता सूचियों की तैयारी और संशोधन को नियंत्रित करने और चुनावों के संचालन को विनियमित करने के लिए कानूनी योजनाओं का स्पष्ट प्रावधान है। उन्होंने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 62 का हवाला दिया और कहा कि मतदाता पंजीकरण विशिष्ट वैधानिक शर्तों के अधीन है। इसके अलावा उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 324 से 326 और 1950 के अधिनियम की धारा 19 का उल्लेख करते हुए कहा कि केवल नागरिकों को ही मतदाता के रूप में पंजीकृत किया जा सकता है।
संविधान निर्माताओं का उद्देश्य
द्विवेदी ने कहा कि संविधान निर्माताओं का यही उद्देश्य था कि मतदान का अधिकार केवल योग्य नागरिकों को मिले। उन्होंने स्पष्ट किया कि SIR प्रक्रिया इस धारणा पर आधारित नहीं है कि प्रत्येक मतदाता को दस्तावेजी प्रमाण प्रस्तुत करना होगा। इसका उद्देश्य केवल सही और वैध मतदाता सूची तैयार करना और चुनावों की पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
SIR प्रक्रिया का महत्व
विशेष गहन संशोधन (SIR) का उद्देश्य मतदाता सूची में त्रुटियों और विसंगतियों को दूर करना है। इसमें मृतक मतदाताओं, डुप्लिकेट पंजीकरण और अन्य अवैध प्रविष्टियों को हटाने की प्रक्रिया शामिल है। आयोग का कहना है कि यह प्रक्रिया चुनावों की निष्पक्षता और पारदर्शिता के लिए आवश्यक है। SIR के तहत केवल वैध दस्तावेजों और मार्गदर्शक सिद्धांतों के आधार पर ही संशोधन किया जाता है।
चुनाव आयोग की भूमिका
चुनाव आयोग का संवैधानिक दायित्व है कि वह केवल नागरिकों को ही मतदाता सूची में शामिल करे। इसके लिए आयोग को संविधान और कानून द्वारा पर्याप्त अधिकार प्राप्त हैं। SIR प्रक्रिया इसी संवैधानिक और विधायी अधिकार का पालन करती है। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया कि इसकी प्रक्रिया पूरे देश में समान रूप से लागू होती है, जिससे किसी राज्य में भेदभाव या असमानता न हो।
सुप्रीम कोर्ट ने इन याचिकाओं की अंतिम सुनवाई के दौरान आयोग के हलफनामे को ध्यान से सुना। आयोग ने अपने दावों के समर्थन में स्पष्ट किया कि SIR आदेश विधायी प्रकृति का है और इसमें चुनावों की पारदर्शिता और मतदाता अधिकारों की रक्षा के लिए पर्याप्त प्रावधान हैं। कोर्ट अब इस हलफनामे के आधार पर आगे का निर्णय ले सकती है।










